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साल्टलेक सेक्टर फाइव में चाय बनाने पर भी पाबंदी, दुकानें उजाड़ने का तुगलकी फरमान

केशव कुमार भट्टड़•13 जुलाई 20264 मिनट पठन17 बार पढ़ा गया

पश्चिम बंगाल में कोलकाता के नजदीक साल्टलेक सेक्टर फाइव इलाके से आजीविका पर हमले की एक बेहद क्रूर और संवेदनहीन खबर सामने आई है। बिधाननगर नगर निगम ने एक तुगलकी फरमान जारी कर सड़क किनारे और फुटपाथ पर दुकान चलाने वाले सैकड़ों गरीब दुकानदारों को उजाड़ने और उनके चूल्हे बंद करने का निर्देश दिया है। इस अलोकतांत्रिक फैसले के तहत नगर निगम ने महज दो दिन के मौखिक निर्देश पर दुकानों को हटाने का फरमान सुना दिया है। इसके साथ ही झोपड़ी, प्लास्टिक या तिरपाल की छावनी बनाकर छोटा-मोटा धंधा करने पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है।

साल्टलेक सेक्टर फाइव में चाय बनाने पर भी पाबंदी, दुकानें उजाड़ने का तुगलकी फरमान

कॉरपोरेट की 'चमक' के लिए गरीबों की आजीविका पर बुल्डोजर:

साल्टलेक सेक्टर फाइव में चाय बनाने पर भी पाबंदी, दुकानें उजाड़ने का तुगलकी फरमान

कोलकाता। 13 जुलाई 2026 । एक तरफ सरकारें रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, तो दूसरी तरफ पूंजीवाद के सबसे बड़े प्रतीक यानी आईटी हब को 'चकाचौंध' देने के लिए उन गरीब दुकानदारों को उजाड़ा जा रहा है जो दशकों से मेहनत की रोटी कमा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में कोलकाता के नजदीक साल्टलेक सेक्टर फाइव इलाके से आजीविका पर हमले की एक बेहद क्रूर और संवेदनहीन खबर सामने आई है। बिधाननगर नगर निगम ने एक तुगलकी फरमान जारी कर सड़क किनारे और फुटपाथ पर दुकान चलाने वाले सैकड़ों गरीब दुकानदारों को उजाड़ने और उनके चूल्हे बंद करने का निर्देश दिया है। इस अलोकतांत्रिक फैसले के तहत नगर निगम ने महज दो दिन के मौखिक निर्देश पर दुकानों को हटाने का फरमान सुना दिया है। इसके साथ ही झोपड़ी, प्लास्टिक या तिरपाल की छावनी बनाकर छोटा-मोटा धंधा करने पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है।

आजीविका पर सीधा हमला: चाय-कॉफी बनाने पर भी लगी 'सेंसरशिप'

नगर निगम के नए कॉर्पोरेट-परस्त नियमों के मुताबिक, अब सेक्टर फाइव में कोई भी गरीब दुकानदार धूप और बारिश से बचने के लिए तिरपाल या प्लास्टिक की छावनी तक नहीं लगा सकता। उन्हें केवल एक अदद 'छाता' इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है। इस फरमान की सबसे क्रूर मार खाने-पीने की छोटी दुकानें चलाने वाले वेंडरों पर पड़ी है। नए नियमों के तहत इन दुकानों में किसी भी तरह की आग जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यानी गैस सिलेंडर, चूल्हा, स्टोव या किसी भी प्रकार के ईंधन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। कामकाजी कर्मचारियों की थकान मिटाने वाली फुटपाथ की दुकानों में अब चाय और कॉफी बनाने की भी अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी को खाना बेचना है, तो वह घर से बनाकर लाए और यहाँ बेचे। दुकान पर खाना गर्म करने या नए सिरे से चाय-नाश्ता बनाने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। सुरक्षा के नाम पर इस तानाशाही नियम से चाय, कॉफी और गर्म भोजन बेचने वाले छोटे और सीमांत दुकानदारों का धंधा पूरी तरह चौपट होना तय है।

बिना नोटिस, बिना पुनर्वास: कड़ाके की मार झेल रहे हैं छोटे दुकानदार

साल्टलेक सेक्टर फाइव इलाके में सालों-साल से सैकड़ों लोग इन्हीं छोटी दुकानों के सहारे अपने परिवारों का पेट पाल रहे हैं। पीड़ित दुकानदारों का आरोप है कि नगर निगम ने उन्हें कोई भी लिखित नोटिस या कानूनी समय नहीं दिया। महज दो दिन पहले मौखिक तौर पर आकर दुकान हटाने को कह दिया गया। छोटे दुकानदारों का कहना है कि रातों-रात न तो धंधे का तरीका बदला जा सकता है और न ही किसी वैकल्पिक आजीविका की व्यवस्था की जा सकती है। यह फैसला पूरी तरह से अमानवीय है, जो सैकड़ों परिवारों को भुखमरी की कगार पर धकेल देगा।

सिर्फ दुकानदार ही नहीं, आम कर्मचारियों की जेब पर भी डाका

सेक्टर फाइव पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा आईटी और कॉरपोरेट हब है, जहां रोज लाखों की संख्या में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी और आम मध्यमवर्गीय लोग काम के सिलसिले में आते हैं। इन सभी के लिए सड़क किनारे की ये सस्ती चाय की दुकानें और फूड स्टॉल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और बजट का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। वामपंथी चिंतकों और श्रमिक संगठनों का मानना है कि इस जनविरोधी फैसले की मार सिर्फ दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि उन आम उपभोक्ताओं और कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ेगी जिन्हें अब महंगे कॉरपोरेट कैफे और होटलों का रुख करना पड़ेगा।

'सुरक्षा' और 'सुंदरीकरण' के नाम पर कॉरपोरेट हित साधने की कोशिश

प्रशासनिक अधिकारी हमेशा की तरह इस दमनकारी कदम के पीछे 'सुरक्षा', 'आग का खतरा' और 'फुटपाथ जाम' का बहाना बना रहे हैं। उनका तर्क है कि घनी आबादी वाले आईटी सेक्टर में फुटपाथों पर खाना पकाने से दुर्घटना की आशंका रहती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सुरक्षा के नाम पर किसी गरीब से जीने का हक छीना जा सकता है? बिना किसी ठोस पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) और वैकल्पिक जगह दिए बिना इस तरह का एक्शन पूरी तरह से स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड) कानून की धज्जियां उड़ाता है।

दुकानदारों के संगठनों ने मांग की है कि इस तानाशाही फैसले को तुरंत रोका जाए। जब तक प्रशासन उनके लिए कोई सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था या पर्याप्त समय नहीं देता, तब तक यह निर्णय लागू न किया जाए।

क्या बिधाननगर नगर निगम इन गरीब और असहाय दुकानदारों की चीख सुनेगा या फिर कॉरपोरेट लॉबी के दबाव में आकर इन मेहनतकशों को जबरन बेदखल कर दिया जाएगा। श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना पुनर्वास दुकानों को उजाड़ा गया, तो सड़कों पर तीव्र आंदोलन तेज किया जाएगा।


स्रोत: दैनिक बांग्ला कालांतर। 13.07.2026

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साल्टलेक सेक्टर फाइव में चाय बनाने पर भी पाबंदी, दुकानें उजाड़ने का तुगलकी फरमान

प्रकाशित: 13 जुलाई 2026 • 4 मिनट पठन

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