वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंसाहित्य-संस्कृति

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

साहित्य-संस्कृति

लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ

राजीव कुमार पाण्डेय•29 अगस्त 20262 मिनट पठन74 बार पढ़ा गया

जो लोग/

गाली से भी बदतर हैं/

उन्हें शिकायत है/

कि लड़कियां/

गाली दे रही हैं।

दरअसल/

लड़कियां/

वह सब कुछ/

सूद समेत लौटा रही हैं।

लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ

लड़कियां गाली दे रही हैं!

-हूबनाथ
*
जिस देश में

निन्यानबे प्रतिशत

गालियां बनी ही हैं

लड़कियों के लिए

गाली के केंद्र में

हमेशा लड़की ही रही है

एक लड़का

दूसरे लड़के को

जब गाली देता है

तो वह

लड़की को गाली

दे रहा होता है

जो समाज

लड़कियों की

ज़िंदगी को ही

गाली बना दे

जो देश

अपनी मर्दानगी

लड़कियों को

बेइज़्ज़त करके

कुचल मसल कर

साबित करे

जो ख़ुद

इन्सानियत के चेहरे पर

भद्दी गाली से

अधिक नहीं

जो लोग

गाली से भी बदतर हैं

उन्हें शिकायत है

कि लड़कियां

गाली दे रही हैं

दरअसल

लड़कियां

वह सब कुछ

सूद समेत लौटा रही हैं

जो उन्हें

हज़ारों साल से

तथाकथित

सभ्य समाज

देता आया है

सनातन समाज में

होली के दिन

सदियों से

घिनौनी गालियां

दी जाती हैं

लड़कियों को

आज तक

किसी ने आपत्ति

दर्ज नहीं कराई

हर रोज़

हर पल

हर जगह

गालियों पर गालियां

दी जाती हैं

लड़कियों को

कभी

सीधे-सीधे

कभी

लड़कों के हवाले से

सुसंस्कृत समाज वह

जहां सिर झुका कर

लड़कियां

खाती रहें गालियां

लात-घूंसे खाने के बाद

सभ्यता की

बहुत बड़ी क़ीमत चुकाई

सिर्फ़ लड़कियों ने

अब वे

ज़रा-सा

असभ्य होना चाहती हैं

और कोई आज़ादी

मिले न मिले

पर सदियों से दी गई

गालियां

सूद समेत लौटाने की

आज़ादी चाहती हैं

लड़कियां

आज़ादी के

अमृत-काल के

सावन में

क्या इतना-सा ज़हर

नहीं पचाया जा सकता!


लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक
हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ

प्रकाशित: 29 अगस्त 2026 • 2 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
साहित्य-संस्कृति

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

16 सितंबर 2026

राज्य

गड़वेता-शालबनी के 7 पार्टी दफ्तरों में बीजेपी का उपद्रव, लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।

16 सितंबर 2026

साहित्य-संस्कृति

माफीनामा: हूबनाथ

हम तो /

नारी शक्ति के समक्ष /

नतमस्तक हैं ।

हम सभी /

एक स्त्री से ही तो /

जनमे हैं ।

उसी के संरक्षण में /

हमारा स्वर्णिम /

बालपन बीता है ।

12 सितंबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
साहित्य-संस्कृति

युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

साहित्य-संस्कृति

मध्ययुगीन भक्ति-आन्दोलन का एक पहलू - मुक्तिबोध

भक्ति-आन्दोलन का जनसाधारण पर जितना व्यापक प्रभाव हुआ उतना किसी अन्य आन्दोलन का नहीं। पहली बार शूद्रों ने अपने सन्त पैदा किये, अपना साहित्य और अपने गीत सृजित किये। कबीर, रैदास, नाभा सिपी, सेना नाई, आदि-आदि महापुरुषों ने ईश्वर के नाम पर जातिवाद के विरुद्ध आवाज बुलन्द की। समाज के न्यस्त स्वार्थवादी वर्ग के विरुद्ध नया विचारवाद अवश्यम्भावी था , वह हुआ।

अपराजिता • 30 जुलाई 2026

साहित्य-संस्कृति

गुलबहार सिंह निर्देशित फिल्म 'प्रेमचंद:एक जीवन' में प्रेमचंद को जीवंत किया इरफान ने

अपने शब्दों से समाज को आईना दिखाने वाले और साहित्य को राजनीति की मशाल कहने वाले प्रेमचंद का जीवन कितना चुनौतीपूर्ण रहा, यह इस फ़िल्म के माध्यम से देखा जा सकता है।प्रेमचंद के बचपन से लेकर मृत्यु पर्यन्त जीवन के प्रत्येक पड़ाव को जिस जीवंतता से दर्शकों के सामने लाया गया वह अविस्मरणीय था । एक व्यक्ति की वैचारिक पृष्ठभूमि कैसे विकसित होती है और कैसे वह अपने विचारों को अपनी कलम के माध्यम से समाज की सोचने की क्षमता को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल करता है, कैसे कुरीतियों पर कुठाराघात कर उसे सबके सामने लाने की जिद्द में कई यातनाएँ सहता है - फ़िल्म के माध्यम से प्रेमचंद के जीवन का यह पहलू काफी प्रभावशाली तरीके से दर्शकों के समक्ष रखा गया है।।

राजीव कुमार पाण्डेय • 03 अगस्त 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement