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एससी, एसटी फैसले पर पोलिट ब्यूरो ने जताई गहरी चिंता

श्रेया जायसवाल•14 मई 20262 मिनट पठन41 बार पढ़ा गया

यह फैसला कई कारणों से चिंताजनक है।पहला,यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के अधिकांश हिस्सों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।दूसरा,यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों और टिप्पणियों की श्रृंखला में नवीनतम है, जो इन समुदायों के सदस्यों के अधिकारों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।यह अत्यंत दुखद होगा यदि इस फैसले के कारण घर, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या किसी अन्य स्थान के निजी परिसरों में एससी-एसटी व्यक्तियों के अपमान की घटनाएं बढ़ जाएँ—सिर्फ इसलिए क्योंकि अपराधियों को लगेगा कि वे कानून की नजर में सजा से बच जाएंगे।

एससी, एसटी फैसले पर पोलिट ब्यूरो ने जताई गहरी चिंता

एससी, एसटी फैसले पर

पोलिट ब्यूरो ने जताई गहरी चिंता

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13 मई : अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को लेकर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के हालिया फैसले पर पोलिट ब्यूरो ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उक्त फैसले में कहा गया है कि: "एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(r) और/या 3(1)(s) के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए, जातिगत अपमान या उत्पीड़न की घटना का 'सार्वजनिक रूप से' होना अनिवार्य है। यह ऐसा स्थान होना चाहिए जो आम जनता की दृष्टि में हो। भले ही वह कोई निजी स्थान हो, लेकिन वहाँ आम लोगों की पहुँच होनी चाहिए ताकि वे देख सकें कि वहाँ क्या हो रहा है; तभी उसे 'सार्वजनिक स्थान' माना जाएगा।"

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खेद का विषय यह है कि 'गिरिजा कुमारी और अन्य बनाम दिल्ली राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक संकुचित और अत्यधिक तकनीकी कानूनी दृष्टिकोण अपनाते हुए एफआईआर (FIR) और चार्जशीट को खारिज करने का निर्देश दिया है।

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यह फैसला कई कारणों से चिंताजनक है। पहला,यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के अधिकांश हिस्सों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।दूसरा,यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों और टिप्पणियों की श्रृंखला में नवीनतम है, जो इन समुदायों के सदस्यों के अधिकारों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।यह अत्यंत दुखद होगा यदि इस फैसले के कारण घर, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या किसी अन्य स्थान के निजी परिसरों में एससी-एसटी व्यक्तियों के अपमान की घटनाएं बढ़ जाएँ—सिर्फ इसलिए क्योंकि अपराधियों को लगेगा कि वे कानून की नजर में सजा से बच जाएंगे।

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सीपीआई(एम) ने माँग की है कि केंद्र सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे और सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करे।

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साभार: गणशक्ति 

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एससी, एसटी फैसले पर पोलिट ब्यूरो ने जताई गहरी चिंता

प्रकाशित: 14 मई 2026 • 2 मिनट पठन

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