"यह सुनियोजित दमन है, हर स्तर पर होगा विरोध" — मोहम्मद सलीम
लाहेक अली की इस सुनियोजित और मनमानी गिरफ़्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने पुलिस और सरकार को आड़े हाथों लिया है। मोहम्मद सलीम ने कहा:
"पुलिस असली अपराधियों को पकड़ने के बजाय न्याय मांग रहे आंदोलनकारियों को जेल में ठूंस रही है। यह बेहद शर्मनाक और सुनियोजित साज़िश है। हम इस पुलिसिया दमन के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और इसके विरोध में हर स्तर पर आवाज़ बुलंद की जाएगी।"
सूर्यपुर में विरोध प्रदर्शन और जनता के गुस्से के नाम पर पुलिस अब तक 43 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 200 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। आलम यह है कि पुलिसिया कार्रवाई के डर से शंकरपुर , नवग्राम और धपधपी जैसे गाँवों से नौजवान और बेगुनाह लोग घर छोड़कर भागने को मजबूर हैं। हद तो यह है कि खुद पीड़िता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई थी कि बेगुनाह ग्रामीणों पर अत्याचार बंद किया जाए, जिन्होंने उनकी बेटी के लिए आवाज़ उठाई थी। इसके बाद पुलिस ने इलाके में लाउडस्पीकर से घोषणा (माइकिंग) कर दुकान खोलने और लोगों को लौटने को कहा है, लेकिन पुलिस के इस दोहरे रवैये से जनता में खौफ बरकरार है।
अपराधियों को छोड़ आंदोलनकारियों को दबोच रही है पुलिस,
सूर्यपुर में इंसाफ़ का गला घोंटने की साज़िश: मोहम्मद सलीम
पश्चिम बंगाल। बारुईपुर। 13 जुलाई। सूर्यपुर (बारूईपुर) में एक नाबालिग छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और उसकी हत्या के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सूर्यपुर (बारूईपुर) में नाबालिग छात्रा के अपहरण और उसके साथ हुई दरिंदगी के खिलाफ पिछले रविवार को जनता का गुस्सा स्वतः स्फूर्त ढंग से फुट पड़ा लेकिन इंसाफ देने के बजाय शुभेन्दु सरकार और पुलिस दमन पर उतर आई है। इस स्वतः स्फूर्त जन विरोध में शामिल प्रदर्शनकारियों को 'देशद्रोही' बताने के 24 घंटे के भीतर ही पुलिस ने सीपीआई(एम) नेता और बारूईपुर पश्चिम विधानसभा केंद्र के लिए चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार रहे लाहेक अली को रविवार रात साढ़े दस बजे उठा लिया। उन्हें पहले नरेंद्रपुर थाने और फिर भवानी भवन ले जाया गया है, लेकिन पुलिस इस पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
"यह सुनियोजित दमन है, हर स्तर पर होगा विरोध" — मोहम्मद सलीम
लाहेक अली की इस सुनियोजित और मनमानी गिरफ़्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने पुलिस और सरकार को आड़े हाथों लिया है। मोहम्मद सलीम ने कहा:
"पुलिस असली अपराधियों को पकड़ने के बजाय न्याय मांग रहे आंदोलनकारियों को जेल में ठूंस रही है। यह बेहद शर्मनाक और सुनियोजित साज़िश है। हम इस पुलिसिया दमन के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और इसके विरोध में हर स्तर पर आवाज़ बुलंद की जाएगी।"
गाँव के गाँव खाली, बेगुनाह जनता खौफ में
सूर्यपुर में विरोध प्रदर्शन और जनता के गुस्से के नाम पर पुलिस अब तक 43 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 200 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। आलम यह है कि पुलिसिया कार्रवाई के डर से शंकरपुर , नवग्राम और धपधपी जैसे गाँवों से नौजवान और बेगुनाह लोग घर छोड़कर भागने को मजबूर हैं। हद तो यह है कि खुद पीड़िता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई थी कि बेगुनाह ग्रामीणों पर अत्याचार बंद किया जाए, जिन्होंने उनकी बेटी के लिए आवाज़ उठाई थी। इसके बाद पुलिस ने इलाके में लाउडस्पीकर से घोषणा (माइकिंग) कर दुकान खोलने और लोगों को लौटने को कहा है, लेकिन पुलिस के इस दोहरे रवैये से जनता में खौफ बरकरार है।
7 दिन में 3 बार जाँच अधिकारी बदले, क्या छुपाना चाहती है सरकार?
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। महज़ एक हफ्ते के भीतर इस केस के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) को तीन बार बदला जा चुका है। पहले दिगंत मंडल, फिर जयंत पोद्दार और अब डीएसपी शांतनु मुखर्जी को कमान सौंपी गई है। सवाल उठता है कि आखिर बार-बार अधिकारी क्यों बदले जा रहे हैं? क्या पुलिस जाँच को किसी नतीजे पर पहुँचाना चाहती है या किसी 'मिसिंग लिंक' को दबाने की कोशिश हो रही है?

'योगी मॉडल' पर सवाल: क्यों हुआ प्रभास मंडल का एनकाउंटर?
मामले के एक आरोपी प्रभास मंडल का पुलिस ने कथित तौर पर 'एनकाउंटर' कर दिया। वामपंथियों और न्यायप्रिय जनता का सवाल है कि बंगाल की धरती पर यह 'योगी-राज का मॉडल' क्यों लाया गया? अगर प्रभास मंडल ज़िंदा रहता, तो अदालत में उसका बयान असली गुनहगारों और साज़िशकर्ताओं को बेनकाब करने में मदद करता। उधर, फॉरेंसिक टीम एनकाउंटर वाली जगह से खाली हाथ लौटी है। घटना के तीन दिन बाद फोरेंसिक टीम को घटना वाली जगह भेजा गया लेकिन बारिश .घुटने भर जमे पानी और कादा-कीचड़ के कारण सारे सबूत पहले ही मिट चुके थे। साफ़ है कि पुलिस केवल लीपापोती में जुटी है।
ज्ञात रहे कि बीजेपी ने सीपीआई एम नेता सूजन चक्रवर्ती, मोनालिसा सिन्हा और लहेक अली पर मामला दायर किया है। वामदलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस दमन के आगे नहीं झुकेंगे। उनकी मांग है कि असली बलात्कारियों और हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल हो, लेकिन न्याय की मांग कर रही आम जनता और लाहेक अली जैसे जुझारू नेताओं का उत्पीड़न तुरंत बंद किया जाए!
स्रोत: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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