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बारूईपुर नाबालिग गैंगरेप-मर्डर: दरिंदगी, पुलिस एनकाउंटर, निर्दोष की लिंचिंग और गहराता राजनीतिक व सामाजिक तापमान

केशव कुमार भट्टड़•10 जुलाई 20269 मिनट पठन34 बार पढ़ा गया

बारूईपुर (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारूईपुर (सूर्यपुर इलाका) में जुलाई 2026 की शुरुआत में एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) और हत्या की जघन्य वारदात ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस लोमहर्षक मामले में अब प्रशासनिक ज्यादती, पुलिसिया खौफ और बड़े पैमाने पर ग्रामीणों के पलायन की नई व चिंताजनक कड़ियां जुड़ गई हैं।

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, आधिकारिक बयानों और विपक्ष के आरोपों को समेटती हुई इस घटना की पूरी विस्तृत रिपोर्ट

बारूईपुर नाबालिग गैंगरेप-मर्डर: दरिंदगी, पुलिस एनकाउंटर, निर्दोष की लिंचिंग और गहराता राजनीतिक व सामाजिक तापमान

बारूईपुर नाबालिग हत्याकांड: दरिंदगी, पुलिस एनकाउंटर, निर्दोष की लिंचिंग और गहराता राजनीतिक व सामाजिक तापमान

बारूईपुर (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारूईपुर (सूर्यपुर इलाका) में जुलाई 2026 की शुरुआत में एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) और हत्या की जघन्य वारदात ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस लोमहर्षक मामले में अब प्रशासनिक ज्यादती, पुलिसिया खौफ और बड़े पैमाने पर ग्रामीणों के पलायन की नई व चिंताजनक कड़ियां जुड़ गई हैं।

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, आधिकारिक बयानों और विपक्ष के आरोपों को समेटती हुई इस घटना की पूरी विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी गई है:

1. घटना की पृष्ठभूमि और शव की बरामदगी

मासूम का लापता होना: शनिवार, 4 जुलाई 2026 की शाम को करीब 4:30 बजे 12 साल की मासूम बच्ची अपने घर से एक सहेली के जन्मदिन के लिए उपहार खरीदने निकली थी। जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी, तो चिंतित परिवार वालों ने शनिवार रात करीब 9:00 बजे बारूईपुर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

तालाब में मिला शव: अगले दिन रविवार (5 जुलाई) सुबह करीब 5:00 बजे सूर्यपुर हाट इलाके के एक तालाब में बोरे के अंदर बंद बच्ची का शव तैरता हुआ मिला। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया।

2. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का खुलासा: 'जिंदा ही तालाब में फेंका'

जांच अधिकारियों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि हुई कि आरोपियों ने बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं:

मृतका के शरीर पर काटने और गंभीर चोटों के निशान मिले। उसके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था, जिससे गंभीर आंतरिक ब्लीडिंग हुई थी।

सबसे दर्दनाक बात यह रही कि बच्ची के फेफड़ों और पेट में गंदा पानी मिला। डॉक्टरों के मुताबिक, सामूहिक दुष्कर्म और सिर पर चोट पहुंचाने के बाद आरोपियों ने बच्ची को मरा हुआ समझकर बोरे में बंद किया और उसे जिंदा ही तालाब में फेंक दिया था। पानी में डूबने के कारण मासूम की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

3. जन-आक्रोश: आंदोलन और एक बेकसूर की 'मॉब लिंचिंग'

शव मिलने के बाद बारूईपुर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। स्थानीय लोगों ने पुलिस पर समय से कार्रवाई न करने (लापरवाही) का आरोप लगाते हुए बारूईपुर-जयनगर रोड जाम कर दिया, टायर जलाए और रेलवे ट्रैक बाधित कर दिया। इस दौरान गुस्साए प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा।

इसी हंगामे के बीच भीड़ ने मुख्य आरोपी का सहयोगी होने के संदेह में एक 40 वर्षीय स्थानीय व्यक्ति, इंद्रजीत तांती (मंडल) को पकड़ लिया। उत्तेजित भीड़ ने कानून अपने हाथ में लेते हुए इंद्रजीत की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी। बाद में पुलिस जांच और स्थानीय स्तर पर यह पूरी तरह साफ हो गया कि इंद्रजीत मंडल निर्दोष थे और मुख्य वारदात से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। वह केवल भीड़ के गलत संदेह और अराजकता की भेंट चढ़ गए।

4. पुलिसिया कार्रवाई और मुख्य आरोपी का 'एनकाउंटर'

मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट्स के आधार पर कुल 4 आरोपियों की पहचान की: प्रभास मंडल, आनंद सरदार, दिवाकर सरदार और कबीर मोल्लाह।

बुधवार (8 जुलाई) तड़के इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ आया, जब मुख्य आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया:

          सीन रिक्रिएशन और मुठभेड़ (8 जुलाई 2026): बुधवार तड़के करीब 12:45 बजे पुलिस टीम मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को जांच के तहत घटनास्थल (सूर्यपुर के तालाब के पास) पर 'क्राइम सीन रिक्रिएट'             करने ले गई थी।

·         पुलिस के मुताबिक, वहां पहुंचने पर प्रभास ने अचानक एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया, पुलिस टीम पर एक राउंड गोली चलाई और भागने की कोशिश की।

·         पुलिस ने आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई, जिसमें प्रभास घायल हो गया। उसे तुरंत बारूईपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

        

5. नया मोड़: गाँव में पुलिसिया खौफ और पुरुषों का पलायन (ताजा स्थिति)

प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर जारी सख्त बयानों के बाद बारूईपुर के प्रभावित गांवों (विशेषकर सूर्यपुर और नारायणपुर) में जमीनी हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं।

गाँव हुए पुरुष-विहीन: मुख्यमंत्री की ओर से सख्त निर्देश दिए गए हैं कि आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों ने अव्यवस्था फैलाई, रेल पटरियां उखाड़ीं या पुलिस पर हमला किया, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस कड़े रुख के बाद स्थानीय पुलिस ने बड़े पैमाने पर धरपकड़ शुरू कर दी है।

दहशत का माहौल: रात के समय पुलिस द्वारा दी जा रही दबिश और संभावित गिरफ्तारी के डर से गाँवों का कोई भी पुरुष अपने घर पर नहीं रुक रहा है। डर के मारे पुरुष घरों से भागकर खेतों, रिश्तेदारों के यहाँ या दूर-दराज के इलाकों में छिप रहे हैं। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पुलिस निर्दोष लोगों को भी निशाना बना रही है, जिससे पूरे इलाके में खौफ और अशांति का माहौल पैदा हो गया है। कानून व्यवस्था बहाल करने के नाम पर आम ग्रामीणों और आंदोलनकारियों को प्रताड़ित करना अवांछनीय है।

6. विपक्ष (सीपीआई-एम) का तीखा हमला: "दमनकारी नीति अपना रही है सरकार"

इस पूरी स्थिति पर राज्य की मुख्य विपक्षी वामपंथी पार्टी—सीपीआई (एम) (CPI-M)—ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम और वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने प्रशासनिक कार्रवाई को "तानाशाही" करार दिया है।

मोहम्मद सलीम के मुख्य बयान:

Ø  प्रशासनिक नाकामी: मोहम्मद सलीम ने अलीमुद्दीन स्ट्रीट (पार्टी मुख्यालय) में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, "जब शनिवार रात परिवार शिकायत लेकर गया, तब पुलिस सोती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की इस निष्क्रियता और टालमटोल की वजह से ही बच्ची की जान नहीं बचाई जा सकी। अगर पुलिस समय पर कदम उठाती, तो शायद बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। सत्ता में चेहरे बदल गए, लेकिन पुलिसिंग का औपनिवेशिक और लापरवाह ढर्रा नहीं बदला।"

Ø  "TMC पार्ट-2 बन रही है सरकार": राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए मोहम्मद सलीम ने पूछा:

"क्या नई सरकार सिर्फ 'तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्ट-2' की तरह काम कर रही है? सत्ता में चेहरे बदल गए, लेकिन पुलिसिंग का तरीका और कानून-व्यवस्था की बदहाली जस की तस है। मुख्यमंत्री रोज़ नए ऐलान करते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कानून का कोई डर नहीं है। पुलिस आज भी औपनिवेशिक मानसिकता से काम कर रही है, जिसका काम आम जनता की रक्षा करना नहीं, बल्कि सत्ताधीशों को बचाना है।"

Ø  भीड़ तंत्र, अराजकता और लिंचिंग पर: मोहम्मद सलीम ने कहा, "पुलिस की मौजूदगी में एक बेकसूर व्यक्ति (इंद्रजीत मंडल) को पीट-पीटकर मार दिया गया, यह दर्शाता है कि लोगों का पुलिस और न्याय व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। राज्य में पूरी तरह अराजकता का माहौल है।"

Ø  दमन की राजनीति का विरोध: गाँवों में पुरुषों के पलायन पर सलीम ने सरकार को घेरते हुए कहा, "सत्ता आज कानून-व्यवस्था बहाल करने के नाम पर उन आम लोगों और आंदोलनकारियों को निशाना बना रही है, जो न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। रात के अंधेरे में पुलिस निर्दोष ग्रामीणों के घरों में घुसकर आतंक फैला रही है, जिसके डर से पुरुष घर छोड़ने को मजबूर हैं। यह पूरी तरह अवांछनीय और निंदनीय है।"

Ø  एनकाउंटर पर सवाल: मुख्य आरोपी के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए सलीम ने कहा कि त्वरित न्याय के नाम पर 'उत्तर प्रदेश के ठोक दो मॉडल' की नकल करना कानून-व्यवस्था के ध्वस्त होने का प्रमाण है। पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत से इस भयानक साजिश के पीछे छिपे अन्य वास्तविक सच और असली चेहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। अपराधियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कानूनी रूप से सजा मिलनी चाहिए थी।

Ø  लीपापोती की आशंका: पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का यह भी कहना है कि पुलिस कस्टडी में आरोपी की मौत से इस भयानक साजिश के पीछे के अन्य रसूखदार चेहरों और वास्तविक सच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

7. ज़मीनी संघर्ष और सीपीआई (एम) नेताओं पर FIR

बारूईपुर कांड के बाद वामपंथी छात्र और युवा संगठनों (SFI, DYFI और AIDWA) ने पूरे बंगाल में सड़कों पर उतरकर आंदोलन तेज कर दिया है। सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने बारूईपुर थाने का घेराव कर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की थी।

सीपीआई (एम) नेताओं पर मुकदमा: सीपीआई (एम) के आंदोलन और तीखे बयानों के बाद, पुलिस प्रशासन द्वारा पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य सुजन चक्रवर्ती समेत चार प्रमुख वामपंथी नेताओं के खिलाफ 'उत्तेजना फैलाने, भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर डालने और आपराधिक साजिश' के तहत शिकायत दर्ज की गई है।

सुजन चक्रवर्ती की प्रतिक्रिया: एफआईआर दर्ज होने पर प्रतिक्रिया देते हुए सुजन चक्रवर्ती ने कहा:

"असली गुनहगार वो हैं जिन्होंने समय रहते एक्शन नहीं लिया और जिनकी लापरवाही से बच्ची की जान गई। प्रशासन अपनी विफलता को छिपाने के लिए विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रहा है। हम इस डराने-धमकाने वाली राजनीति से पीछे नहीं हटेंगे और पीड़िता को न्याय मिलने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।"

8. प्रशासनिक स्थिति

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और गहरा दुख जताते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सभी दोषियों को फांसी (Capital Punishment) की सजा दिलवाना सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने राज्य के डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता से 72 घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट मांगी है। सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से बारूईपुर, सोनारपुर और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू है और भारी पुलिस व केंद्रीय बल तैनात हैं। पुलिस ने मुख्य घटना के अलावा, निर्दोष व्यक्ति की लिंचिंग करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में भी कई लोगों को गिरफ्तार किया है। निर्दोष व्यक्ति (इंद्रजीत मंडल) की लिंचिंग करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में भी पुलिस की छापेमारी लगातार जारी है, जिसने स्थानीय जनता के बीच भय को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य पुलिस से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है।

विपक्ष (सीपीआई एम) के दृष्टिकोण से बारूईपुर की यह लोमहर्षक घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की सड़न और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का नतीजा है। वामदलों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो, पुलिस के तंत्र में व्यापक सुधार किए जाएं और पीड़ित परिवार को बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के तुरंत न्याय दिलाया जाए।

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बारूईपुर नाबालिग गैंगरेप-मर्डर: दरिंदगी, पुलिस एनकाउंटर, निर्दोष की लिंचिंग और गहराता राजनीतिक व सामाजिक तापमान

प्रकाशित: 10 जुलाई 2026 • 9 मिनट पठन

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