चुनाव में अब महज दो दिन बचे हैं, लेकिन आयोग अभी तक अपनी वेबसाइट पर मतदाताओं की अंतिम सूची तक जारी नहीं कर पाया है। ऐसे में यह आयोग निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे कराएगा! देश के लोकतंत्र की रक्षा देश की जनता को ही करनी होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात के बाद लाहिड़ी ने कहा: "सांप्रदायिक प्रचार करना चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है। प्रधानमंत्री खुद ऐसा प्रचार कर रहे हैं!
देश के लोकतंत्र पर चुनाव आयोग की ओर से हमला हो रहा है। इस लोकतंत्र की रक्षा देश की जनता को ही करनी होगी। चुनाव में अब महज दो दिन बचे हैं, लेकिन आयोग अभी तक अपनी वेबसाइट पर मतदाताओं की अंतिम सूची तक जारी नहीं कर पाया है। ऐसे में यह आयोग निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे कराएगा!
वृहस्पतिवार को चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात कर सीपीआई(एम) ने ये सवाल उठाए। इस प्रतिनिधिमंडल में सीपीआई(एम) केंद्रीय समिति के सदस्य शमीक लाहिड़ी, राज्य सचिव मंडल के सदस्य कल्लोल मजूमदार और वरिष्ठ नेता सुखेंदु पाणिग्रही शामिल थे।
मुलाकात के बाद लाहिड़ी ने कहा: "सांप्रदायिक प्रचार करना चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है। प्रधानमंत्री खुद ऐसा प्रचार कर रहे हैं, लेकिन क्या आयोग कोई कार्रवाई कर रहा है? झूठे वादे करना भी चुनावी नियमों के खिलाफ है। हम एक के बाद एक शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, पर आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।"
लाहिड़ी ने आगे कहा कि पहले की परंपरा के अनुसार, शिकायत करने पर आयोग कार्रवाई की प्रगति के बारे में सूचित करता था, भले ही शिकायत गलत क्यों न हो। लेकिन इस बार वे कुछ नहीं बता रहे हैं, बस इतना कह रहे हैं कि 'हम देख रहे हैं'।
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा:- "क्या केवल बीजेपी और यहां के अधिकारियों द्वारा तृणमूल को संतुष्ट करने से ही पारदर्शी चुनाव हो जाएंगे?" "असली हकदार यानी मतदाताओं को जानकारी देने की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही उनकी परेशानियों को कम करने की कोई पहल की गई है। क्या आयोग चुनाव के नाम पर प्रहसन (मजाक) करना चाहता है?"
शमीक लाहिड़ी ने यह भी आरोप लगाया कि आजादी के बाद के भारत में चुनाव आयोग सबसे बड़ा अपराध कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टियां (बीजेपी और टीएमसी) आपस में सांप-सीढ़ी का खेल खेल रही हैं, जबकि आम जनता प्रताड़ित हो रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें 'फ्रीज' की गई वोटर लिस्ट मिली है, तो उन्होंने पलटकर सवाल किया - "क्या किसी को भी यह सूची मिली है? पूरे पश्चिम बंगाल में किसी को मिली? अब बीजेपी या टीएमसी को अलग से मिली हो तो बात अलग है, लेकिन आयोग की वेबसाइट पर यह क्यों नहीं है? दो दिन बाद वोटिंग है और अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कौन मतदाता है और कौन नहीं।"
न्यायाधीशों पर हो रहे हमलों और निष्पक्ष चुनाव की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में लाहिड़ी ने बताया कि उन्होंने सीईओ से साफ कहा है कि जो आयोग मतदाता सूची जारी करने जैसा बुनियादी काम नहीं कर सका, वह राज्य में निष्पक्ष चुनाव की गारंटी कैसे दे सकता है?
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देश के लोकतंत्र पर चुनाव आयोग की ओर से हो रहा है हमला - सीपीआई(एम)
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