[ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) ने चुनाव आयोग को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बावजूद सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन का इस्तेमाल कर राजनीतिक भाषण दिया। शिकायत में कहा गया कि 18 अप्रैल का संबोधन खुलकर राजनीतिक था, जिसमें विपक्षी दलों पर हमला किया गया और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई। सीपीआई(एम) ने चुनाव आयोग से मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के इस गंभीर उल्लंघन पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव के दौरान सार्वजनिक प्रसारक को राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल करना निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के सिद्धांत को कमजोर करता है। ]
संसद में हार, हवा में हमला — वामपक्ष ने मोदी पर दूरदर्शन के ‘दुरुपयोग’ का आरोप लगाया
नई दिल्ली: संसद में 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक की हार के बाद तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वामपंथी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे संसद की बड़ी हार से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया और कहा कि चुनावी मौसम में यह कदम चुनाव नियमों का साफ उल्लंघन है।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) ने चुनाव आयोग को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बावजूद सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन का इस्तेमाल कर राजनीतिक भाषण दिया। शिकायत में कहा गया कि 18 अप्रैल का संबोधन खुलकर राजनीतिक था, जिसमें विपक्षी दलों पर हमला किया गया और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई। सीपीआई(एम) ने चुनाव आयोग से मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के इस गंभीर उल्लंघन पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव के दौरान सार्वजनिक प्रसारक को राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल करना निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के सिद्धांत को कमजोर करता है।
सीपीआई (एम) ने दर्ज कराई चुनाव आयोग को औपचारिक शिकायत
सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी की शिकायत पत्र के मुख्य अंश:
“यह मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के प्रावधान का [Flagrante Delicto (फ्लैग्रेंटे डेलिक्टो - "रंगे हाथों पकड़ा जाना")] उल्लंघन है। ‘सत्तारूढ़ दल’ शीर्षक के तहत धारा 4 में साफ लिखा है कि चुनाव के दौरान सरकारी खर्च पर विज्ञापन और आधिकारिक मीडिया का दुरुपयोग कर राजनीतिक प्रचार नहीं किया जाना चाहिए। दूरदर्शन जैसे सार्वजनिक प्रसारक को चुनाव के दौरान राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल करना निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत को कमजोर करता है। इससे असमान अवसर पैदा होता है। हम चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि इस उल्लंघन पर तुरंत संज्ञान ले और प्रधानमंत्री तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करे।” — एम.ए. बेबी, महासचिव, सीपीआई (एम). दिनांक: 19 अप्रैल 2026
सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण संसद में हुई राजनीतिक हार के बाद चेहरा बचाने की कोशिश भर था। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं का आरक्षण बिना परिसीमन या जनगणना के तुरंत लागू किया जा सकता है। उन्होंने सरकार पर इस मुद्दे को राजनीतिक साजिश के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इसी मुद्दे पर सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी. संदोश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन पूरी तरह राजनीतिक था। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी संसाधनों और सार्वजनिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल राजनीतिक भाषण देने के लिए चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन है। इससे चुनाव आयोग द्वारा बनाए रखा जाने वाला समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होता है।
सीपीआई राज्यसभा सांसद पी. संदोश कुमार का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र:
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन पूरी तरह राजनीतिक प्रकृति का था। यह संबोधन दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे राष्ट्रीय सार्वजनिक प्रसारकों पर प्रसारित किया गया।
सरकारी संसाधनों और सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल राजनीतिक भाषण देने के लिए चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन है।यह चुनाव आयोग द्वारा बनाए रखे जाने वाले समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करता है। मैं चुनाव आयोग से अपील करता हूं कि इस मामले में तुरंत और ईमानदारी से कार्रवाई करे, जांच शुरू करे और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखे।” — सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र में।
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ये दोनों पत्र वामपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर लगाए गए गंभीर आरोपों को दर्शाते हैं। वामपक्षी नेता लगातार कह रहे हैं कि 18 अप्रैल का राष्ट्र के नाम संबोधन चुनावी नियमों का उल्लंघन था और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए था।यह विवादास्पद विधेयक महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव रखता था, लेकिन इसे परिसीमन और भविष्य की जनगणना से जोड़ दिया गया था। लगभग 22 घंटे की बहस के बाद विधेयक को वोटिंग में हरा दिया गया। कुल 528 सदस्यों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विपक्ष में वोट किया। इससे भाजपा नीत एनडीए सरकार को बड़ा झटका लगा।
हार के बाद दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर महिलाओं के आरक्षण में बाधा डालने का आरोप लगाया और इसे झूठ तथा साजिश बताया। लेकिन विपक्ष ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा, जिससे संसद में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
सीपीआई के केरल राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने प्रधानमंत्री से कहा कि उन्हें महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए — विधेयक हारने के लिए नहीं, बल्कि 2023 में पारित महिलाओं के आरक्षण कानून को लागू न करने के लिए। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर महिलाओं को राजनीतिक औजार मानने का आरोप लगाया और कहा कि महिलाओं के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। सीपीआई(एम) के राज्यसभा नेता जॉन ब्रिटास ने प्रधानमंत्री के संबोधन को अभूतपूर्व -अशोभनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब राष्ट्र के नाम संबोधन का इस्तेमाल विपक्ष पर राजनीतिक आरोप लगाने के लिए किया गया। ब्रिटास ने कहा कि मोदी संसद में ही जवाब दे सकते थे, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल किया जो पूरी तरह अनुचित था।
ब्रिटास ने यह भी इशारा किया कि प्रधानमंत्री के बयान खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों को निशाना बना रहे थे। इससे साफ है कि सरकार का रुख चुनावी फायदे से प्रेरित है, न कि महिलाओं के सच्चे सशक्तिकरण से।
यह विधेयक संसद के विशेष सत्र में परिसीमन विधेयक और संघ राज्य क्षेत्र कानून संशोधन विधेयक के साथ पेश किया गया था। विपक्ष ने 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने से जोड़ने की आलोचना की। आलोचकों का कहना है कि इससे दक्षिणी राज्यों का सापेक्ष प्रतिनिधित्व कम होगा और संघीय संतुलन बिगड़ सकता है।
लोकसभा में सरकार की यह हार हाल के वर्षों में एनडीए की सबसे बड़ी विधायी असफलताओं में से एक मानी जा रही है। विपक्षी दलों का दावा है कि यह नतीजा सुधार के नाम पर विवादास्पद फैसले थोपने के खिलाफ व्यापक विरोध को दिखाता है।
