'इंडिया' गठबंधन की अहम बैठक
मतभेदों के बावजूद मोदी सरकार के खिलाफ एकजुटता का दावा
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विविधता में एकता है इंडिया गठबंधन - बैठक से पहले जयराम रमेश की टिप्प्णी।
"निशाना भाजपा पर और तीर सहयोगियों पर? यह कैसी राजनीति है!बैठक से पहले रुख साफ करे काँग्रेस।" - सीपीआई (एम) नेता एम ए बेबी की सीधी बात।
नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। सोमवार, 8 जून को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक होने जा रही है।
इस बैठक से ठीक पहले काँग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि गठबंधन के भीतर अलग-अलग दलों की अपनी राय और मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सभी दल एक साथ खड़े हैं।
"विविधता में एकता है इंडिया गठबंधन"
जयराम रमेश ने बताया कि बैठक में शामिल होने के लिए 23 राजनीतिक दलों ने अपनी सहमति दे दी है। कुछ दल किन्हीं कारणों से नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी साफ कर दिया है कि वे मोदी सरकार के खिलाफ इस लड़ाई में साथ हैं। रमेश जयराम ने कहा:
"जिस तरह भारत में विविधता में एकता है, वैसी ही स्थिति हमारे गठबंधन की भी है। संविधान पर बढ़ते हमले, विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर हम सब एक हैं।"
गठबंधन के भीतर बढ़ रही है तल्खी
भले ही काँग्रेस एकता का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर खींचतान साफ दिख रही है। खासकर चुनाव के बाद काँग्रेस की भूमिका पर कई सवाल उठ रहे हैं।
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सीपीआई (एम) की कड़ी आपत्ति:
सीपीआई (एम) के नेता एम.ए. बेबी ने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान काँग्रेस के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ हम भाजपा के खिलाफ लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ काँग्रेस हम पर ही भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगा रही है। यह बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने साफ कहा कि काँग्रेस को बैठक से पहले अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
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स्टालिन और हेमंत सोरेन भी नाराज:
तमिलनाडु में द्रमुक (डीएमके) के नेता स्टालिन भी काँग्रेस से खुश नहीं हैं। उनका आरोप है कि उन्होंने बिना चर्चा किए 'टीवीके' को समर्थन दे दिया। वहीं झारखंड में जनमुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता हेमंत सोरेन ने भी राज्यसभा सीट के लिए काँग्रेस द्वारा बिना चर्चा किए उम्मीदवार घोषित करने पर नाराजगी जताई है।
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क्या करेगी तृणमूल?
इस बीच सबकी नजरें तृणमूल काँग्रेस (टीएमसी) पर टिकी हैं। पश्चिम बंगाल में चुनावी हार और उसके बाद पार्टी के भीतर मची भगदड़ के बीच टीएमसी इस बैठक में क्या रुख अपनाती है, यह देखना दिलचस्प होगा। बता दें कि टीएमसी इससे पहले भी कई बार इंडिया गठबंधन की बैठकों से दूरी बना चुकी है।
इस बैठक का मुख्य एजेंडा देश के संवैधानिक लोकतंत्र को बचाना और आर्थिक नीतियों के नाम पर युवाओं के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ को रोकना होगा। अब देखना है कि काँग्रेस अपने सहयोगियों की नाराजगी दूर कर मोदी सरकार के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खड़ा कर पाती है या नहीं ।
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स्रोत: गणशक्ति ऑन लाइन। 7 जून 2026
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