वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति तोड़ी। पूरे राज्य में भारी आक्रोश

केशव कुमार भट्टड़•15 जुलाई 20266 मिनट पठन62 बार पढ़ा गया

महापंडित पर प्रहार: वैचारिक दिवालियापन या सोची-समझी साजिश?

  • पश्चिम बंगाल के रानीगंज में उपद्रवियों द्वारा मार्क्सवादी विचारक महापंडित राहुल सांकृत्यायन की ऐतिहासिक आदमकद मूर्ति को तोड़कर गायब कर दिया गया है। इस कायराना हरकत के खिलाफ पूरे राज्य के वामपंथियों, प्रगतिशील बुद्धिजीवियों और संस्कृति कर्मियों में भारी आक्रोश है और लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं। घटना के बाद विरोध दबाने पहुंचे स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं को माकपा कार्यालय पर जनता और वामपंथी कार्यकर्ताओं के भारी जन-प्रतिरोध के आगे भागना पड़ा। वामपंथी संगठनों ने पुलिस-प्रशासन से दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और उसी स्थान पर मूर्ति की ससम्मान पुनर्स्थापना की मांग करते हुए आंदोलन तेज करने का एलान किया है।

"मूर्तियां तोड़ने वाले कायर भूल जाते हैं कि विचार पत्थरों में नहीं, जनता की चेतना में जिंदा रहते हैं।"

राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति तोड़ी। पूरे राज्य में भारी आक्रोश

रानीगंज में दुस्साहस: मार्क्सवादी विचारक राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति तोड़ी, पूरे राज्य में भारी आक्रोश

धमकी देने आए भाजपा कार्यकर्ताओं को जनता और वामपंथियों ने खदेड़ा

दोषियों की गिरफ्तारी और मूर्ति की पुनर्स्थापना की मांग, आज निकलेगा विरोध जुलूस

रानीगंज (पश्चिम बंगाल), 14 जुलाई। पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में लेनिन की मूर्तियों पर हमलों के बाद, अब रानीगंज में देश के महान मार्क्सवादी विचारक और महापंडित राहुल सांकृत्यायन की आदमकद मूर्ति को उपद्रवियों (दुष्कर्मियों) द्वारा तोड़कर गायब करने का बेहद निंदनीय मामला सामने आया है। इस घटना के खिलाफ रानीगंज के प्रतिष्ठित प्रगतिशील नागरिकों, बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक कर्मियों में तीव्र आक्रोश है। मंगलवार को वामपंथियों और संस्कृति कर्मियों ने घटना के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां मूर्ति तोड़ने वाले अपराधियों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है, वहीं घटना के तुरंत बाद स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता विरोध कर रहे वामपंथी नेताओं को धमकाने पर उतर आए हैं। मंगलवार शाम रानीगंज में विरोध सभा के बाद जब भाजपा कार्यकर्ता स्थानीय माकपा (सीपीआई-एम) कार्यालय पर धमकी देने पहुंचे, तो उन्हें भारी जन-प्रतिरोध का सामना करना पड़ा और उलटे पैर भागना पड़ा।

अंधेरे का फायदा उठाकर साजिश के तहत तोड़ी गई मूर्ति

ख्यात लेखक, इतिहासकार, भाषाविद, बौद्ध शोधकर्ता और विश्व-यात्री राहुल सांकृत्यायन की यह आदमकद मूर्ति रानीगंज मोड़ पर राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (NH-19) के किनारे लंबे समय से स्थापित थी। कोयलांचल के इस ऐतिहासिक स्थल से मूर्ति के रहस्यमय तरीके से गायब होने की खबर सोमवार रात जैसे ही फैली, माकपा नेतृत्व और जिले के वामपंथी खेमे सहित आम जनता में भारी गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह साज़िश संभवतः रविवार या सोमवार की दरम्यानी रात को रची गई। अपराधियों ने पहले इलाके के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे बंद किए, स्ट्रीट लाइटें बुझाईं और फिर देर रात का फायदा उठाकर मूर्ति को तोड़कर वहां से हटा दिया। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं कि इतनी बड़ी घटना प्रशासन की नाक के नीचे कैसे हो गई।

लेखक-कलाकार संगठनों में उबाल, तीखा विरोध प्रदर्शन

'पश्चिम बंगाल लोकतांत्रिक लेखक शिल्पी संघ' (Democratic Writers' and Artists' Association) और 'जनवादी लेखक संघ' (जलेस) ने महापंडित राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति तोड़े जाने की इस घटना की तीखी निंदा की है। मंगलवार शाम को रानीगंज के साहित्य और संस्कृति जगत से जुड़े सैकड़ों लोग उस जगह पर इकट्ठा हुए जहां मूर्ति स्थापित थी और वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस घटना की तुरंत निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए और राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति को उसी स्थान पर पूरे सम्मान के साथ पुनर्स्थापित किया जाए।

रानीगंज और राहुल सांकृत्यायन का ऐतिहासिक रिश्ता

गौरतलब है कि राहुल सांकृत्यायन ने ब्रिटिश विरोधी राजनीतिक गतिविधियों के कारण तीन साल जेल में काटे थे। वे देश में 'अखिल भारतीय किसान सभा' के संस्थापकों में से एक थे और उन्होंने देश के किसान आंदोलन को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। साल 1993 में राहुल सांकृत्यायन की जन्मशती के अवसर पर रानीगंज के दिवंगत श्रमिक नेता विवेक चौधरी के नेतृत्व में 'राहुल सांकृत्यायन जन्मशती समिति' का गठन किया गया था, जिसने पूरे कोयलांचल में साल भर विविध प्रगतिशील कार्यक्रम चलाए थे। इस समिति ने राहुल जी के विचारों को आम जनता तक पहुँचाने का काम किया था। उनके द्वारा रचित कालजयी पुस्तकों—'भागो नहीं, दुनिया को बदलो' और 'वोल्गा से गंगा' का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया था। इसी दौरान रानीगंज की एक प्रमुख सड़क का नाम 'राहुल सांकृत्यायन मार्ग' रखा गया था। इसके बाद, 9 अप्रैल 1994 को राहुल जी के जन्मदिन पर रानीगंज राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उनकी इस 9 फीट ऊंची आदमकद मूर्ति का उद्घाटन राज्य के तत्कालीन वरिष्ठ मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी विनय कृष्ण चौधरी ने किया था। उस ऐतिहासिक समारोह में राहुल सांकृत्यायन की पत्नी कमला सांकृत्यायन, उनके पुत्र जेता सांकृत्यायन और पुत्री जया सांकृत्यायन भी विशेष रूप से उपस्थित थीं।

फासीवादी ताकतों को वामपंथियों की चेतावनी

मंगलवार को आयोजित विरोध सभा में लेखक, कलाकारों और सांस्कृतिक कर्मियों की ओर से अभिजीत खां, अरुण पांडे, फाल्गुनी चटर्जी, कुल चटर्जी, बिरजू यादव, संजय प्रमाणिक और हेमंत प्रभाकर ने संबोधित किया। इस दौरान पूर्व विधायक रुनू दत्त, पश्चिम बंगाल लोकतांत्रिक लेखक कलाकार संघ के जिला संयुक्त सचिव अनूप मित्र और नाटककार नीलांजन घटक भी मौजूद रहे।

वक्ताओं ने कहा: "यह सिर्फ एक महान विद्वान की मूर्ति को हटाने की घटना नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रगतिशील सांस्कृतिक विरासत और चेतना पर सीधा हमला है। साहित्य अकादमी और पद्म भूषण से सम्मानित, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त मार्क्सवादी मनीषी की स्मृति को इस तरह मिटाने की कोशिश बेहद चिंताजनक है। हम इस दक्षिणपंथी फासीवाद के आगे झुकेंगे नहीं, बल्कि राहुल सांकृत्यायन के विचारों और आदर्शों को और अधिक व्यापक रूप से जनता के बीच ले जाएंगे।"

पुलिस और प्रशासन को शिकायत, CITU ने की निंदा

माकपा (CPI-M) के पश्चिम बर्धमान जिला कमेटी के सचिव गौरांग चटर्जी ने भी इस कायरतापूर्ण घटना की कड़ी निंदा की है। अनूप मित्र ने बताया कि मंगलवार सुबह ही रानीगंज थाने में मूर्ति तोड़ने के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी गई है। लेखक कलाकार संघ के राज्य सचिव रजत बनर्जी ने अपराधियों को तुरंत सजा देने और मूर्ति की पुनर्स्थापना की मांग दोहराई है। माकपा नेता पार्थ मुखर्जी ने जानकारी दी कि इस संबंध में पश्चिम बर्धमान के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को भी लिखित शिकायत भेजी गई है। इसके अलावा, चल रहे सीआईटीयू (CITU) राज्य परिषद के अधिवेशन में भी इस घटना की निंदा करते हुए एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है।

पार्टी कार्यालय घेरने आए भाजपाई भागे

मंगलवार को रानीगंज की विरोध सभा में शामिल होने के बाद जब माकपा नेता संजय प्रमाणिक शियारखोल ग्राम स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे, तो शाम को कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पार्टी दफ्तर को घेर लिया। वे धमकी देने लगे कि मूर्ति टूटने की घटना को लेकर भाजपा और राज्य सरकार की आलोचना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जैसे ही स्थानीय लोगों और वामपंथी कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लगी, भारी संख्या में लोग पार्टी कार्यालय की तरफ दौड़ पड़े और धमकी देने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जनता का उग्र प्रतिवाद और तीखी बहस देखकर भाजपा कार्यकर्ता वहां से भाग खड़े हुए। माकपा नेतृत्व ने घोषणा की है कि बुधवार को इस घटना के खिलाफ एक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा और पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।


साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति । 15 जुलाई 2026

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति तोड़ी। पूरे राज्य में भारी आक्रोश

प्रकाशित: 15 जुलाई 2026 • 6 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
विश्लेषण

भारत के बारे में लेनिन ~ बुद्धदेव भट्टाचार्य

"गुलाम भारत की मुक्ति और एशियाई जन-एकता को दिशा देने वाला लेनिन का क्रांतिकारी दृष्टिकोण।" - बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा बांग्ला में प्रस्तुत यह मूल-आलेख एक तारीखवार ऐतिहासिक-वैचारिक अध्ययन है, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं औपनिवेशिक मुक्ति-संग्राम के प्रति लेनिन की गहरी विश्लेषणात्मक दृष्टि को रेखांकित करता है। अध्ययन 1900 से 1923 के मध्य रचित लेनिन के निबंधों, पत्रों, नोट्स और भाषणों के आधार पर यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण, दमनकारी नीतियों और बंबई के मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी चेतना का गहन मूल्यांकन किया था। लेनिन ने औपनिवेशिक राष्ट्रवाद के मूल लोकतांत्रिक स्वरूप को पहचानते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक सर्वहारा क्रांति और एशियाई जन-एकता से जोड़ा। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के मंच से मानबेंद्रनाथ रॉय के संकीर्णतावादी सिद्धांतों को संशोधित कर लेनिन ने भारतीय कम्युनिस्टों को व्यापक साम्राज्यवादी-विरोधी मंचों में भागीदारी और किसान-मजदूर आंदोलनों को संगठित करने की रणनीतिक दिशा प्रदान की। अंततः, यह आलेख स्थापित करता है कि लेनिन के अनुसार रूस, भारत, चीन आदि देशों का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का मालिक होना ही संघर्ष के परिणाम को तय करेगा।

कुछ घंटे पहले

राष्ट्रीय

'ज्ञानेश' हटाओ, 'एसआईआर' रोको ~ एम ए बेबी

"वोट के अधिकार पर हमला बंद करो, लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बहाल करो!" मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालों और मतदाता सूचियों से नाम छांटने की मनमानी के बीच देश में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। 'इंडियन एक्सप्रेस' के सनसनीखेज खुलासे के बाद सीपीआई (एम) ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग को लेकर देशव्यापी जन-आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

11 अक्टूबर 2026

विश्लेषण

क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?

10 अक्टूबर की सुबह सड़कों का मंजर लोकतंत्र की नहीं, बल्कि एक सीलबंद सैन्य क्षेत्र की गवाही दे रहा था। जब एक सरकार अपने ही नागरिकों को रोकने और घेरने के लिए इतने व्यापक स्तर पर युद्ध जैसी तैयारियाँ करती है, तो स्वयं से यह सवाल पूछना ही होगा - आखिर सरकार किस चीज को दबाने और रोकने की कोशिश कर रही है?

10 अक्टूबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement