यह विरोध प्रदर्शन तो सिर्फ एक ट्रेलर था। यदि सरकार हमारी माँगों को पूरा करने में विफल रहती है, तो यह आंदोलन और अधिक तीव्र होगा।
जन समाचार मंच
यह विरोध प्रदर्शन तो सिर्फ एक ट्रेलर था। यदि सरकार हमारी माँगों को पूरा करने में विफल रहती है, तो यह आंदोलन और अधिक तीव्र होगा।

दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के लिए सात दिनों की नई समय-सीमा दी है। इसके साथ ही
सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया, तो उनका आंदोलन देश भर में फैल जाएगा।
शनिवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के बाद एक संवाददाता सम्मेलन संबोधित करते हुए सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि शनिवार का यह विरोध प्रदर्शन तो सिर्फ एक ट्रेलर था। इसके साथ ही उन्होंने आगाह किया कि यदि सरकार हमारी मांगों को पूरा करने में विफल रहती है, तो यह आंदोलन और अधिक तीव्र होगा।
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा दिए गए शाम 5 बजे के अल्टीमेटम के बारे में पूछे जाने पर रांका ने कहा कि संगठन अब केंद्र सरकार को धर्मेंद्र प्रधान को हटाने या उनके इस्तीफे के लिए सात दिनों का समय दे रहा है। उन्होंने कहा, "यदि भारतीय लोकतंत्र के प्रति उनके मन में जरा सा भी सम्मान है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक इस्तीफा दे देना चाहिए, या फिर प्रधानमंत्री मोदी को उन्हें पद से हटाना होगा। अन्यथा, यह आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा।"
इस बीच, सीजेपी की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग का सीपीआई(एम) ने समर्थन किया है। सीजेपी के साथ एकजुटता दिखाते हुए एसएफआई (SFI) के नेता भी शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके साथ ही, धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग को लेकर एसएफआई 3 जून से 15 जून तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान भी चला रही है।
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साभार: गणशक्ति डिजिटल
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प्रकाशित: 07 जून 2026 • 2 मिनट पठन

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पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
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