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मेहनतकशों और किसानों की माँगें उठाने पर देशद्रोही का ठप्पा लगा दिया जाता है- मीनाक्षी मुखर्जी

अपराजिता•02 नवंबर 20264 मिनट पठन11 बार पढ़ा गया
धर्म के नाम पर विभाजन पैदा किया जा रहा है। सरकार की आलोचना करते ही देशद्रोह का ठप्पा लगा दिया जाता है। विभाजन की राजनीति के खिलाफ मेहनतकश लोगों की एकजुटता कायम करनी होगी।

मेहनतकशों और किसानों की माँगें उठाने पर देशद्रोही का ठप्पा लगा दिया जाता है- मीनाक्षी मुखर्जी

मेहनतकशों और किसानों की माँगें उठाने पर देशद्रोही का ठप्पा

लगा दिया जाता है,

और धर्मनिरपेक्षता की बात करने पर

धर्मविरोधी कहा जाता है

जनसभा को सम्बोधित करते हुए सीपीआई (एम)की केंद्रीय कमेटी की सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी

➡️ बीरभूम

मेहनतकशों और किसानों की माँगें उठाने पर देशद्रोही का ठप्पा लगा दिया जाता है, और धर्मनिरपेक्षता की बात करने पर धर्मविरोधी कहा जाता है—भाजपा के खिलाफ यह आरोप लगाते हुए मीनाक्षी मुखर्जी ने गाँव-गाँव में आंदोलन फैलाने का आह्वान किया। उनका आरोप है कि गरीब बच्चों के मिड-डे मील का बजट घटाया जा रहा है, और इसके विरोध में सभा-जुलूस निकालने पर पुलिस माइक छीन ले रही है। माइक न होने पर भी जनता के पास पहुँचकर भाजपा के भ्रष्टाचार और नीतियों को उजागर करना होगा। रविवार को मयूरोश्वर में पश्चिम बंगाल मिड-डे मील यूनियन के बीरभूम जिला तीसरे सम्मेलन के अवसर पर आयोजित जनसभा में उन्होंने यह आह्वान किया।

सम्मेलन के समापन पर मयूरोश्वर कैनाल मोड़ पर आयोजित जनसभा में मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि एक परिवार चलाने के लिए महीने में कम से कम 40 हजार रुपये की आवश्यकता होती है। ऐसे में मिड-डे मील कर्मियों के लिए प्रति माह 42 हजार रुपये वेतन की माँग करना क्या अन्याय है?

उनके शब्दों में, "ये माँ-बहनें दिनभर कड़ी मेहनत करके स्कूल के बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध कराती हैं। अगर वे खुद भूखी रहेंगी, तो बच्चों के पोषण और बौद्धिक विकास कैसे होगा?"

मिड-डे मील कार्यकर्ताओं के कार्य के महत्त्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यही लोग बच्चों के भोजन की व्यवस्था करते हैं। उनके मेहनत को मान्यता और उचित पारिश्रमिक मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस माँग को लेकर आंदोलन करने पर पुलिस की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि मजदूर, किसान, शिक्षक और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों के सामूहिक प्रयास से ही सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कायम रह पा रही है। बीरभूम जिला सम्मेलन में कार्यकर्ताओं ने इस लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया।

भाजपा की राजनीति के संदर्भ में मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि --

धर्म के नाम पर विभाजन पैदा किया जा रहा है। सरकार की आलोचना करते ही देशद्रोह का ठप्पा लगा दिया जाता है। उन्होंने आह्वान किया कि विभाजन की राजनीति के खिलाफ मेहनतकश लोगों की एकजुटता कायम करनी होगी।

जनसभा में सीटू नेता दीपंकर चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट में मिड-डे मील के लिए आवंटन कम कर दिया गया है। उनका कहना था कि सरकारी स्कूलों के बंद होने के पीछे भी सरकार की नीतियों की भूमिका है। उन्होंने मिड-डे मील योजना को जारी रखने, इसे किसी निजी संस्था के हाथों में न सौंपने और कार्यकर्ताओं को 10 महीने के बजाय 12 महीने का वेतन देने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

जनसभा को संजीव मल्लिक और जयंत भल्ला ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में गौतम घोष, बलराम चटर्जी सहित अन्य नेतृत्वकर्ता उपस्थित थे। जनसभा का संचालन सुमति भंडारी ने किया।

इससे पूर्व, सुबह झंडा फहराने और शहीद वेदी पर माल्यार्पण के साथ पश्चिम बंगाल मिड-डे मील यूनियन के बीरभूम जिला सम्मेलन की शुरुआत हुई। सम्मेलन का उद्घाटन सीटू के जिला महासचिव दीपांकर चक्रवर्ती ने किया। रिपोर्ट सुमति भंडारी ने पेश की, जिस पर 14 प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लिया। संगठन की नेत्री कृष्णा चटर्जी और सनत बनर्जी ने भी विचार रखे। सम्मेलन को बधाई देते हुए कनीज रबीउल फतेमा और आरेबिया खातून ने अपनी बात रखी।

जिला समिति का गठन

सम्मेलन में 35 सदस्यीय जिला समिति का गठन किया गया। नाजेमा बीबी को अध्यक्ष और सुमति भंडारी को सचिव चुना गया। नसरीन सुल्ताना, गुंजा साहा और जयंती माल के अध्यक्ष मंडल ने सम्मेलन की कार्यवाही का संचालन किया।

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साभार बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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मेहनतकशों और किसानों की माँगें उठाने पर देशद्रोही का ठप्पा लगा दिया जाता है- मीनाक्षी मुखर्जी

प्रकाशित: 02 नवंबर 2026 • 4 मिनट पठन

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