वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराष्ट्रीय

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राष्ट्रीय

ध्रुवीकरण के बावजूद पश्चिम बंगाल में वामपंथियों ने छोड़ी अपनी छाप: एम.ए. बेबी

श्रेया जायसवाल•04 मई 20263 मिनट पठन46 बार पढ़ा गया
"राष्ट्रीय राजनीति में वामपंथी ताकतों की मजबूती आवश्यक है। देश के गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के हक के लिए केवल वामपंथी ही असली लड़ाई लड़ते हैं।"
ध्रुवीकरण के बावजूद पश्चिम बंगाल में वामपंथियों ने छोड़ी अपनी छाप: एम.ए. बेबी

ध्रुवीकरण के बावजूद पश्चिम बंगाल में 

वामपंथियों ने छोड़ी अपनी छाप: एम.ए. बेबी

सीपीआई(एम) के महासचिव  एम.ए. बेबी ने दिल्ली के ए.के. गोपालन भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "पश्चिम बंगाल में तीव्र राजनीतिक ध्रुवीकरण के बावजूद वामपंथी कई सीटों पर अपनी ताकत बढ़ाने में सफल रहे हैं।"

उन्होंने विभिन्न राज्यों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केरल में भाजपा की हार, पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और तेलंगाना में टीवीके (TVK) का एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरना महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्टालिन की टीवीके से हार पर चिंता व्यक्त की और नोट किया कि असम में भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखने में सफल रही है।

बेबी ने कहा, "केरल में दस साल बाद वामपंथियों को हार का सामना करना पड़ा है। केंद्र सरकार की विभिन्न बाधाओं के बावजूद उन्होंने लोगों के विकास के लिए काम करना जारी रखा था। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में गुस्सा था। इसके अलावा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, दोनों दलों द्वारा भारी खर्च और एसआईआर (SIR) जैसे कारक प्रभावी रहे। इस ध्रुवीकरण के बीच भी वामपंथियों ने राज्य में अपना वोट बैंक सुरक्षित रखा है। एक अंतराल के बाद अब बंगाल विधानसभा में वामपंथी प्रतिनिधि मौजूद होंगे। पश्चिम बंगाल में तीव्र ध्रुवीकरण के बीच 35 सीटों पर वामपंथियों का वोट शेयर बढ़ा है, हालांकि हम और बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रहे थे।"

चिंता जताते हुए सीपीआई(एम) नेता ने कहा, "असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के परिणाम कट्टर दक्षिणपंथी ताकतों के उभार का संकेत दे रहे हैं, जिसे देश के लिए खतरा माना जा रहा है।"

उन्होंने आगे कहा, "जिन लोगों ने वामपंथियों पर भरोसा जताया है, हम उनका सम्मान करते हैं। हम जनमत को स्वीकार करते हैं और जनता की मांगों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखने के लिए हमारी लड़ाई चलती रहेगी।"

बेबी ने जानकारी दी कि राज्यों के चुनावी परिणामों, विशेषकर केरल के नतीजों पर पार्टी की केंद्रीय समिति और पोलिटब्यूरो  में विस्तार से चर्चा की जाएगी।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल में 'बंगाल बचाओ' और अन्य कार्यक्रमों को जनता का अच्छा समर्थन मिला है। केरल के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वहां आमतौर पर हर पांच साल में सरकार बदल जाती है, लेकिन पिछले दस वर्षों में वामपंथी सरकार ने विकास के अभूतपूर्व कार्य किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज केरल गरीबी मुक्त है।

अंत में उन्होंने जोर देकर कहा, "राष्ट्रीय राजनीति में वामपंथी ताकतों की मजबूती आवश्यक है। देश के गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के हक के लिए केवल वामपंथी ही असली लड़ाई लड़ते हैं।"

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

ध्रुवीकरण के बावजूद पश्चिम बंगाल में वामपंथियों ने छोड़ी अपनी छाप: एम.ए. बेबी

प्रकाशित: 04 मई 2026 • 3 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
राज्य

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

हिंदू-मुस्लिम सभी बुलडोजर के शिकार होंगे: मोहम्मद सलीम

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

बुलडोजर नीति के खिलाफ भी लड़ेंगे वामपंथी: मोहम्मद सलीम

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव

14 जून 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राष्ट्रीय

प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।

केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

राष्ट्रीय

नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।

केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

राष्ट्रीय

'पहाड़' पर 'दिल्ली' का ताला: स्वायत्तता छीनने पर गरजे मोहम्मद सलीम!

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं?! अफसरों के दम पर स्वायत्तता का नाटक बंद करो!" स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!" - दार्जिलिंग के कलामंदिर हॉल में आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार स्वायत्त निकाय जीटीए (GTA) में प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के बजाय प्रशासक बिठाकर लोकतंत्र और पहाड़ के अधिकारों का हनन कर रही है। कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक क्षेत्रीय स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश का दावा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा न तो बहुलतावाद को मानती है और न ही विविधता का सम्मान करती है। पार्टी ने घोषणा की कि वे संविधान की छठी अनुसूची, भूमि अधिकार, चाय बागान श्रमिकों की बदहाली, पर्यावरण विनाश और नागरिकता के नाम पर हो रहे भेदभाव के मुद्दों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में पहाड़ की जनता के बीच एक व्यापक जन-अभियान चलाएंगे।

केशव कुमार भट्टड़ • 14 सितंबर 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement