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श्रमिक आंदोलन को तोड़ने के लिए नोएडा में गिरफ्तारी और उत्पीड़न: सीपीआई(एम)

श्रेया जायसवाल•04 जून 20263 मिनट पठन3 बार पढ़ा गया

श्रमिकों की गिरफ्तारी, छंटनी (नौकरी से निकाला जाना) और विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध, श्रमिक अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों का ही रूप हैं। हालांकि, सीपीआई (एम) का मानना है कि श्रमिकों का एकजुट प्रतिरोध ही इस हमले का सबसे करारा जवाब है।

श्रमिक आंदोलन को तोड़ने के लिए नोएडा में गिरफ्तारी और उत्पीड़न: सीपीआई(एम)

श्रमिक आंदोलन को तोड़ने के लिए नोएडा में गिरफ्तारी और उत्पीड़न: सीपीआई(एम)

नई दिल्ली, 3 जून: सीपीआई (एम) ने आरोप लगाया है कि नोएडा में श्रमिक आंदोलन से जुड़े गिरफ्तार श्रमिकों पर पुलिस हिरासत में शारीरिक अत्याचार किया गया है, उनके खिलाफ झूठे सबूत गढ़कर कई मामले दर्ज किए गए हैं और यह कदम श्रमिक आंदोलन को दबाने के लिए उठाया गया है। लगभग एक महीने तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए कुछ श्रमिकों से मुलाकात के बाद बुधवार को पार्टी ने यह आरोप लगाया।

सीपीआई (एम) के महासचिव एम ए बेबी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में रिहा हुए श्रमिकों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, पिछले अप्रैल में नोएडा में श्रमिक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले कई श्रमिकों को बाद में नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया है।

प्रतिनिधिमंडल में सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो सदस्य आर अरुण कुमार और तपन सेन, राज्यसभा सांसद वी शिवदासन सहित अन्य नेता शामिल थे। श्रमिकों ने प्रतिनिधिमंडल के सामने अपने अनुभवों को साझा किया।

प्रतिनिधिमंडल ने फैबस्ट्रैक्ट क्लोदिंग कंपनी के श्रमिकों से भी बात की। जानकारी के अनुसार, अप्रैल के आंदोलन के बाद उस कंपनी के लगभग 50 कर्मचारी ट्रेड यूनियन आंदोलन में शामिल हो गए हैं।इसके साथ ही वाइब्रैकोस्टिक इंडिया के श्रमिक प्रतिनिधियों ने भी सीपीआई (एम) नेताओं से मुलाकात की। उनका आरोप है कि प्रबंधन श्रमिकों को यूनियन बनाने से रोकने के लिए नियमित रूप से बाधाएं खड़ी करता है और नेतृत्व करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाता है।

बैठक के बाद एम ए बेबी ने उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि श्रमिकों के खिलाफ पुलिसिया हिंसा की गई है और झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने अभी भी जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की अनुमति नहीं दी है।

एम.ए. बेबी ने कहा "पिछले कुछ दिनों से हमारे सांसद वी शिवदासन के माध्यम से जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की अनुमति मांगी जा रही थी। लेकिन अधिकारियों ने बताया कि उच्च अधिकारियों ने उस आवेदन को खारिज कर दिया है।"

उनका आरोप है कि जेल में बंद कुछ श्रमिकों को जमानत की अर्जी देने या उचित कानूनी सहायता प्राप्त करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

सीपीआई (एम) ने कहा है कि श्रमिकों को कानूनी और राजनीतिक सहायता देना जारी रखा जाएगा। पार्टी का दावा है कि श्रमिकों की गिरफ्तारी, छंटनी (नौकरी से निकाला जाना) और विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध, श्रमिक अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों का ही रूप हैं। हालांकि, सीपीआई (एम) का मानना है कि श्रमिकों का एकजुट प्रतिरोध ही इस हमले का सबसे करारा जवाब है।

साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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श्रमिक आंदोलन को तोड़ने के लिए नोएडा में गिरफ्तारी और उत्पीड़न: सीपीआई(एम)

प्रकाशित: 04 जून 2026 • 3 मिनट पठन

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