जन समाचार मंच


चुनाव के दौरान सरकारी माध्यमों का उपयोग प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। माकपा ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने खुद आदर्श आचार संहिता के इस निर्देश का उल्लंघन किया है। शनिवार रात साढ़े आठ बजे, संसद में डिलिमिटेशन बिल (परिसीमन विधेयक) के रुक जाने के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर 'महिला विरोधी' होने से लेकर 'भ्रूण हत्या' के लिए जिम्मेदार होने तक के गंभीर आरोप लगाए। विपक्षी दलों का नाम लेकर दिए गए इस भाषण को 'देश के नाम प्रधानमंत्री का संबोधन' शीर्षक के तहत प्रसारित किया गया, जिसे माकपा ने चुनावी प्रचार करार दिया है।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव होने वाले हैं और आदर्श आचार संहिता लागू है। ऐसे में सरकारी प्रचार माध्यम दूरदर्शन का उपयोग राजनीतिक भाषण के लिए करना नियमों के विरुद्ध है।
महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित हो गया था, लेकिन मोदी सरकार ने इसे लागू नहीं किया। इसके बजाय, परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटें बढ़ाने के उद्देश्य से नए संशोधन पेश किए गए।
प्रस्तावित परिसीमन फार्मूले के अनुसार, उत्तर भारतीय राज्यों में सीटें आनुपातिक रूप से अधिक बढ़ेंगी, जिससे देश के संघीय ढांचे का संतुलन बिगड़ने का डर है। इसी वजह से यह प्रयास लोकसभा में रुक गया।
रविवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री ने फिर से विपक्ष पर 'महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण रोकने' का आरोप मढ़ा। इसके जवाब में माकपा सहित वामपंथियों का कहना है कि दो साल पहले पारित महिला आरक्षण कानून को जनगणना और परिसीमन की शर्तों के बिना भी लागू किया जा सकता है, लेकिन सरकार की मंशा साफ नहीं है।
बल्कि मोदी सरकार महिला आरक्षण की आड़ में 2029 के चुनाव से पहले अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में सीटें बढ़ाने की रणनीति बना रही है। महिलाओं को केवल राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
वामपंथियों ने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के समय ही पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू कर दिया गया था, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बना। यह केवल वाममोर्चा सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण संभव हो पाया था।
साभार: गणशक्ति
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प्रकाशित: 19 अप्रैल 2026 • 2 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं?! अफसरों के दम पर स्वायत्तता का नाटक बंद करो!" स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!" - दार्जिलिंग के कलामंदिर हॉल में आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार स्वायत्त निकाय जीटीए (GTA) में प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के बजाय प्रशासक बिठाकर लोकतंत्र और पहाड़ के अधिकारों का हनन कर रही है। कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक क्षेत्रीय स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश का दावा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा न तो बहुलतावाद को मानती है और न ही विविधता का सम्मान करती है। पार्टी ने घोषणा की कि वे संविधान की छठी अनुसूची, भूमि अधिकार, चाय बागान श्रमिकों की बदहाली, पर्यावरण विनाश और नागरिकता के नाम पर हो रहे भेदभाव के मुद्दों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में पहाड़ की जनता के बीच एक व्यापक जन-अभियान चलाएंगे।
केशव कुमार भट्टड़ • 14 सितंबर 2026
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