जन समाचार मंच


क्रांतिकारी प्रीतिलता वाद्देदार की 115 वीं जयंती पर श्रद्धांजलि !
क्रांतिकारी आंदोलन की पहली महिला शहीद प्रीतिलता वाद्देदार का जन्म 5 मई 1911 में चटगांव में हुआ था । अंग्रेजी शासकों के अत्याचार से देश को आजाद कराने के लिए उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर यूरोपियन क्लब पर हमला कर दिया।पुलिस के आने से पहले प्रीतिलता ने पोटेशियम सायनाइड खाकर अपने प्राण त्याग दिए।पुलिस को शव मिलने पर पता चला कि पुरुष के वेश में एक महिला क्रांतिकारी थी।उनके पाकेट से एक लिखित बयान मिला।जिसमें प्रीतिलता ने लिखा था- " देश की आजादी की लड़ाई में नारियों और पुरुषों के बीच भेदभाव से मुझे तकलीफ हुई थी।जब हमारे भाई देश को आजाद कराने की लड़ाई में उतर सकते हैं तो हम बहनें क्यों पीछे रहेंगी।इतिहास में बहुत सारे उदाहरण है ,राजपूत नारियाँ वीरता के साथ युद्ध के मैदान में युद्ध करने एवं देश को आजाद कराने और महिलाओं की मर्यादा की रक्षा के लिए शत्रु का प्राण तक ले लेने में उन्हें दुविधा नहीं होती थी।ऐसी नारियों की वीरगाथाएँ इतिहास के पन्नों से भरी पड़ी हैं। फिर क्यों आज की भारतीय महिलाएँ विदेशी गुलामी की जंजीरों से अपने देश को आजाद कराने के लिए इस युद्ध में क्यों शामिल नहीं हो सकती ? जब बहनें भाइयों के साथ सत्याग्रह आंदोलन में शामिल हो सकती हैं तब क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल होने में क्या परेशानी है ? दुनिया के क्रांतिकारी आंदोलन में बहुत सारी महिलाएँ शामिल हुई थी।तब क्यों भारतीय महिलाएँ इस क्रांतिकारी रास्ता को अन्याय महसूस करेंगी ।आज महिलाओं ने शपथ लिया है, हमारे देश की बहनें खुद को कमजोर न समझे। क्रांतिकारी महिला हजारों मुसीबतों और बाधाओं को पार कर इस क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल होंगी और इसके लिए खुद को तैयार करना होगा।- इसी उम्मीद के साथ आज मैं अपना आत्मबलिदान कर रही हूँ ।"
प्रीतिलता वाद्देदार
23 सितम्बर,1932
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
क्या यह लेख उपयोगी था?
अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 05 मई 2026 • 2 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

पश्चिम बंगाल के रानीगंज से हाल ही में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति गायब कर दिए जाने पर प्रोफेसर जेता सांकृत्यायन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आई है। जेता सांकृत्यायन अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन और उनकी पत्नी डॉ. कमला सांकृत्यायन (जो स्वयं एक लेखिका और विद्वान थीं) के बेटे हैं। उन्होंने उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय (North Bengal University) और सिक्किम यूनिवर्सिटी (गंगटोक) में लंबे समय तक अर्थशास्त्र विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं। प्रो. जेता सांकृत्यायन अपने पिता महापंडित राहुल सांकृत्यायन के साहित्यिक और ऐतिहासिक योगदान को संजोने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
केशव कुमार भट्टड़ • 17 जुलाई 2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...