जन समाचार मंच

ममता के घर और भतीजे के ‘महल’ से
हटाई गई अतिरिक्त सुरक्षा

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अब तक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को जेड प्लस (Z+) श्रेणी से भी अधिक सुरक्षा कवच मिला हुआ था।
बुधवार तड़के कोलकाता पुलिस ने ममता बनर्जी के घर, अभिषेक बनर्जी के आलीशान घर 'शांतिनिकेतन' और कैमक स्ट्रीट
स्थित उनके कार्यालय के सामने से उस अतिरिक्त सुरक्षा घेरे को हटा लिया।
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लालबाजार (पुलिस मुख्यालय) की ओर से मंगलवार को ही बता दिया गया था कि इन तीनों जगहों पर बुधवार सुबह 6:30
बजे से अतिरिक्त बल तैनात नहीं रहेगा। उसी के मुताबिक, बुधवार सुबह से सुरक्षा में कटौती कर दी गई। अभिषेक के घर
और दफ्तर के सामने पुलिसकर्मियों के लिए बनाए गए कियोस्क (चौकियां) सुबह-सुबह हटा लिए गए।
कालीघाट में मुख्यमंत्री के घर वाली गली के मुहाने पर लगा 'ऑटोमैटिक गार्डवॉल' या सिजर बैरिकेड भी हटा दिया गया।
लगभग एक दशक बाद पहली बार हरीश चटर्जी स्ट्रीट के निवासी बिना किसी चेकिंग या पुलिस की निगरानी के अपने घर
और मोहल्ले में सामान्य रूप से आ-जा सके।
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ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए घोषित जेड प्लस श्रेणी से कहीं बहुत अधिक सुरक्षा व्यवस्था की
गई थी। कोलकाता पुलिस के अनुसार, 9 कैमक स्ट्रीट (अभिषेक बनर्जी का व्यावसायिक कार्यालय), 121 कालीघाट रोड
( ममता बनर्जी का घर और 188 ए, हरीश चटर्जी स्ट्रीट (अभिषेक बनर्जी का 'महल') - इन तीन ठिकानों से 'अतिरिक्त
सुरक्षा' हटा ली गई है। अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी और अतिरिक्त गाड़ियाँ, जो भी तैनात थीं, उनमें कटौती की जा रही है।
हालांकि, एक व्यक्ति को जेड प्लस सुरक्षा के तहत जो सुरक्षा मिलनी चाहिए, वह बरकरार है।
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बुधवार सुबह जैसे ही अतिरिक्त पुलिसकर्मी अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर रवाना हुए, ये 'VVIP' सड़कें आम जनता
के लिए खुल गईं। हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर ममता बनर्जी की पड़ोसी महिलाओं ने बैरिकेड हटने पर राहत जताते हुए कहा,
“हमारे घर पर रिश्तेदार तक नहीं आ पाते थे। अपने ही मोहल्ले में घुसने के लिए पुलिस को पहचान पत्र दिखाना पड़ता
था। रोजमर्रा की जिंदगी निगरानी में थी। देर रात घर लौटने पर भी गली के मुहाने पर पुलिस की रोक-टोक का सामना
करना पड़ता था। अगर मुख्यमंत्री को अपने ही इलाके में सुरक्षा का इतना डर था, तो वह सरकारी आवास में जाकर रह
सकती थीं। पाम एवेन्यू में भी तो एक मुख्यमंत्री रहते थे, वहाँ के लोगों को कभी ऐसी परेशानी हुई हो, ऐसा कभी नहीं सुना
गया।” (ज्ञात रहे कि पाम एवेन्यू के डेढ़ कमरों के फ्लैट में भूतपूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य रहते थे - वाम की आवाज़)
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हरीश चटर्जी स्ट्रीट, हरीश मुखर्जी रोड, कालीघाट रोड, बलराम बसु लेन, हाजरा रोड और रानी शंकरी लेन का यह पूरा
इलाका पिछले दस सालों से पुलिस सुरक्षा के कारण लगभग बंद जैसा था। आम लोगों की आवाजाही बाधित होती थी।
पैदल यात्रियों के लिए हरीश मुखर्जी रोड का फुटपाथ पूरी तरह बंद था। सड़क का एक हिस्सा घेरकर पुलिस चौकी
बनाई गई थी ताकि 'भतीजे' के घर की पहरेदारी की जा सके, हालांकि अभिषेक अब दूसरे फ्लैट में रहते हैं।
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इसी इलाके में वे 45 प्लॉट, घर या जमीनें हैं जो अब बनर्जी परिवार के कब्जे में आ चुकी हैं। 'लैंड शार्क' का
शहरी मॉडल क्या हो सकता है, यह मुख्यमंत्री के आवास के आसपास उनके परिवार के दबदबे से साफ
झलकता है। आदि गंगा नदी भी जगह-जगह से भरती जा रही है। हरीश चटर्जी स्ट्रीट और कालीघाट रोड
की कई जमीनें और मकान लोग स्वेच्छा से या मजबूरी में छोड़ने को तैयार हुए हैं। इस पूरे इलाके की कम
से कम 45 संपत्तियाँ अब एक ही परिवार के पास हैं, जिनकी कीमत 350 करोड़ रुपये से भी अधिक हो
सकती है! यहाँ 'शांतिनिकेतन' नाम का एक आलीशान महलनुमा बहुमंजिला भवन है, जहाँ विदेशी
झाड़-फानूस से लेकर आधुनिक एस्केलेटर (चलती सीढ़ियाँ) तक सब कुछ मौजूद है। सड़क का एक हिस्सा
साल भर बैरिकेड्स और पुलिस चौकियों से घिरा रहता था।
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जैसे ही अतिरिक्त सुरक्षा हटी, आम लोगों ने खुलकर अपनी खुशी जाहिर की। साफ है कि सत्ता के घमंड में डूबे
शासक दल को जनता के भीतर छिपे इस गुस्से का अहसास तक भी नहीं था।
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प्रकाशित: 07 मई 2026 • 4 मिनट पठन

"गुलाम भारत की मुक्ति और एशियाई जन-एकता को दिशा देने वाला लेनिन का क्रांतिकारी दृष्टिकोण।" - लेखक बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा बांग्ला में प्रस्तुत यह मूल-आलेख एक तारीखवार ऐतिहासिक-वैचारिक अध्ययन है, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं औपनिवेशिक मुक्ति-संग्राम के प्रति लेनिन की गहरी विश्लेषणात्मक दृष्टि को रेखांकित करता है। अध्ययन 1900 से 1923 के मध्य रचित लेनिन के निबंधों, पत्रों, नोट्स और भाषणों के आधार पर यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण, दमनकारी नीतियों और बॉम्बे के मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी चेतना का गहन मूल्यांकन किया था। लेनिन ने औपनिवेशिक राष्ट्रवाद के मूल लोकतांत्रिक स्वरूप को पहचानते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक सर्वहारा क्रांति और एशियाई जन-एकता से जोड़ा। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के मंच से मानबेंद्रनाथ रॉय के संकीर्णतावादी सिद्धांतों को संशोधित कर लेनिन ने भारतीय कम्युनिस्टों को व्यापक साम्राज्यवादी-विरोधी मंचों में भागीदारी और किसान-मजदूर आंदोलनों को संगठित करने की रणनीतिक दिशा प्रदान की। अंततः, यह आलेख स्थापित करता है कि लेनिन के अनुसार रूस, भारत, चीन आदि देशों का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का मालिक होना ही संघर्ष के परिणाम को तय करेगा।
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