उग्र राष्ट्रवाद का गुणगान करते हुए आरएसएस और भाजपा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को छोटा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बड़ा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। पहनावे और खान-पान जैसी चीजों को लेकर भी लोगों के बीच बंटवारा किया जा रहा है। आम जनता दैनिक जीवन की जरूरतों और समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन फिर भी उन्हें एक-दूसरे से अलग करने की साजिश चलाई जा रही है।
सीपीआई(एम) की दिवंगत नेता कॉमरेड तानिया चक्रवर्ती के स्मरण सभा की तैयारियों के तहत पार्टी का झंडा लगाते समय पानिहाटी में सीपीएम कार्यकर्ता भाजपा के हमले का शिकार हुए। रविवार को पानिहाटी के लोक संस्कृति भवन में आयोजित स्मरण सभा के अंत में इस हमले के विरोध में निकाली गई एक विरोध रैली में सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम, उत्तर 24 परगना जिला कमेटी के सचिव पलाश दास सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
स्मरण सभा में मोहम्मद सलीम ने कहा कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री सहित भाजपा नेता 'दिमागी नक्सल' जैसे विभिन्न शब्दों का प्रयोग करके प्रदर्शनकारियों को जनता से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके उकसावे पर ही शैक्षणिक संस्थानों सहित हर जगह गुंडा वाहिनी के हमले हो रहे हैं। लोगों को एकजुट करके ही इसका मुंहतोड़ जवाब देना होगा।
बीते 11 जुलाई को महिला आंदोलन की वरिष्ठ नेता, सीपीएम की दिग्गज नेता और पूर्व विधायक तानिया चक्रवर्ती का निधन हो गया था। रविवार को उनकी स्मरण सभा के सिलसिले में शनिवार रात जब पार्टी कार्यकर्ता झंडे लगा रहे थे, तभी अचानक भाजपा के एक गुट ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में कई पार्टी कार्यकर्ता घायल हो गए, जिनमें से निर्मल जाना और इंद्रनील सेन को गंभीर चोटें आईं। निर्मल जाना का हाथ टूट गया।
रविवार को स्मरण सभा के समाप्त होने पर इस घटना के खिलाफ लोक संस्कृति भवन से एक विरोध जुलूस निकाला गया, जो बीटी रोड ट्रैफिक मोड़ होते हुए सोदपुर स्टेशन के सामने जाकर समाप्त हुआ। वहां हमलावरों की कड़ी निंदा की गई।
लोक संस्कृति भवन में आयोजित स्मरण सभा में मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा के शासन में पूरे देश में जनता के भीतर आक्रोश बढ़ रहा है और पूरा देश विरोध की आवाज उठा रहा है। कॉमरेड तानिया चक्रवर्ती के रचनात्मक कार्यों और राजनीतिक जीवन से प्रेरणा लेकर इस विरोध को और मजबूत करना होगा। लोगों को एकजुट करके एक व्यापक एकता का निर्माण करना होगा, ताकि विभिन्न वर्ग के आंदोलनकारी, प्रमुख हस्तियां और लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष लोग इस संघर्ष में शामिल हो सकें।
सलीम ने आगे कहा कि कभी 'हरमद', कभी 'अर्बन नक्सल' तो कभी 'दिमागी नक्सल' जैसे तमगे देकर विरोध प्रदर्शनों को मुख्यधारा से अलग-थलग करने का प्रयास किया जा रहा है। ये केवल कुछ शब्द मात्र नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का संकेत हैं कि सत्तारूढ़ दल आंदोलन करने वालों को किस दृष्टिकोण से देखना चाहता है। ऐसे मामलों में इन शब्दों को किसी संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इनके इस्तेमाल के पीछे सत्तारूढ़ दल के व्यापक इरादों को समझना होगा। इसके जरिए वे आंदोलनकारी लोगों की एकजुटता को तोड़कर उन्हें विभाजित करना चाहते हैं। देश और इस राज्य में जो मुक्त विचारों का प्रसार था, वहां से लोगों को एक संकीर्ण दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है।
उग्र राष्ट्रवाद का गुणगान करते हुए आरएसएस और भाजपा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को छोटा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बड़ा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। पहनावे और खान-पान जैसी चीजों को लेकर भी लोगों के बीच बंटवारा किया जा रहा है। आम जनता दैनिक जीवन की जरूरतों और समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन फिर भी उन्हें एक-दूसरे से अलग करने की साजिश चलाई जा रही है।
मोहम्मद सलीम ने कहा कि पूरी दुनिया में वैश्वीकरण के नाम पर उग्र दक्षिणपंथी ताकतें शोषितों को बांटकर और कमजोर करके साम्राज्यवादी वर्चस्व को बनाए रखना चाहती हैं। दूसरी ओर, दुनिया भर के कम्युनिस्ट सभी को एक मंच पर लाना चाहते हैं। हमारी दैनिक चुनौती लोगों को एकजुट करने की है। जाति, भाषा और धर्म से ऊपर उठकर सभी को इस संघर्ष में शामिल करना ही हमारा मुख्य कार्य है।
कार्यक्रम की शुरुआत में सीपीआई(एम) के राज्य व जिला नेताओं, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी (RSP) के नेताओं तथा सारा भारत लोकतांत्रिक महिला समिति की नेत्रियों ने कॉमरेड तानिया चक्रवर्ती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सभा की अध्यक्षता दुलाल चक्रवर्ती ने की। मोहम्मद सलीम के अलावा सीपीएम उत्तर 24 परगना जिला कमेटी के सचिव पलाश दास, पार्टी नेता रेखा गोस्वामी, जिला संपादन मंडल के सदस्य मानस मुखर्जी, जिला कमेटी सदस्य शुभव्रत चक्रवर्ती और अनिर्बान भट्टाचार्य ने भी सभा में अपने विचार व्यक्त किए। कॉमरेड तानिया चक्रवर्ती की याद में झंटू मजूमदार ने शोक प्रस्ताव पढ़ा। उपस्थित नेताओं ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देते हुए विचारधारा को धार देने और प्रतिरोध के संघर्ष को और मजबूत करने का आह्वान किया।
पलाश दास ने कहा कि कॉमरेड तानिया चक्रवर्ती न केवल महिला आंदोलन की, बल्कि पूरी पार्टी की एक सशक्त नेता थीं। वर्तमान में आरएसएस और भाजपा जो जहरीला और कलंकित माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उसके खिलाफ हर तरफ विरोध संगठित हो रहा है। हमें और अधिक कुशलता के साथ जनता के बीच जाकर उन्हें इस लड़ाई में शामिल करने के लिए पहल करनी होगी।
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साभार:- गणशक्ति
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