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भारत में विद्युत वितरण के क्षेत्र का निजीकरण एवं बिजली कंपनियों को मुनाफा कमवाने की साज़िश व योजना - राधेश्याम वर्मा

श्रेया जायसवाल•07 जून 20266 मिनट पठन2 बार पढ़ा गया

बिजली, गैस और पानी इन तीन आवश्यक क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना अंतर्राष्ट्रीय पूंजी गुटों द्वारा ली गई एक विश्वस्तरीय योजना है। इससे स्मार्ट मीटर का एक बड़ा बाजार खड़ा करके उससे मुनाफा कमाने की कोशिशें भी की जा रही है। यूरोप अमेरिका जैसे कई देशों में पिछले कई सालों से स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू हो चुका है। एक आंकड़े के अनुसार वर्ष 2019 में दुनिया में स्मार्ट मीटर का बाजार 21.13 बिलियन डॉलर का था। वर्ष 2027 में यह 39.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।

भारत में विद्युत वितरण के क्षेत्र का निजीकरण एवं बिजली कंपनियों को मुनाफा कमवाने की साज़िश व योजना - राधेश्याम वर्मा

स्मार्ट मीटर

भारत में विद्युत वितरण के क्षेत्र का निजीकरण एवं बिजली कंपनियों को मुनाफा कमवाने की साज़िश व योजना

राधेश्याम वर्मा

भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने जुलाई 2021 से देश के विद्युत वितरण में तथा उसके निजीकरण के उद्देश्य से 3 लाख करोड़ रुपए की RDSS ( Revamped Distribution Sector Scheme– बिजली वितरण क्षेत्र में सुधार योजना) नामक योजना चालू की है। इस योजना शुरूआती तौर पर पूरे देश में पहले से मौजूद एनालॉग और डिजिटल मीटरों के स्थान पर स्मार्ट मीटर लगाने का कार्यक्रम लिया गया है। योजना की निर्धारित समय सीमा 31 मार्च 2026 थी। जिसे अब बढ़ाए जाने पर विचार होना है। स्मार्ट मीटर के खिलाफ़ आंदोलनों के असर के चलते फिलहाल अभी इसे बढ़ाया नही गया है।31 मार्च 2026 तक पूरे देश में 25 करोड़ ’प्री पेड कंज्यूमर स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया था।’ लेकिन फरवरी 2026 तक अभी लगभग 5.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं।

RDSS का मुख्य उद्देश्य विद्युत वितरण के क्षेत्र का निजीकरण करना है। इस क्षेत्र में निजी कंपनियों का प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ’विद्युत कानून संशोधन बिल 2022’ ले आई जिसके अनुसार भारत में बिजली वितरण के क्षेत्र में सरकारी कंपनियों का एकाधिकार समाप्त करके कई निजी कंपनियों को समानांतर रूप से लाइसेंस दिया जायेगा।सबसे शर्मनाक बात यह है कि औपचारिक तौर पर संसद में यह संशोधन विधेयक पास कराने से पहले ही निजी कंपनियों को मुनाफा कमवाने के लिए पुराने मीटरों को प्रीपेड मीटरों से बदलने की योजना चालू कर दी गई है।

स्मार्ट मीटर क्या है?

यह एक उन्नत किस्म की डिजिटल डिवाइस है।परम्परागत और पुराने डिजिटल मीटर से स्मार्ट मीटर इस रूप में अलग है कि यह रियल टाइम में बिजली के उपभोग को रिकॉर्ड करता है और उसका डाटा स्वयं ही वितरण कंपनी के पास भेज देता है। यह मीटर ’एडवांस मीटरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ’से जुड़ा होने के कारण वितरण कंपनी एवं उपभोक्ता के साथ दोतरफा संबंध कायम करता है। साथ ही साथ यह जीपीएस, भौगोलिक सूचना, वर्क मैनेजमेंट, आउटटेज(बिजली गुल)प्रबंधन, मोबाइल वर्कफोर्स प्रबंधन, वितरण ऑटोमेशन प्रणालियों से जुड़ा है। कुल मिलाकर यह मीटर सारी प्रणालियों के जरिए विद्युत वितरण कंपनी के साथ डाटा के आदान प्रदान की व्यवस्था कायम करता है।

प्रीपेड व्यवस्था:

पूंजीपतियों के मुनाफे को सुनिश्चित बनाने के लिए भारत में स्मार्ट मीटर मुख्यतः प्रीपेड मोड में लगाए जा रहे हैं। इस मोड में बिजली का इस्तेमाल करने से पहले ही उपभोक्ता को एडवांस धनराशि जमा करनी होती है। मोबाइल फोन की तरह इसमें ऑनलाइन पैसा रिचार्ज करना होता है और उसी तरह इसमें रिमोट नियंत्रण के जरिए विद्युत सप्लाई को बंद व चालू किया जा सकता है। पैसा ख़त्म और बिजली गुल। खैर! लंबे आंदोलनों और संघर्षों के बाद अभी इसी प्रीपेड से पोस्ट पेड मोड में कन्वर्ट कर दिया गया है। सबसे बड़ी बात तो यह कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के घर–घर जाकर मैनुअल मीटर रीडिंग की ज़रूरत नही रहती है,जिससे इस काम को कर रहे लोगों की ज़रूरत ख़त्म हो जाती है और उन्हें छटनी करके निकाल दिया जाता है या नई भर्ती की ज़रूरत भी ख़त्म हो जाती है। इसके साथ ही विद्युत दफ्तरों में कैश में जमा होने वाले बिजली बिल का काम ख़त्म हो जाता है तो बिजली बिल जमा करने वाले कर्मचारी का काम भी ख़त्म हो जाता है।

मीटर के दाम का सवाल:

RDSS योजना के अनुसार भारत सरकार इन स्मार्ट मीटर के दामों में 15% की सब्सिडी देने की बात की थी,जिसके चलते लगभग 6000 रुपये के दाम वाले ये स्मार्ट मीटर 4998 रुपए तक पड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सिंगल पेज स्मार्ट मीटर के दाम 2800 रुपए और थ्री फेज स्मार्ट मीटर के दाम 4100 रुपए हैं। स्मार्ट मीटर फ्री में लगाए जा रहे हैं बाद में इसका पैसा लगेगा यह बोलकर ये स्मार्ट लगाए गए,लेकिन इंस्टालेशन चार्ज ( लगाने का) छोड़कर इन स्मार्ट मीटर के दामों को थोड़ा–थोड़ा करके बिजली बिलों के वसूला जा रहा है। यानि उपभोक्ताओं को सीधे धोखा दिया गया है।

टाइम ऑफ डे टैरिफ:

इन स्मार्ट मीटरों के साथ टाइम ऑफ डे टैरिफ टैक्स सिस्टम भी चालू हो गया है। इस प्रणाली से पूरे दिन के अलग–अलग समय में बिजली के रेट अलग–अलग होंगे। शाम व रात में जब बिजली की मांग अधिक रहती है तब उसके रेट भी सबसे अधिक होंगे।इसके मतलब है कि जब बिजली की मांग ज़्यादा होगी तब उसके दाम भी अधिक होंगे। भारत सरकार ने ’विद्युत( उपभोक्ता के अधिकार) नियमावली 2020 में संशोधन करके ' टैरिफ रेशनलाइजेशन ’ के नाम पर ’टाइम ऑफ डे’ टैक्स प्रणाली को कानूनी वैधता दे दी है।

स्मार्ट मीटर क्यों?

स्मार्ट मीटर लगाने के पीछे भारत सरकार ने मुख्यतः दो तर्क दिए हैं। विद्युत वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण और राज्य स्तरीय सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों को होने वाले हजारों करोड़ों रुपए के नुकसान को रोकना।

विद्युत वितरण के आधुनिकीकरण से उपभोक्ता को कोई आपत्ति न होती अगर वह लोगों के ऊपर आर्थिक बोझ के रूप में न होता,लेकिन मामला ठीक इसके उलट है आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर विद्युत वितरण क्षेत्र को कंपनियों के मुनाफे को बढ़ाने की कोशिश आम उपभोक्ता की जेब पर सीधे डकैती डालने की तैयारी है।शिक्षा,स्वास्थ्य, परिवहन,जल या विद्युत सेवाएं मानव जीवन को सुचारू सुगम बनाने अत्यावश्यक हैं और इन्हें सामाजिक जरूरत समझकर ’नो प्रॉफिट–नो लॉस ’पर आम जनता को उपलब्ध कराने की कोशिश सरकार को करनी चाहिए,लेकिन ऐसा न करके उन्हें व्यवसाय और कंपनियों के मुनाफे का आधार बनाने के लिए निजी क्षेत्र में देना लोगों के जीवन को संकट में डाल देगा।

दूसरा तर्क दिया जा रहा है कि विद्युत वितरण की सरकारी कंपनियां घाटे में हैं,सरकार घाटे के आर्थिक बोझ को सहन नही कर सकती है। अब प्रश्न यह उठता है कि इसका जिम्मेदार कौन है? आम उपभोक्ता या सरकार या कंपनियों के दफ्तरों के बकाया बिजली बिल जिसकी वसूली सरकार नही करती है,लेकिन आम उपभोक्ता की लाइट काट दी जाती है।अगर सरकारी दफ्तरों के बकाया बिल जो लगभग 64577 करोड़ (2025)को सरकार ईमानदारी से वसूल ले तो वितरण कंपनियों के 38000 करोड़ के आसपास की बचत हो सकती है।

यहां यह भी गौर करना करने की बात है बिजली, गैस और पानी इन तीन आवश्यक क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना अंतर्राष्ट्रीय पूंजी गुटों द्वारा ली गई एक विश्वस्तरीय योजना है। इससे स्मार्ट मीटर का एक बड़ा बाजार खड़ा करके उससे मुनाफा कमाने की कोशिशें भी की जा रही है। यूरोप अमेरिका जैसे कई देशों में पिछले कई सालों से स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू हो चुका है। एक आंकड़े के अनुसार वर्ष 2019 में दुनिया में स्मार्ट मीटर का बाजार 21.13 बिलियन डॉलर का था। वर्ष 2027 में यह 39.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।

भारत में 26 करोड़ विद्युत उपभोक्ता हैं।इस मात्रा में स्मार्ट मीटर का मूल्य 2 लाख 8 हजार करोड़ रुपए का होता है।RDSS योजना के विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका कुछ बड़ी कंपनियों को दिया गया है। अडानी एनर्जी सॉल्यूशन लिमिटेड, इंटेली स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड,जेनस पॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड,जीएमआर स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन प्राइवेट लिमिटेड,टाटा पॉवर आदि कंपनियों को ये ठेके दिए गए हैं।

हमारा मांग है कि बिजली एक सामाजिक जरूरत है और इसे एक सामाजिक सेवा मानकर आम जनता को 'नो प्रॉफिट–नो लॉस' पर दिया जाए।इसका निजीकरण न किया जाए।

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(लेखक सीपीआई (एम) सुल्तानपुर के जिला सचिव हैं)

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भारत में विद्युत वितरण के क्षेत्र का निजीकरण एवं बिजली कंपनियों को मुनाफा कमवाने की साज़िश व योजना - राधेश्याम वर्मा

प्रकाशित: 07 जून 2026 • 6 मिनट पठन

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