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हमला के प्रतिवाद में 'किताबों का बाज़ार'

अपराजिता•29 अक्टूबर 20263 मिनट पठन3 बार पढ़ा गया
"किताबों को लेकर आरएसएस और बीजेपी ने जो अशालीनता की है, हम उसी के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं। यह सिर्फ एक दिन का प्रतीकात्मक बुक स्टॉल नहीं है, बल्कि हम पूरे साल इस तरह के बुक स्टॉल लगाएँगे। वहाँ इतिहास, दर्शन, विज्ञान, राजनीति और महापुरुषों की पुस्तकों का भंडार रहेगा।"

हमला के प्रतिवाद में

' किताबों का बाज़ार '

➡️ बोलपुर

विभिन्न विषयों की किताबें मेज पर सजा कर रखी हुई थीं। एक-एक करके लोग किताबें हाथों में उठा रहे थे। वामपंथी और प्रगतिशील विचारधारा के लोगों के साथ-साथ अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाले लोग और आम किताब-प्रेमी भी यहाँ आए हुए थे।

शारदोत्सव के दौरान बोलपुर हाई स्कूल के पास जिस स्थान पर पुलिस ने सीपीआई(एम) के बुक स्टॉल को बंद करने पर मजबूर किया था, बुधवार को उसी स्थान पर पार्टी की पहल पर 'किताबों का बाज़ार' लगाया गया।

शारदोत्सव के समय राज्य के विभिन्न स्थानों पर बुक स्टॉलों पर बीजेपी और आरएसएस के हमलों के विरोध में ही यह पहल की गई है। किताबों के इस हाट में रवींद्रनाथ टैगोर, काज़ी नज़रुल इस्लाम की रचनाओं से लेकर मार्क्स और लेनिन की पुस्तकें शामिल थीं—यहाँ विविध प्रकार के साहित्य, इतिहास, दर्शन, विज्ञान और राजनीति की पुस्तकें उपलब्ध थीं। पाठकों के बीच 'बंगाल में ज्ञानेश कुमार की वोट चोरी' शीर्षक वाली पुस्तक की भी काफी माँग थी।

सीपीआई(एम) के बीरभूम ज़िला सचिव गौतम घोष ने कहा, "किताबों को लेकर आरएसएस और बीजेपी ने जो अशालीनता की है, हम उसी के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं। यह सिर्फ एक दिन का प्रतीकात्मक बुक स्टॉल नहीं है, बल्कि हम पूरे साल इस तरह के बुक स्टॉल लगाएँगे। वहाँ इतिहास, दर्शन, विज्ञान, राजनीति और महापुरुषों की पुस्तकों का भंडार रहेगा।"

'बंगाल में ज्ञानेश कुमार की वोट चोरी' पुस्तक की माँग के बारे में उन्होंने कहा कि लोग यह जानना चाहते हैं कि वोट चोरी के आरोप किस तरह लगे हैं और उसकी प्रक्रिया क्या है—इसी को समझने के लिए लोग यह किताब ढूँढ रहे हैं। रवींद्रनाथ टैगोर की स्मृतियों से जुड़े बोलपुर में इस 'किताबों का बाजार' के आयोजकों का कहना है कि किताबों पर हमला करके लोगों की पढ़ने की रुचि को दबाया नहीं जा सकता। इसी दिन ज़िले के राजनगर के लाउजोड़ में मेले के अवसर पर मार्क्सवादी और प्रगतिशील साहित्य के बुक स्टॉल की शुरुआत हुई है।

दूसरी ओर, नारायणगढ़ के विद्यासागरचक बाज़ार स्थित एक मेला परिसर में सीपीआई(एम) ने बुक स्टॉल लगाया था। मंगलवार की बारिश वाली रात में उस बुक स्टॉल को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तोड़ दिया। इस हमले की निंदा करते हुए बुधवार सुबह एक विरोध रैली निकाली गई। मेला परिसर में हुई इस घटना पर स्थानीय लोग भी विरोध किए। दोपहर में दोबारा उसी जगह पर बुक स्टॉल शुरू होते देख इलाके के लोगों के साथ-साथ मेला समिति के लोग भी आगे आए। लक्ष्मी पूजा के अवसर पर यह मेला 8-10 दिनों तक चलता है, जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और चर्चा सभाओं का आयोजन होता है। पिछले 40 वर्षों से पार्टी इस मेला परिसर में यह बुक स्टॉल लगाती आ रही है। मंगलवार की बारिश वाली रात में असामाजिक तत्वों द्वारा उस बुक स्टॉल को तोड़कर ध्वस्त कर दिया गया था। इस हमले के बाद बुधवार को जब स्टॉल दोबारा शुरू हुआ, तो लोगों की भीड़ और बढ़ गई।

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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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प्रकाशित: 29 अक्टूबर 2026 • 3 मिनट पठन

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