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दिल्ली हाईकोर्ट के न्यूज़क्लिक संबंधी फैसले का सीपीआई (एम) के पोलिटब्यूरो ने किया स्वागत

केशव कुमार भट्टड़•12 जून 20264 मिनट पठन70 बार पढ़ा गया

न्यूज़पोर्टल 'न्यूज़क्लिक' को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, सीपीआई(एम) के पोलिटब्यूरो ने उसका स्वागत किया है। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला साफ तौर पर एक बड़ी चेतावनी है कि सरकारें अपने राजनीतिक फायदे के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल न करें।

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यूज़क्लिक संबंधी फैसले का सीपीआई (एम) के पोलिटब्यूरो ने किया स्वागत

न्यूज़क्लिक पर दिल्ली हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का सीपीआई (एम) द्वारा स्वागत

"जाँच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल बंद हो" - सीपीआई(एम)

न्यूज़क्लिक पर दिल्ली हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का सीपीआई (एम) द्वारा स्वागत

नई दिल्ली | जून, 2026

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का पोलिटब्यूरो दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्णय का पुरजोर स्वागत करता है, जिसने न्यूज़क्लिक और उसके प्रधान संपादक प्रवीर पुरकायस्थ के खिलाफ दिल्ली पुलिस (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

यह फैसला उन ताकतों के लिए एक कड़ा सबक है जो सरकारी एजेंसियों को राजनीतिक प्रतिशोध का औजार बनाकर इस्तेमाल कर रही हैं। पोलिटब्यूरो इस संदर्भ में निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित करता है:

लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता की जीत:

ऐसे समय में जब देश का मुख्यधारा मीडिया कॉर्पोरेट घरानों और सत्ता के गलियारों की चाकरी में जुटा है, न्यूज़क्लिक ने हमेशा जनता के सरोकारों को प्राथमिकता दी। यह अदालती फैसला स्वतंत्र पत्रकारिता और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के संघर्ष में एक मील का पत्थर है।

दमनकारी नीतियों का पर्दाफाश: न्यूज़क्लिक ने ऐतिहासिक किसान आंदोलन और सरकार की जनविरोधी नीतियों का निडरता से खुलासा किया, जिसके कारण वह सत्ताधारी भाजपा की आंखों की किरकिरी बन गया। इसी निडरता को कुचलने के लिए उन पर 'यूएपीए' (UAPA) जैसे कठोर और काले कानून थोपे गए और प्रवीर पुरकायस्थ को लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रखा गया।

कानून का घोर दुरुपयोग:

दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यूज़क्लिक के खिलाफ की गई कार्रवाई "कानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग" थी। यह अब शीशे की तरह साफ है कि ये तमाम मामले केवल असहमति की आवाज़ को दबाने और आलोचनात्मक पत्रकारिता को डराने की एक सुनियोजित साजिश थे।

हमारी मांग:

सीपीआई (एम) केंद्र सरकार और उसकी जांच एजेंसियों से यह पुरजोर मांग करती है कि इस अदालती फैसले के आलोक में न्यूज़क्लिक और प्रवीर पुरकायस्थ पर थोपे गए अन्य सभी फर्जी मामलों को अविलंब वापस लिया जाए।

प्रेस की स्वतंत्रता अमर रहे!

न्यूज़ पोर्टल 'न्यूज़क्लिक' को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, सीपीआई(एम) के पोलिटब्यूरो ने उसका स्वागत किया है। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला साफ तौर पर एक बड़ी चेतावनी है कि सरकारें अपने राजनीतिक फायदे के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल न करें।

जनता की आवाज उठाने की मिली सजा?

पोलिटब्यूरो का कहना है कि आज के दौर में जब ज़्यादातर न्यूज़ चैनल और वेबसाइट्स बड़े-बड़े कॉरपोरेट घरानों के मालिकाना इशारे पर चल रहे हैं, ऐसे में न्यूज़क्लिक ने हमेशा जनता की बात की। उसने कॉरपोरेट के हितों को किनारे रखकर लोगों की असली समस्याओं को सामने रखा। चाहे केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियां हों या फिर ऐतिहासिक किसान आंदोलन, न्यूज़क्लिक ने हर मुद्दे को पूरी निडरता से दिखाया। पार्टी का मानना है कि इसी बेबाक पत्रकारिता का मुंह बंद करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को न्यूज़क्लिक के पीछे लगाया गया था।

राजनीति से प्रेरित था पूरा मामला

सीपीआई (एम) पोलिटब्यूरो ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि न्यूज़क्लिक पर लगे पैसों की हेराफेरी के आरोप और प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ की गई कार्रवाई सिर्फ और सिर्फ राजनीति से प्रेरित थी। यह फैसला देश में प्रेस की आज़ादी और आम जनता के अधिकारों को बचाने की लड़ाई में एक मील का पत्थर है। सीपीआई(एम) पोलिटब्यूरो ने मांग की है कि न्यूज़क्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ पर जितने भी बाकी मुकदमे हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए।

"सच दिखाने की मिली सजा" -न्यूज़क्लिक

इस पूरे मामले पर न्यूज़क्लिक ने भी वृहस्पतिवार को अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "हमारा इकलौता कसूर सिर्फ इतना था कि हम जनता के आंदोलनों और उनकी आवाज़ को दुनिया के सामने ला रहे थे। इसी वजह से हमें इतने मुकदमों और आरोपों का मानसिक और कानूनी टॉर्चर झेलना पड़ा।"

अब न्यूज़क्लिक को पूरी उम्मीद है कि उनके खिलाफ चल रहे बाकी मामले भी जल्द ही खत्म होंगे और देश में प्रेस की आज़ादी का परचम फिर से लहराएगा।

फैसले की विश्लेषणात्मक पूरी खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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दिल्ली हाईकोर्ट के न्यूज़क्लिक संबंधी फैसले का सीपीआई (एम) के पोलिटब्यूरो ने किया स्वागत

प्रकाशित: 12 जून 2026 • 4 मिनट पठन

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