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पश्चिम बंगाल में फासीवादी ताकतों का मुकाबला केवल वामपंथी ही कर सकते हैं: एम.ए.बेबी

श्रेया जायसवाल•25 मई 20263 मिनट पठन76 बार पढ़ा गया

1977 के बाद यह पहली बार है जब देश के किसी भी राज्य में वामपंथियों की सरकार नहीं है। पश्चिम बंगाल में बाइनरी (द्विध्रुवीय राजनीति) को तोड़ने की कोशिश की गई है और पार्टी इसमें कुछ हद तक सफल भी रही है। विभिन्न वामपंथी ताकतों को एकजुट करके चुनाव लड़ना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

पश्चिम बंगाल में फासीवादी ताकतों का मुकाबला केवल वामपंथी ही कर सकते हैं: एम.ए.बेबी

पश्चिम बंगाल में फासीवादी ताकतों का मुकाबला केवल वामपंथी ही कर सकते हैं: एम.ए.बेबी

पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में घोर दक्षिणपंथ के उभार के कारण विपक्ष का एकजुट होना जरूरी है। दिल्ली में केंद्रीय समिति की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीपीआई(एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने यह बात कही। उन्होंने कहा, "केंद्रीय समिति की बैठक में पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर चर्चा हुई है। बीजेपी पहली बार पश्चिम बंगाल में जीती है, असम में जीती है और पुदुचेरी में वे गठबंधन के जरिए सत्ता बनाए रखने में सफल रहे हैं। पाँच में से बीजेपी दो राज्यों में थी। पुदुचेरी में वे गठबंधन सरकार में हैं। केरल में बीजेपी ने भले ही तीन सीटें जीती हों, लेकिन विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अपना प्रभाव छोड़ा है। तमिलनाडु में बीजेपी को झटका लगा है, लेकिन राज्यपाल का इस्तेमाल करके टीवीके (TVK) को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश की गई। वामपंथियों के लिए केरल की हार एक बड़ा झटका है। 1977 के बाद यह पहली बार है जब देश के किसी भी राज्य में वामपंथियों की सरकार नहीं है। पश्चिम बंगाल में बाइनरी (द्विध्रुवीय राजनीति) को तोड़ने की कोशिश की गई है और पार्टी इसमें कुछ हद तक सफल भी रही है। विभिन्न वामपंथी ताकतों को एकजुट करके चुनाव लड़ना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। बंगाल में हाशिए के लोगों की आवाज उठाने के लिए एक वामपंथी प्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं। पुदुचेरी में भी वाम समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है।"

एम. ए. बेबी ने बताया कि पाँचों राज्यों में जमीनी स्तर (शाखा स्तर) से चुनावी समीक्षा चल रही है। वह रिपोर्ट राज्यवार केंद्रीय समिति को सौंपी जाएगी। इस चुनावी समीक्षा को ध्यान में रखते हुए जुलाई में केंद्रीय समिति का एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव और फलता के उपचुनाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "बंगाल के चुनावी संघर्ष में सीपीआई(एम) ने बार-बार अपनी उपस्थिति साबित की है। तमाम बाधाओं को दरकिनार कर राज्य भर में प्रचार अभियान चलाया गया। बिमान बसु जैसे वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव में प्रचार किया, जिससे हमें ताकत मिली। फलता का चुनाव दिखाता है कि राज्य में वामपंथी ही फासीवादी ताकतों के खिलाफ मुकाबला करने में सक्षम हैं।"

विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने चुनावी धांधली का दावा किया था। इस सम्बंध में पूछे जाने पर सीपीआई(एम) नेता ने कहा, "ममता बनर्जी ने 15 सालों तक राज्य के लोगों को वोट नहीं देने दिया। तृणमूल कांग्रेस ने सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं पर हमले किए और राज्य में पार्टी के कई कार्यालयों पर कब्जा कर लिया। उन्हें उन बातों को याद करना होगा और समझना होगा कि उस समय उन्होंने खुद क्या किया था।"

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साभार: गणशक्ति डिजिटल

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पश्चिम बंगाल में फासीवादी ताकतों का मुकाबला केवल वामपंथी ही कर सकते हैं: एम.ए.बेबी

प्रकाशित: 25 मई 2026 • 3 मिनट पठन

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