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बैंडेल-कोन्नगर में फेरीवालों के साथ खड़ा हुआ लाल झंडा

केशव कुमार भट्टड़•26 मई 20264 मिनट पठन94 बार पढ़ा गया

मीनाक्षी मुखर्जी ने पुलिस से कहा, "हम रैली नहीं निकाल रहे हैं—फिर भी आप जबरन क्यों रोक रहे हैं? आपका काम सिर्फ केस दर्ज करना है, यही एक काम आपने सीखा है। तृणमूल ने आपको यह सिखाया था, अब बीजेपी सरकार का भी यही काम हो गया है कि केस देकर जेल में डाल दो। पूरे देश में वे यही करते हैं, कोई नई बात नहीं है।" बैंडेल, कोन्नगर, जगद्दल, बारुईपुर समेत राज्य के विभिन्न स्टेशनों पर फेरीवालों को हटाए जाने के खिलाफ आम लोग भारी विरोध और प्रदर्शन में शामिल हुए। राज्य की बीजेपी सरकार की अनैतिक नीतियों के खिलाफ उन्होंने हाथों में लाल झंडा लेकर रैली निकाली। बैंडेल स्टेशन परिसर इलाके में पुलिस ने पार्टी नेतृत्व और आम लोगों को फेरीवालों की बेदखली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने से रोका। लेकिन उस बाधा को दरकिनार करते हुए लोग वहां सभा में शामिल हुए। मीनाक्षी मुखर्जी के अलावा अलकेश दास, मनोदीप घोष, मलय सरकार, सुबल दास, रतन सेन, पार्थ दास आदि नेताओं ने भी अपनी बात रखी। दूसरी तरफ, रेलवे फेरीवालों को हटाए जाने के विरोध में कोन्नगर में भी सभा और रैली की गई।

बैंडेल-कोन्नगर में फेरीवालों के साथ खड़ा हुआ   लाल झंडा

बिना पुनर्वास के बेदखली रोकने के लिए सड़कों पर उतरने का आह्वान

बैंडेल-कोन्नगर में फेरीवालों के साथ खड़ा हुआ

लाल झंडा

                .

                    कोलकाता/बैंडेल/कोन्नगर, 25 मई। "बिना पुनर्वास दिए अगर बुलडोजर से घर या दुकानें तोड़ने आएं, तो पहले आधे घंटे आप लोग डटकर मुकाबला करें, बाकी की जिम्मेदारी लाल झंडे की है।" सोमवार को बैंडेल स्टेशन के पास फेरीवालों (हॉकर्स) और झुग्गी-झोपड़ियों को हटाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए माकपा (सीपीआई-एम) केंद्रीय समिति की सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी ने बेदखल किए जा रहे लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, "हम बीजेपी सरकार को साफ कह रहे हैं कि किसी भी एक व्यक्ति का घर या रोजी-रोटी छीनी नहीं जा सकती। पीछे के दरवाजे पर ताला लगाकर सामने के दरवाजे पर आग मत लगाइए, फेरीवालों और झुग्गीवासियों के साथ चर्चा के लिए बैठिए, संविधान का सम्मान कीजिए। बीजेपी सरकार को शुरू से ही गरीबों के खिलाफ जाते देखा जा रहा है।"

                    इस दिन बैंडेल, कोन्नगर, जगद्दल, बारुईपुर समेत राज्य के विभिन्न स्टेशनों पर फेरीवालों को हटाए जाने के खिलाफ आम लोग भारी विरोध और प्रदर्शन में शामिल हुए। राज्य की बीजेपी सरकार की अनैतिक नीतियों के खिलाफ उन्होंने हाथों में लाल झंडा लेकर रैली निकाली। बैंडेल स्टेशन परिसर इलाके में पुलिस ने पार्टी नेतृत्व और आम लोगों को फेरीवालों की बेदखली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने से रोका। लेकिन उस बाधा को दरकिनार करते हुए लोग वहां सभा में शामिल हुए। मीनाक्षी मुखर्जी के अलावा अलकेश दास, मनोदीप घोष, मलय सरकार, सुबल दास, रतन सेन, पार्थ दास आदि नेताओं ने भी अपनी बात रखी। दूसरी तरफ, रेलवे फेरीवालों को हटाए जाने के विरोध में कोन्नगर में भी सभा और रैली की गई।

                       आस-पास के इलाके में हुई इस विरोध सभा में मीनाक्षी मुखर्जी, सीटू (CITU) हुगली जिला सचिव तीर्थंकर राय, सीटू जिला सचिवालय के सदस्य अब्दुल हई, पश्चिम बंगाल रेलवे हॉकर यूनियन के सचिव दीपांकर शील, रेलवे हॉकर यूनियन के हुगली जिला सचिव सुबल दास और सीटू नेता अनूप जाना आदि ने संबोधित किया। सभा का संचालन हुगली जिला सीटू अध्यक्ष मलय सरकार ने किया।

                मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा, "सरकार संविधान के किसी कानून को कैसे लागू करेगी, कैसे इस्तेमाल करेगी, इसी से समझ आता है कि सरकार की नीति क्या है। बीजेपी बुलडोजर चलाकर आतंक का राजनीतिक माहौल बनाना चाहती है। यानी यह सरकार गरीबों के खिलाफ जाना चाहती है। बीजेपी गलती कर रही है। जब शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता खुला है, तो जबरन बेदखली क्यों? सरकार फेरीवालों और झुग्गीवासियों को साथ लेकर चर्चा में बैठे। जो तृणमूल सरकार ने किया, वही तो बीजेपी सरकार कर रही है। तो फिर लोग अब कहाँ जाएंगे? केंद्र में बीजेपी है, राज्य में बीजेपी है, रेलवे बीजेपी के हाथ में है, और वे इन लोगों के लिए एक सर्वे करके समाधान का रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं!"

  

    इस दिन जब पुलिस ने आम लोगों और नेताओं को रोकने की कोशिश की, तो मीनाक्षी मुखर्जी ने पुलिस से कहा, "हम रैली नहीं निकाल रहे हैं—फिर भी आप जबरन क्यों रोक रहे हैं? आपका काम सिर्फ केस दर्ज करना है, यही एक काम आपने सीखा है। तृणमूल ने आपको यह सिखाया था, अब बीजेपी सरकार का भी यही काम हो गया है कि केस देकर जेल में डाल दो। पूरे देश में वे यही करते हैं, कोई नई बात नहीं है।"

सीधी और दो-टूक बात

पत्रकारों से बातचीत में मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा, "हमारी संख्या बढ़ती देख वे डर रहे हैं। अगर हम अपनी जनशक्ति बढ़ा सके, तो वे झुग्गियों और दुकानों को उजाड़ नहीं पाएंगे। राज्य की सत्ता में आते ही बीजेपी लोगों के आंदोलन को दबाना चाहती है—यह तो बस शुरुआत है। जनता पर अत्याचार करके पिछली सरकार भी चली थी, इस सरकार ने भी यही नीति अपनाई है। यह बीजेपी की पहली परीक्षा है। धीरे-धीरे और भी लोग इस लड़ाई से जुड़ेंगे। और यह लड़ाई पूरे देश के 70 फीसदी लोगों की है। हमारा सवाल है कि इन लोगों को कानून का फायदा क्यों नहीं मिलेगा? क्या सिर्फ बड़े कारोबार ही चलेंगे और ये लोग अपनी कमाई गंवा देंगे ? - ऐसा नहीं चलेगा।"

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स्रोत: बांग्ला दैनिक गणशक्ति , 26 मई 2026

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