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पुस्तक विक्रेताओं पर हमला बौद्धिक स्तर के प्रतिरोध पर भी हमला है- सुजन चक्रवर्ती

अक्षत(For Testing)•04 जून 20264 मिनट पठन6 बार पढ़ा गया

"बोईपारा में जो तुलनात्मक रूप से बड़े व्यापारी हैं, उनकी बिक्री भी काफी हद तक फुटपाथ की दुकानों पर निर्भर करती है। ये छोटी-छोटी दुकानें पाठकों की भीड़ को आकर्षित करने का काम करती हैं, और इसी भीड़ में से कुछ लोग बगल की बड़ी दुकान में जाते हैं। यह एक आर्थिक श्रृंखला (इकनॉमिक चेन) है, जिसे नष्ट करके यह सरकार स्टारमार्क-केंद्रित अमीरों का आर्थिक ढाँचा तैयार करना चाहती है। यानी जिसके पास पैसा है वह किताब खरीद पाएगा, जिसके पास नहीं है वह नहीं खरीद पाएगा।"

सुजन चक्रवर्ती

सीपीआई (एम) के केंद्रीय कमेटी के सदस्य

पुस्तक विक्रेताओं पर हमला बौद्धिक स्तर के प्रतिरोध पर भी हमला है- सुजन चक्रवर्ती

कॉलेज स्ट्रीट में

प्रतिवाद सभा में सुजन चक्रवर्ती

पुस्तक विक्रेताओं पर हमला बौद्धिक स्तर के प्रतिरोध पर भी हमला है

कोलकाता जिला: मौखिक धमकियों से एक बार फिर कॉलेज स्ट्रीट इलाके के पुस्तक विक्रेता डरे हुए हैं। सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल-कांग्रेस के शासनकाल में पनपे सभी अपराधियों को जेल में डालने का वादा किया था। फिर बोईपारा (पुस्तक बाजार) में किताबों के कारोबार को केंद्र बनाकर तृणमूल-कांग्रेस सरकार के समय हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आकाओं को छोड़कर गरीब पुस्तक विक्रेताओं पर हमला क्यों किया जा रहा है? राज्य के वामपंथी छात्र और युवा नेताओं ने यह सवाल उठाया है।

बकरीद के बाद से ही कॉलेज स्ट्रीट बोईपारा में गरीब पुस्तक विक्रेताओं, आम पुस्तक प्रेमियों, पाठकों और छात्रों के बीच बेदखली के डर के बादल मंडराने लगे हैं। नगर निगम (नगरपालिका) की ओर से कोई लिखित दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है, लेकिन पिछले 28 मई को कुछ अज्ञात लोगों ने कॉर्पोरेशन से आने का दावा करते हुए बंकिम चटर्जी स्ट्रीट और कलकत्ता विश्वविद्यालय से सटे फुटपाथ के पुस्तक विक्रेताओं को मौखिक रूप से फुटपाथ खाली करने का निर्देश दिया था। इस घटना के बाद से ही बोईपारा में दहशत फैल गई है।

"बिना पुनर्वास के एक भी पुस्तक विक्रेता की रोजी-रोटी पर हमला नहीं होने दिया जाएगा।" इसी माँग को लेकर गुरुवार को सीपीआई(एम) जोड़ासांको 1 नंबर एरिया कमेटी की ओर से कोलकाता कॉर्पोरेशन के स्थानीय बरो कार्यालय में एक प्रतिवेदन (डेप्यूटेशन) सौंपा गया और कॉफी हाउस के सामने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया गया।

इस विरोध सभा में सीपीआई (एम) केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि भाजपा एशिया के सबसे बड़े पुस्तक बाजार को नष्ट करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि अगर गरीब छात्रों के लिए सस्ती दरों पर किताबें खरीदने का रास्ता बंद कर दिया जाए, तो फासीवादियों के खिलाफ आवाज उठाने वाली युवा शक्ति तैयार नहीं हो पाएगी। गरीब पुस्तक विक्रेताओं की रोजी-रोटी पर हमले के साथ-साथ सुजन चक्रवर्ती ने इसे बौद्धिक स्तर पर प्रतिरोध की क्षमता को खत्म करने के लिए किया गया एक संगठित हमला बताया। उन्होंने कहा "बोईपारा में जो तुलनात्मक रूप से बड़े व्यापारी हैं, उनकी बिक्री भी काफी हद तक फुटपाथ की दुकानों पर निर्भर करती है। ये छोटी-छोटी दुकानें पाठकों की भीड़ को आकर्षित करने का काम करती हैं, और इसी भीड़ में से कुछ लोग बगल की बड़ी दुकान में जाते हैं। यह एक आर्थिक श्रृंखला (इकनॉमिक चेन) है, जिसे नष्ट करके यह सरकार स्टारमार्क-केंद्रित अमीरों का आर्थिक ढाँचा तैयार करना चाहती है। यानी जिसके पास पैसा है वह किताब खरीद पाएगा, जिसके पास नहीं है वह नहीं खरीद पाएगा।"

कार्यक्रम में बोलते हुए कलतान दासगुप्ता ने कहा कि गुरुवार को भी दूसरे दौर में कुछ अज्ञात लोग बिना किसी पहचान पत्र और बिना किसी लिखित आदेश के उस इलाके के पुस्तक विक्रेताओं को फुटपाथ खाली करने की धमकी देकर गए हैं। इससे पहले, कोलकाता कॉर्पोरेशन की कमिश्नर स्मिता पांडे ने दावा किया था कि नगर निगम की ओर से बोईपारा के विक्रेताओं को बेदखल करने की कोई योजना नहीं है।

गुरुवार के इस विरोध प्रदर्शन में एसएफआई (SFI) के राज्य सचिव देवांजन दे ने सवाल उठाया, "अगर कमिश्नर को कुछ नहीं पता, स्थानीय नगरपालिका के पास कोई जानकारी नहीं है, तो फिर ये काम कौन कर रहा है? मामला ऐसा तो नहीं है कि 'कुछ नहीं जानते, कुछ नहीं किया' कहते-कहते सच में एक दिन अचानक बुलडोजर आकर सब कुछ मलबे में बदल देगा, ठीक वैसे ही जैसे रात के अंधेरे में रेलवे स्टेशनों पर हुआ था?" उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में तृणमूल-कांग्रेस नेताओं के निर्देश पर लाखों रुपये खर्च करके ऐसी कई किताबें छापी गईं जो इस समय हिंदू स्कूल के दीमक लगे बंद कमरों में पड़ी हैं। प्रकाशकों को सड़क पर लाने वाले राजनीतिक दल के नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई न करके निर्दोष पुस्तक विक्रेताओं की रोजी-रोटी पर चोट करने का क्या कारण है? क्या मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल बनाने का वादा भूल गए?

इस सभा में सुजन चक्रवर्ती, देवांजन दे, कलतान दासगुप्ता के अलावा सीपीआई(एम) नेता संग्राम चटर्जी, अर्जुन रॉय आदि ने भी उपस्थित रहकर अपनी बात रखी।

बोईपारा के कई विक्रेताओं के बच्चों की इस समय कॉलेज और विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं। किसी को अपने बच्चे की परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए पैसे देने बाकी हैं, तो कोई इस चिंता में सिर पकड़े बैठा है कि इस स्थिति में सब कुछ कैसे संभालेंगे। जादवपुर, प्रेसीडेंसी और कलकत्ता विश्वविद्यालय सहित कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र पहले ही पुस्तक विक्रेताओं के समर्थन में सड़कों पर उतर चुके हैं। इसी बीच, गुरुवार को सीपीआई (एम) नेताओं ने बोईपारा के साथ खड़े होने के संकल्प के साथ सभी पाठकों और विक्रेताओं से एकजुट होने का आह्वान किया।

साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति | 4 जून,26

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पुस्तक विक्रेताओं पर हमला बौद्धिक स्तर के प्रतिरोध पर भी हमला है- सुजन चक्रवर्ती

प्रकाशित: 04 जून 2026 • 4 मिनट पठन

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