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35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, आज ही होगा विभागों का बंटवारा

केशव कुमार भट्टड़•01 जून 20262 मिनट पठन30 बार पढ़ा गया

पश्चिम बंगाल मंत्रीमण्डल का विस्तार। सोमवार को लोकभवन में राज्यपाल आर.एन. रवि ने 35 भाजपा विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। आज ही होगा विभागों का बंटवारा। कुल 13 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है। आज दोपहर बाद 'नवान्न' (सचिवालय) में मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों के साथ बैठक कर विभाग सौंपे जाएंगे।

35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, आज ही होगा विभागों का बंटवारा

पश्चिम बंगाल मंत्रीमण्डल का विस्तार

35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली,

आज ही होगा विभागों का बंटवारा

    आज ही मंत्रियों के बीच विभागों (जिम्मेदारियों) का बंटवारा किया जाएगा। भाजपा सूत्रों के अनुसार, आज दोपहर 3:00 से 3:30 बजे के बीच 'नवान्न' (सचिवालय) में मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों के साथ बैठक कर विभाग सौंपे जाएंगे। सोमवार को लोकभवन में राज्यपाल आर.एन. रवि ने 35 भाजपा विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई।

कैबिनेट मंत्री (पूर्ण मंत्री)

                कुल 13 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है। इनके नाम हैं:

                तापस राय, मनोज उरांव, अर्जुन सिंह, गौरीशंकर घोष, दीपक बर्मन, शारद्वत मुखर्जी, अरूप कुमार दास, स्वपन दासगुप्ता, कल्याण चक्रवर्ती, शंकर घोष, अजय पोद्दार और दूधकुमार मंडल।

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

                कुल 3 विधायकों ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली है। इनके नाम हैं:

                मालती राभा राय, राजेश महतो और इंद्रनील खां।

राज्य मंत्री

                कुल 19 विधायकों ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली है, जिनमें प्रमुख नाम हैं:

            अशोक डिंडा, कौशिक चौधरी, ज्वेल मुर्मू, हरेकृष्ण बेरा, शांतनु प्रमाणिक, उमेश राय, पूर्णिमा चक्रवर्ती, भास्कर भट्टाचार्य, दिवाकर घरामी, नादिया चंद बाउड़ी, गार्गी दास घोष, अमिय किस्कू, कलिता माजी, बिराज विश्वास, सुमना सरकार, आनंदमय बर्मन, विशाल लामा और दीपांकर जाना आदि।

  • गौरतलब है कि इससे पहले 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शुभेंदु अधिकारी सहित छह भाजपा विधायकों ने शपथ ली थी। तभी से राज्य की पहली भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर लोगों में उत्सुकता थी।

  • अब तक विभागों का बंटवारा न होने के कारण मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास अकेले 43 विभाग थे। सूत्रों का कहना है कि आज मुख्यमंत्री उन सभी विभागों को बाकी मंत्रियों में बांट सकते हैं।

  • हालांकि, भाजपा सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में उनके 15 और विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे।

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गणशक्ति ऑन लाइन । 01 जून 2026 |

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35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, आज ही होगा विभागों का बंटवारा

प्रकाशित: 01 जून 2026 • 2 मिनट पठन

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आज जब देश में धर्म और संस्कृति का शोर सबसे ऊँचा है, तब उसी समाज की अंतरात्मा के भीतर बेईमानी की ऐसी भूख नाच रही है जो बच्चों की लाशों पर भी करोड़ों की गड्डियाँ गिनने से नहीं हिचकती।यह कैसी धार्मिक चेतना है जहाँ नारे तो भगवान के लगते हैं, लेकिन आचरण में केवल शैतानी हवस और भ्रष्टाचार का बोलबाला है?नीट पेपर लीक की यह आग सिर्फ परीक्षा प्रणाली की नहीं,बल्कि देश के नैतिक और सामाजिक ढांचे की भस्म उड़ा रही है।जब मेधावी छात्र फंदे पर झूल रहे हों,अस्मत के लिये छात्राएं गुरु से जूझ रही हों, और मगरमच्छ तिजोरियाँ भर रहे हों, तब चुप रहना इस महापाप में हिस्सेदार होना है!"

केशव कुमार भट्टड़ • 16 मई 2026

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अंधाधुंध हॉकर उन्मूलन नहीं, पुनर्वास चाहिए.!.

साल 2014 का Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act देश के स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका के अधिकार को मान्यता देता है। लेकिन रेल हॉकर अभी भी इस सुरक्षा से बाहर हैं। जबकि भारतीय रेलवे के साथ उनका रिश्ता कई दशकों पुराना है। ट्रेन यात्रा की संस्कृति के साथ झालमूड़ी , चनाचूर, चाय, मूंगफली, किताबें या खिलौने बेचने वाले रचे-बसे हुए हैं। वे सिर्फ सामान नहीं बेचते; वे रेल यात्रा की एक जीवंत सामाजिक वास्तविकता हैं।

इसलिए रेल हॉकरों की मांग पूरी तरह जायज है—लाइसेंस देकर पेशे को मान्यता दी जाए, पुनर्वास के बिना कोई उन्मूलन न हो, उन्हें Street Vendors Act के दायरे में लाया जाए, सामाजिक सुरक्षा, ईएसआई (ESI) और भविष्य निधि (प्रॉविडेंट फंड) में शामिल किया जाए, विकास के नाम पर आजीविका नष्ट न की जाए।

इस लड़ाई में 'पश्चिम बंगाल रेलवे हॉक्टर्स यूनियन' (CITU) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लंबे समय से यह संगठन रेल हॉकरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। राजनीतिक आतंक, प्रशासनिक उत्पीड़न, जबरन यूनियन पर कब्जा—इन सबके खिलाफ उन्होंने रेल हॉकरों को एकजुट करने का प्रयास किया है। अलग-अलग समय पर तृणमूल समर्थक यूनियनों के हमलों, धमकियों और यहां तक कि सदस्यों को जबरन दल-बदल कराने की कोशिशों के खिलाफ भी उन्होंने कड़ा प्रतिरोध खड़ा किया है।

केशव कुमार भट्टड़ • 20 मई 2026

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