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'कॉकरोच जनता पार्टी' मामले की तत्काल सुनवाई के लिए 'सुप्रीम कोर्ट' तैयार नहीं

केशव कुमार भट्टड़•26 मई 20264 मिनट पठन42 बार पढ़ा गया

केंद्र सरकार की नीतियों, कॉर्पोरेट से नजदीकी, बेरोजगारी, शिक्षा के व्यवसायीकरण और न्यायपालिका पर सवाल उठाकर कॉकरोच जनता पार्टी ने तेजी से सुर्खियां बटोरीं।पिछले कुछ दिनों में बड़ा प्रभाव डालने वाले डिजिटल विरोध के इस नए रूप और युवाओं के गुस्से के बीच, इस मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का तैयार न होना और नरम रुख दिखाना काफी महत्वपूर्ण है।

'कॉकरोच जनता पार्टी' मामले की तत्काल सुनवाई के लिए 'सुप्रीम कोर्ट' तैयार नहीं

'कॉकरोच जनता पार्टी' मामले की तत्काल सुनवाई के लिए 'सुप्रीम कोर्ट' तैयार नहीं

                नई दिल्ली, 25 मई- कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर चर्चा-समीक्षा, उसके सोशल मीडिया हैंडल को बंद कर दिया जाना, फिर उसकी वापसी—इस सब के बीच शीर्ष अदालत इस संबंध में एक याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए तैयार नहीं हुई। फर्जी वकील, जाली डिग्री और अदालत की मौखिक टिप्पणियों को केंद्र बनाकर सोशल मीडिया पर फैल रहे व्यंग्य-मजाक की जांच की मांग करते हुए मामला दर्ज किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'इतने भावुक मत होइए।' उन्होंने ही देश के बेरोजगार युवाओं, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों को कॉकरोच और परजीवी (पैरासाइट) कहा था। उस टिप्पणी के बाद ही 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन हुआ। कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर इसके फॉलोअर्स की संख्या ने भाजपा को भी पीछे छोड़ दिया और फिर अचानक कॉकरोच जनता पार्टी (सीकेपी) का अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, इसे बाद में फिर-से नियमित कर दिया गया। इस अकाउंट को बनाने वाले प्रवासी भारतीय अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली है। पिछले कुछ दिनों में बड़ा प्रभाव डालने वाले डिजिटल विरोध के इस नए रूप और युवाओं के गुस्से के बीच, इस मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का तैयार न होना और नरम रुख दिखाना काफी महत्वपूर्ण है।

                मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ आज पीठ (बेंच) में न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची भी थे। याचिकाकर्ता की ओर से वकील एन. के. गोस्वामी ने कहा, 'मुख्य न्यायाधीश पहले ही अपने बयान पर स्पष्टीकरण दे चुके हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर अभी भी विकृत और भड़काऊ प्रचार चल रहा है।' तभी मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'इस मामले को इतनी भावुकता से मत देखिए।' एक अन्य वकील ने अदालत में दावा किया, 'फर्जी डिग्री लेकर वकालत के पेशे से जुड़े लोगों के खिलाफ सीबीआई जांच की जरूरत है और अदालत की टिप्पणियों का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।' जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'यह इतना जरूरी नहीं है। हम इस पर विचार करेंगे।' इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों का इस्तेमाल करके प्रचार किया जा रहा है और न्यायपालिका को सोशल मीडिया के 'कंटेंट' में बदला जा रहा है। साथ ही फर्जी डिग्री का इस्तेमाल कर वकालत के पेशे में शामिल होने के आरोपों की जांच की भी मांग की गई है।

                केंद्र सरकार की नीतियों, कॉर्पोरेट से नजदीकी, बेरोजगारी, शिक्षा के व्यवसायीकरण और न्यायपालिका पर सवाल उठाकर कॉकरोच जनता पार्टी ने तेजी से सुर्खियां बटोरीं। कई नेटिजन्स (इंटरनेटर उपयोगकर्ताओं) का कहना है कि जिन्हें शासक और व्यवस्था तुच्छ या 'पैरासाइट' समझते हैं, उन वंचित, हाशिए पर मौजूद और नाराज युवाओं की आवाज के रूप में ही कॉकरोच जनता पार्टी का गठन हुआ है। कम समय में ही उसके वीडियो और पोस्ट लाखों लोगों तक पहुँच गए। विशेष रूप से शिक्षित बेरोजगार युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों और सरकार के आलोचकों के बीच इसकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ती गई। इसके बाद से ही सीजेपी के खिलाफ प्रशासनिक निगरानी और उत्पीड़न के आरोप लगने शुरू हो गए। प्लेटफॉर्म से जुड़े कुछ कंटेंट क्रिएटर्स ने दावा किया है कि उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गई हैं। सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रखी जा रही है और पुलिस पूछताछ का भी सामना करना पड़ रहा है। कुछ मामलों में वीडियो हटाने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इस विवाद के बीच 16 मई को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने दावा किया कि मीडिया के एक वर्ग ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। उन्होंने युवाओं का अपमान नहीं किया, बल्कि यह टिप्पणी उन लोगों के लिए की थी जो फर्जी डिग्री लेकर वकालत के पेशे में आ रहे हैं। लेकिन इस स्पष्टीकरण का कोई फायदा नहीं हुआ।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति , 26.मई 2026

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'कॉकरोच जनता पार्टी' मामले की तत्काल सुनवाई के लिए 'सुप्रीम कोर्ट' तैयार नहीं

प्रकाशित: 26 मई 2026 • 4 मिनट पठन

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