ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोशिश से साफ है कि भाजपा और आरएसएस स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को खतम करने की साजिश कर रही है l
जन समाचार मंच
ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोशिश से साफ है कि भाजपा और आरएसएस स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को खतम करने की साजिश कर रही है l

भोपाल l बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल का नाम बदलकर भारत के गौरवपूर्ण सवतंत्रता संग्राम के सम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष का अपमान किया जा रहा है l भाजपा सिर्फ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए ही ऐसा नहीं कर रही है, बल्कि इसलिये भी कर रही है, क्योंकि आजादी के आंदोलन में आरएसएस और का इतिहास सम्राज्यवाद की चाकरी और स्वतंत्रता सेनानियों की जासूसी करने का इतिहास रहा है l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश के सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि 7 जुलाई 1854 को भोपाल में जन्मे मौलाना बरकत उल्ला भोपाली स्वतंत्रता संग्राम की उस पीढ़ी के नुमाइंदे हैं, जिन्होंने विदेश में रहते हुए 1915 में ग़दर लहर में शामिल होकर भारत की पहली निर्वासित सरकार का गठन कर ब्रिटिश हक़ूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाया था l राजा महेन्द्र प्रताप सिंह इस सरकार के राष्ट्रपति और मौलाना बरकत उल्ला भोपाली इसके पहले प्रधानमंत्री थे l
माकपा नेता ने कहा है कि इस सरकार ने न केवल भारत में अंग्रेजी राज के खात्मे का ऐलान किया था बल्कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद को अपनी सरकार का लक्ष्य घोषित किया था l
जसविंदर सिंह ने कहा है कि ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोशिश से साफ है कि भाजपा और आरएसएस स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को खतम करने की साजिश कर रही है l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सभी स्वतंत्रता संग्राम की परम्परा के वाहक दलों, व्यक्तियों और संगठनों से भाजपा की इस घिनौनी हरकत का एकजुट होकर विरोध करने की अपील की है l
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
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अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 07 जून 2026 • 2 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

पश्चिम बंगाल के रानीगंज से हाल ही में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति गायब कर दिए जाने पर प्रोफेसर जेता सांकृत्यायन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आई है। जेता सांकृत्यायन अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन और उनकी पत्नी डॉ. कमला सांकृत्यायन (जो स्वयं एक लेखिका और विद्वान थीं) के बेटे हैं। उन्होंने उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय (North Bengal University) और सिक्किम यूनिवर्सिटी (गंगटोक) में लंबे समय तक अर्थशास्त्र विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं। प्रो. जेता सांकृत्यायन अपने पिता महापंडित राहुल सांकृत्यायन के साहित्यिक और ऐतिहासिक योगदान को संजोने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
केशव कुमार भट्टड़ • 17 जुलाई 2026
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