जन समाचार मंच

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कोलकाता:
पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है। नगर निकाय (नगर पालिका) नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में लंबी पूछताछ के बाद सोमवार रात ईडी ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया।
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सुजीत बोस सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे साल्टलेक स्थित ईडी कार्यालय (CGO कॉम्प्लेक्स) पहुंचे थे। उनके साथ उनके वकील भी मौजूद थे। लगभग साढ़े 10 घंटे तक चली मैराथन पूछताछ के बाद, अधिकारियों ने रात करीब 9:15 बजे उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की।
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यह मामला दक्षिण दमदम नगर पालिका में हुई अवैध नियुक्तियों से जुड़ा है। ईडी सूत्रों के मुताबिक, सुजीत बोस पर आरोप है कि उन्होंने अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के लिए उनके नामों की सिफारिश की थी।
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गिरफ्तारी से पहले सुजीत बोस ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि:
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4 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद यह सुजीत बोसकी ईडी के सामने पहली पेशी थी। बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से हाल ही में चुनाव हारने वाले सुजीत बोस के लिए यह गिरफ्तारी एक बड़ा झटका मानी जा रही है। इससे पहले उन्हें 1 मई को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
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प्रकाशित: 11 मई 2026 • 2 मिनट पठन

"गुलाम भारत की मुक्ति और एशियाई जन-एकता को दिशा देने वाला लेनिन का क्रांतिकारी दृष्टिकोण।" - लेखक बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा बांग्ला में प्रस्तुत यह मूल-आलेख एक तारीखवार ऐतिहासिक-वैचारिक अध्ययन है, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं औपनिवेशिक मुक्ति-संग्राम के प्रति लेनिन की गहरी विश्लेषणात्मक दृष्टि को रेखांकित करता है। अध्ययन 1900 से 1923 के मध्य रचित लेनिन के निबंधों, पत्रों, नोट्स और भाषणों के आधार पर यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण, दमनकारी नीतियों और बॉम्बे के मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी चेतना का गहन मूल्यांकन किया था। लेनिन ने औपनिवेशिक राष्ट्रवाद के मूल लोकतांत्रिक स्वरूप को पहचानते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक सर्वहारा क्रांति और एशियाई जन-एकता से जोड़ा। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के मंच से मानबेंद्रनाथ रॉय के संकीर्णतावादी सिद्धांतों को संशोधित कर लेनिन ने भारतीय कम्युनिस्टों को व्यापक साम्राज्यवादी-विरोधी मंचों में भागीदारी और किसान-मजदूर आंदोलनों को संगठित करने की रणनीतिक दिशा प्रदान की। अंततः, यह आलेख स्थापित करता है कि लेनिन के अनुसार रूस, भारत, चीन आदि देशों का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का मालिक होना ही संघर्ष के परिणाम को तय करेगा।
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