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19 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय अभियान का आह्वान: एसएफआई

श्रेया जायसवाल•10 जून 20264 मिनट पठन9 बार पढ़ा गया

मोदी सरकार शिक्षा क्षेत्र को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में पूरी तरह विफल रही है। वहीं दूसरी ओर, शिक्षा क्षेत्र के भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भाजपा के नेता 'राष्ट्रविरोधी', 'देशद्रोही', 'पाकिस्तानी' या 'बांग्लादेशी' बताने से बाज नहीं आ रहे हैं। भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर बिहार के लोकप्रिय शिक्षक 'खान सर' को निशाना बनाया गया और गिरफ्तार किया गया। केवल भाजपा शासित राज्यों में ही नहीं, बल्कि कांग्रेस शासित कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में भी मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाने पर एसएफआई सहित अन्य छात्र संगठनों को पुलिसिया दमन का सामना करना पड़ा है।

19 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय अभियान का आह्वान: एसएफआई

19 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय

अभियान का आह्वान: एसएफआई

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और एनटीए को

रद्द करने सहित 7 सूत्री माँगें

एक के बाद एक अखिल भारतीय परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे घोटालों, भ्रष्टाचार और पेपर लीक के विरोध में एसएफआई ने देशव्यापी आंदोलन का संदेश दिया है। मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में एसएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी, महासचिव सृजन भट्टाचार्य, संयुक्त सचिव आइशी घोष सहित अन्य नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्रीय नियामक संस्था 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (NTA) को रद्द करने की माँग उठाई।

एसएफआई नेताओं ने कहा कि एनटीए अब 'नेशनल टॉर्चरिंग एजेंसी' बन चुका है। देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार परीक्षा घोटाले हो रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं का कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है। परीक्षा प्रणाली में कोई सुधार नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण घोटालों का सिलसिला जारी है। इससे लाखों छात्र-छात्राओं में आक्रोश बढ़ रहा है और वे भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण कई छात्र आत्महत्या भी कर रहे हैं। इन सभी घटनाओं के प्रति मोदी सरकार पूरी तरह उदासीन है।

एसएफआई का आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में 89 प्रश्नपत्र लीक हुए हैं और कुल 48 परीक्षाएं रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी हैं। मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के शिक्षा क्षेत्र को अवैज्ञानिक और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से चलाया जा रहा है। भाजपा सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने व्यावहारिक रूप से केवल अमीरों के लिए शिक्षा के अवसर सुरक्षित किए हैं और गरीबों से मुफ्त या सस्ती शिक्षा का अधिकार छीन लिया है।

इसके साथ ही, केंद्रीय परीक्षा नियामक संस्था एनटीए की अक्षमता के कारण लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। न केवल उच्च शिक्षा, बल्कि स्कूली शिक्षा भी अब धांधली से सुरक्षित नहीं है। सीबीएसई (CBSE) की उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में पहली बार 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली शुरू होने से मूल्यांकन में गड़बड़ी की आशंका पैदा हो गई है।

मोदी सरकार शिक्षा क्षेत्र को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में पूरी तरह विफल रही है। वहीं दूसरी ओर, शिक्षा क्षेत्र के भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भाजपा के नेता 'राष्ट्रविरोधी', 'देशद्रोही', 'पाकिस्तानी' या 'बांग्लादेशी' बताने से बाज नहीं आ रहे हैं। भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर बिहार के लोकप्रिय शिक्षक 'खान सर' को निशाना बनाया गया और गिरफ्तार किया गया। केवल भाजपा शासित राज्यों में ही नहीं, बल्कि कांग्रेस शासित कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में भी मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाने पर एसएफआई सहित अन्य छात्र संगठनों को पुलिसिया दमन का सामना करना पड़ा है।

मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में एसएफआई ने निम्नलिखित मांगें रखीं-

1.शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा।

2.एनटीए (NTA) को पूरी तरह रद्द करना।

3.प्रवेश परीक्षा प्रणाली का विकेंद्रीकरण।

4.सीबीएसई में 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली को वापस लेना।

5.नीट (NEET) और सीबीएसई घोटालों की स्वतंत्र न्यायिक जांच।

6.परीक्षा भ्रष्टाचार के दोषियों को सख्त से सख्त सजा।

7.प्रभावित परीक्षार्थियों को उचित मुआवजा।

5 जून से 19 जून तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और एनटीए को रद्द करने की मांग को लेकर एसएफआई ने एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। अब तक 50 हजार से अधिक हस्ताक्षर जुटाए जा चुके हैं। संगठन का लक्ष्य 2 लाख ऑनलाइन और 3 लाख ऑफलाइन हस्ताक्षर एकत्र करना है।

19 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के घेराव (अभियान) का आह्वान किया गया है, जहां कुल 5 लाख हस्ताक्षर सौंपे जाएंगे।

प्रभावित छात्रों के साथ संवाद बैठकें, कोचिंग सेंटरों व स्कूलों में प्रचार अभियान और शिक्षकों-प्रोफेसरों के साथ मिलकर एक संयुक्त मंच बनाने की पहल की गई है।

11 जून को 'स्टॉप बुलडोजिंग लाइव्स' (Stop Bulldozing Lives) नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

एसएफआई ने स्पष्ट किया है कि वे निष्पक्ष जांच और एनटीए को भंग करने की मांग को लेकर अदालत में याचिका भी दायर करेंगे। इसके साथ ही, देश की शिक्षा व्यवस्था को 'संघ परिवार' के चंगुल से बचाने के लिए एक व्यापक छात्र-युवा-शिक्षक आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया गया है।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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19 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय अभियान का आह्वान: एसएफआई

प्रकाशित: 10 जून 2026 • 4 मिनट पठन

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