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मंगलाहाट (हावड़ा) में हॉकर उजाड़ने के फैसले से आक्रोश : CITU ने दी आर-पार के संघर्ष की चेतावनी

केशव कुमार भट्टड़•26 मई 20265 मिनट पठन101 बार पढ़ा गया

पश्चिम बंगाल के हावड़ा के ऐतिहासिक मंगलाहाट में एक बार फिर गरीब दुकानदारों (हॉकरों ) को उजाड़ने के प्रशासनिक फैसले से पूरे इलाके में भारी तनाव और आक्रोश है। सोमवार को हावड़ा सिटी पुलिस ने नया फरमान जारी कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मंगलवार से मंगलाहाट के बाहर किसी भी हॉकर को दुकान लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। घोषणा के बाद से ही हाट के बाहर दुकान लगाने वाले करीब 5 हजार हॉकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हॉकरों का आरोप है कि सोमवार सुबह ही पुलिस ने जबरन उनका कई सामान जब्त कर लिया। दूसरी तरफ, वामपंथी श्रमिक संगठन सीआईटीयू (CITU) ने साफ कर दिया है कि अगर गरीबों को जबरन उजाड़ा गया, तो इसका तीखा और पुरजोर विरोध किया जाएगा।

मंगलाहाट (हावड़ा) में हॉकर उजाड़ने के फैसले से आक्रोश : CITU ने दी आर-पार के संघर्ष की चेतावनी

मंगलाहाट (हावड़ा) में हॉकर उजाड़ने के फैसले से आक्रोश :

CITU ने दी आर-पार के संघर्ष की चेतावनी

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                हावड़ा, 25 मई । पश्चिम बंगाल के हावड़ा के ऐतिहासिक मंगलाहाट में एक बार फिर गरीब दुकानदारों (हॉकरों ) को उजाड़ने के प्रशासनिक फैसले से पूरे इलाके में भारी तनाव और आक्रोश है। सोमवार को हावड़ा सिटी पुलिस ने नया फरमान जारी कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मंगलवार से मंगलाहाट के बाहर किसी भी हॉकर को दुकान लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

                पुलिस इस कार्रवाई के पीछे आम जनता की आवाजाही और ट्रैफिक जाम का तर्क दे रही है। लेकिन इस घोषणा के बाद से ही हाट के बाहर दुकान लगाने वाले करीब 5 हजार हॉकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हॉकरों का आरोप है कि सोमवार सुबह ही पुलिस ने जबरन उनका कई सामान जब्त कर लिया। दूसरी तरफ, वामपंथी श्रमिक संगठन सीआईटीयू (CITU) ने साफ कर दिया है कि अगर गरीबों को जबरन उजाड़ा गया, तो इसका तीखा और पुरजोर विरोध किया जाएगा।

            एशिया का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार: ऐतिहासिकता और बंगाल की अर्थव्यवस्था का आधार

            हावड़ा का यह मंगलाहाट महज एक बाजार नहीं है, बल्कि सदी पुराना (शताब्दी प्राचीन) एक ऐसा ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र है जिसे पूरे भारत और एशिया का सबसे बड़ा रेडीमेड कपड़ा बाजार माना जाता है। बंगाल की अर्थव्यवस्था और रोजगार में इस हाट की भूमिका को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

अर्थव्यवस्था की रीढ़: पश्चिम बंगाल के कोने-कोने (जैसे हुगली, नादिया, मेदिनीपुर, 24 परगना) से छोटे, मध्यम और बड़े कपड़ा व्यापारी अपने उत्पाद लेकर यहां आते हैं। केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से बड़े-बड़े व्यापारी यहां थोक और खुदरा खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, जिससे करोड़ों रुपये का टर्नओवर होता है।

गरीब ओस्तागरों का संबल: इस हाट की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि यह आर्थिक रूप से कमजोर छोटे दर्जी और कारीगरों (ओस्तागरों) को सीधे ग्राहकों से जोड़ता है। पिछले कई दशकों से हावड़ा मैदान इलाके के फुटपाथों पर करीब 5 हजार से ज्यादा हॉकरअपनी डलिया (डाला) सजाकर इन्हीं ओस्तागरों के बनाए कपड़े बेचते हैं।

रोजगार का महासागर: यह हाट लाखों परिवारों के चूल्हे जलने का जरिया है। बुनकरों, दर्जियों, हॉकरों से लेकर परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का रोजगार सीधे तौर पर इस मंगलाहाट की गतिविधि से जुड़ा हुआ है।

"जीने का अधिकार छीन रही सरकार" – हॉकरों का फूटा गुस्सा

            आमतौर पर राज्य और बाहर के जिलों से हॉकर सोमवार रात से ही हाट में आकर सड़क किनारे अपनी जगह सुरक्षित कर लेते हैं। लेकिन इस नए फरमान के बाद हॉकरों चिंतित कि अगर उन्हें बैठने नहीं दिया गया, तो वे अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे?

            याद दिला दें कि दो साल पहले मंगलाहाट के 'पोड़ा हाट' हिस्से में भीषण आग लग गई थी, जिससे व्यापारी तबाह हो गए थे। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाट को दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे हॉकर-व्यापारियों ने एकसुर में खारिज कर दिया था क्योंकि इस जगह से उनका दशकों पुराना ऐतिहासिक रिश्ता है।

हॉकर आंदोलन के नेताओं का सीधा आरोप है कि:

"राज्य में भाजपा सरकार के गठन के बाद से ही मेहनत-कश गरीब जनता की जीविका पर लगातार हमले हो रहे हैं। लोगों से उनके जीने का अधिकार छीना जा रहा है। सरकार बदलने के बाद इस ऐतिहासिक हाट को उजाड़ने के पीछे एक गहरी साजिश नजर आती है।"

लाल झंडे के साये में होगा तीखा प्रतिरोध

            प्रशासन के इस दमनकारी रवैये के खिलाफ सीआईटीयू (CITU) समर्थित हावड़ा हॉकर्स समिति मैदान में उतर आई है। समिति ने सभी हॉकर भाइयों से अपील की है कि वे डरें नहीं और सोमवार रात तथा मंगलवार को अपनी तय जगहों पर ही दुकानें लगाएं। समिति ने भरोसा दिया है कि अगर पुलिस या प्रशासन जबरन बेदखली करने आता है, तो लाल झंडा लेकर उसका डटकर मुकाबला किया जाएगा।

रेलवे और पुलिस के गठजोड़ पर भी उठे सवाल:

            हॉकर नेताओं ने याद दिलाया कि महज 9 दिन पहले हावड़ा स्टेशन के बाहर भी विकास के नाम पर रेलवे, आरपीएफ और हावड़ा सिटी पुलिस ने बुलडोजर चलाकर हॉकरों को अवैध रूप से उजाड़ दिया था। लेकिन बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के कारण रेलवे को कदम पीछे खींचने पड़े थे। इसके अलावा, विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही बाली स्टेशन के पास भी सौ से अधिक हकरों को उजाड़ा गया था। नए प्रशासन के पद भार ग्रहण करते ही हॉकरों के उन्मूलन की खबरे कोलकाता और राज्य की विभिन्न जगहों से लगातार आ रही है। ।

            सोमवार को इस अवैध बेदखली के खिलाफ सीआईटीयू ने एक विशाल विरोध सभा का आयोजन किया, जिसे संबोधित करते हुए सीआईटीयू नेता गार्गी चटर्जी ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि गरीबों के पेट पर लात मारने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंगलवार सुबह से ही मंगलाहाट के हॉकर इस तानाशाही फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन को और तेज करेंगे।

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स्रोत: बांग्ला दैनिक गणशक्ति , 26 मई 2026

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मंगलाहाट (हावड़ा) में हॉकर उजाड़ने के फैसले से आक्रोश : CITU ने दी आर-पार के संघर्ष की चेतावनी

प्रकाशित: 26 मई 2026 • 5 मिनट पठन

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