"अदालत के आदेश और वादे पड़े फीके; आधी रात को चला बुलडोज़र, छिना गरीबों का रोज़गार!"
कलकत्ता हाईकोर्ट के स्थगानादेश और मुख्यमंत्री के वादों को दरकिनार कर शनिवार आधी रात पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के महेशतला स्थित नुंगी रेलवे स्टेशन और स्टेशन परिसर में बरसों से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे करीब 150 से अधिक गरीब हॉकर्स व छोटे दुकानदारों पर शनिवार आधी रात अचानक रेलवे और पुलिस प्रशासन का बुलडोज़र टूट पड़ा। नुंगी स्टेशन पर रेलवे प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ बुलडोज़र चलाकर 150 से अधिक हॉकर्स की दुकानें ढहा दीं। माकपा और सीटू नेताओं ने मौके पर पहुँचकर अदालती कॉपी दिखाते हुए विरोध जताया, लेकिन उच्छेद जारी रहा। बिना नोटिस और बिना पुनर्वास की गई इस कार्रवाई से 150 परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जिसके खिलाफ पीड़ित हॉकर्स सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे।
बुल्डोज़र राज का कहर
अदालती आदेश और वादों को ठेंगा दिखा आधी रात को उजाड़े गए नुंगी के 150 हॉकर्स
महेशतला, दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल। 2 अगस्त: 'डबल इंजन' वाली व्यवस्था और केंद्र-राज्य के कॉर्पोरेट-परस्त गठजोड़ का असली जनविरोधी चेहरा शनिवार की खौफनाक रात एक बार फिर बेनकाब हो गया। दक्षिण 24 परगना जिले के महेशतला स्थित नुंगी रेलवे स्टेशन और स्टेशन परिसर में बरसों से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे करीब 150 से अधिक गरीब हॉकर्स व छोटे दुकानदारों पर शनिवार आधी रात अचानक रेलवे और पुलिस प्रशासन का बुलडोज़र टूट पड़ा।
कलकत्ता हाईकोर्ट के स्पष्ट स्थगानादेश (Stay Order) और मुख्यमंत्री के 'लोकलुभावन वादों' की धज्जियाँ उड़ाते हुए, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पीढ़ियों से बसे इन छोटे कारोबारियों के रोज़गार को मिनटों में मलवे के ढेर में तब्दील कर दिया गया। जब देश भर में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, तब बिना किसी पूर्व सूचना या पुनर्वास की व्यवस्था किए आधी रात को की गई यह कार्रवाई केंद्र और राज्य की जनविरोधी, निरंकुश और गरीब-विरोधी सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
आधी रात को पुलिसिया घेराबंदी और बुलडोज़र का नंगा नाच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार मध्यरात्रि जब नुंगी स्टेशन का बाज़ार पूरी तरह शांत था, तभी रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राज्य पुलिस की एक विशाल टुकड़ी ने पूरे नुंगी स्टेशन और उसके आसपास के इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। बिना किसी पूर्व सार्वजनिक नोटिस के, दर्जनों बुलडोज़र स्टेशन परिसर में घुसे और प्लेटफॉर्म तथा प्लेटफॉर्म से सटे इलाकों में स्थित लगभग 150 दुकानों को ढहाना शुरू कर दिया।
अचानक हुए इस बर्बर हमले से स्टेशन परिसर में चीख-पुकार मच गई। रोज़ी-रोटी छिनते देख जब हॉकर्स अपनी दुकानों से सामान बचाने और मिन्नतें करने पहुंचे, तो उन्हें भारी पुलिस बल के दम पर खदेड़ दिया गया। महज कुछ घंटों के भीतर ही छोटे दुकानदारों और चाय, फल व अन्य सामग्री बेचने वाले गरीब परिवारों का आशियाना और रोज़गार पूरी तरह नेस्तनाबूत कर दिया गया।
अदालती आदेशों और मुख्यमंत्री के खोखले वादों की उड़ीं धज्जियाँ
यह उच्छेद अभियान पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। कलकत्ता हाईकोर्ट में हॉकर्स के अधिकारों और उच्छेद से जुड़े मामले पर पहले से ही सुनवाई जारी है और अदालत ने प्रक्रिया पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन ने अदालत की अवमानना करते हुए यह कार्रवाई की। दूसरी ओर, राजनीतिक ढोंग का आलम यह है कि राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में घोषणा की थी कि आगामी 'शारदोत्सव' (दुर्गा पूजा) से पहले राज्य में किसी भी हॉकर को बेदखल नहीं किया जाएगा। लेकिन हकीकत में, भाजपा की केंद्र सरकार और राज्य के प्रशासनिक तंत्र के बीच की साँठ-गाँठ ने गरीबों के त्यौहार से ठीक पहले उनके चूल्हे बुझा दिए हैं। पीड़ितों का कहना है कि "मुख्यमंत्री के बयान सिर्फ अखबार की सुर्खियाँ बटोरने के लिए होते हैं, ज़मीन पर तो गरीबों पर केवल बुलडोज़र ही चलाया जाता है।"
मौके पर पहुँचे माकपा-सीटू नेता, पुलिस के सामने किया तीखा विरोध
जैसे ही आधी रात को बुल्डोज़र से दुकानें ढहाने की खबर फैली, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) के वरिष्ठ नेता तुरंत मौके पर पहुँचे। माकपा के दक्षिण 24 परगना ज़िला सचिव रतन बागची, वरिष्ठ नेता प्रभात चौधरी, और बाटा-महेशतला एरिया कमेटी के सचिव राजा मित्र सहित सीटू के कई नेता आधी रात को ही नुंगी स्टेशन पहुँचे। वामपंथी नेताओं ने तुरंत उच्छेद की कार्रवाई रोकने की मांग की और मौके पर मौजूद रेलवे अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों को कलकत्ता हाईकोर्ट के स्थगानादेश की कॉपियाँ दिखाईं। उन्होंने अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया कि जब मामला अदालत के विचाराधीन है, तो बिना किसी वार्ता या पुनर्वास के यह एकतरफा कार्रवाई पूरी तरह अवैध है। हालाँकि, प्रशासनिक ज़िद और जनविरोधी रवैये के आगे किसी तर्क की सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद, माकपा और सीटू के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित हॉकर्स के साथ मिलकर स्टेशन परिसर में ही पुलिस और रेलवे प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर विरोध प्रदर्शन के बावजूद रात भर उच्छेद की अपनी बर्बरता जारी रखी।
"पुनर्वास के बिना उच्छेद मंज़ूर नहीं" — सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे पीड़ित
इस अचानक हुई कार्रवाई से 150 से अधिक परिवारों के सामने भुखमरी का संकट पैदा हो गया है। कई पीड़ित दुकानदारों ने रोते हुए बताया कि वे दशकों से यहाँ अपनी ईमानदारी की कमाई से परिवार पाल रहे थे। बिना किसी नोटिस के उनका सब कुछ तबाह कर दिया गया।
पीड़ित हॉकर्स ने आरोप लगाया:
"केंद्र और राज्य सरकार की निरंकुश और जनविरोधी नीतियों को लागू करने के लिए रेलवे प्रशासन ने गुपचुप तरीके से बुलडोज़र चलाया है। किसी भी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बिना पुनर्वास दिए इस तरह उखाड़ फेंकना असंवैधानिक है।"
उच्छेद के खिलाफ और अपने रोज़गार के अधिकार की रक्षा के लिए अब पीड़ित हॉकर्स और हॉकर यूनियनें कानूनी और मैदानी लड़ाई तेज करने जा रही हैं। सोमवार को प्रभावित हॉकर्स कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करेंगे और अदालत की अवमानना करने वाले अधिकारियों व बुलडोज़र कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।
जन-आंदोलन तेज़ करने की चेतावनी
माकपा और सीटू नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि गरीबों और मेहनतकशों के अधिकारों पर इस तरह के कॉरपोरेट-परस्त हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नुंगी स्टेशन के हॉकर्स के पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग को लेकर आने वाले दिनों में महेशतला समेत पूरे जिले में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। वामपंथी संगठनों ने मांग की है कि तत्काल हॉकर्स को उनके स्थान पर वापस बसाया जाए और नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति। 03 अगस्त 2026
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