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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) महासचिव कामरेड एम ए बेबी द्वारा कांग्रेस को लिखा गया पत्र

राजीव कुमार पाण्डेय•08 जून 20263 मिनट पठन16 बार पढ़ा गया

आपको पता होना चाहिए कि केरल में आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ाई में हमारे सैकड़ों कैडर शहीद हुए हैं। हम आपको यह भी बताना चाहेंगे कि केरल में एल डी एफके पिछले दस सालों के राज में, दूसरे कई राज्यों के उलट, किसी भी तरह के सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए, जो सेक्युलरिज़्म और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के हमारे कमिटमेंट को दिखाता है।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) महासचिव कामरेड एम ए बेबी द्वारा कांग्रेस को लिखा गया पत्र

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)

सेंट्रल कमेटी

5 जून, 2026

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे,

प्रेसिडेंट, इंडियन नेशनल कांग्रेस

प्रिय मल्लिकार्जुन खड़गे जी,

मुझे श्री केसी वेणुगोपाल ने 8 जून, 2026 को होने वाली इंडिया ब्लॉक पार्टियों की मीटिंग के बारे में बताया है।

इस बारे में मैं असेंबली इलेक्शन के दौरान हाल के एक पॉलिटिकल डेवलपमेंट का ज़िक्र करना चाहूंगा। केरल असेंबली इलेक्शन के दौरान कांग्रेस लीडरशिप ने एक सिस्टमैटिक कैंपेन चलाया था कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भाजपा के बीच डील हो गई है। इसके अलावा, यह आरोप लगाया गया था कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सीनियर लीडर, पोलित ब्यूरो के मेंबर और उस समय के चीफ मिनिस्टर, कॉमरेड पिनाराई विजयन ने भी मोदी के साथ डील की थी। उन्होंने सवाल किया था कि यदि 'नहीं तो, उनसे एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने पूछताछ या अरेस्ट क्यों नहीं किया'?

यह कोई इलेक्शन कैंपेन की गर्मी में कही गई बातें नहीं थीं, बल्कि आपके पॉलिटिकल कैंपेन का सेंटरपीस थीं। हर नेशनल लीडर, श्री राहुल गांधी, श्रीमती प्रियंका गांधी, और आपने भी बार-बार ऐसे आरोप लगाए।

इंडिया ब्लॉक को भाजपा से पॉलिटिकल रूप से लड़ने के लिए एक बड़े प्लेटफॉर्म के तौर पर बनाया गया था। अलग-अलग आइडियोलॉजी और प्रोग्राम वाली पार्टियां, जो कई राज्यों में इलेक्शन में एक-दूसरे की विरोधी हैं, सिर्फ इसी मकसद से एक साथ आईं।

जून 2023 की पटना मीटिंग, जिसने इंडिया ब्लॉक शुरू किया, से ही भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने ईमानदारी से ऐसा एक एकजुट प्लेटफॉर्म बनाने के लिए काम किया है। अजीब बात है, अब भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) पर भाजपा के साथ डील करने का आरोप लग रहा है। यह एक ऐसी झूठी बात है जिसे हम हल्के में नहीं ले सकते। यह भाजपा के खिलाफ बनी एकता की बुनियाद पर हमला है। आपको पता होना चाहिए कि केरल में आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ाई में हमारे सैकड़ों कैडर शहीद हुए हैं। हम आपको यह भी बताना चाहेंगे कि केरल में एल डी एफके पिछले दस सालों के राज में, दूसरे कई राज्यों के उलट, किसी भी तरह के सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए, जो सेक्युलरिज़्म और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के हमारे कमिटमेंट को दिखाता है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता, श्री राहुल गांधी ने बार-बार केरल के उस समय के मुख्यमंत्री के खिलाफ ईडी कार्रवाई की मांग की है। क्या इसे भाजपा विरोधी रुख कहा जा सकता है या यह मोदी सरकार को एक साथी विपक्षी नेता के खिलाफ गैर-कानूनी सज़ा देने वाली कार्रवाई करने के लिए बुलाने का मामला है? जब तक ये मामले साफ नहीं हो जाते, इंडिया ब्लॉक का मकसद ही सवालों के घेरे में आ जाएगा। इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रेसिडेंट के तौर पर, यह आप और कांग्रेस लीडरशिप पर है कि आप ऐसे परेशान करने वाले कदमों के बारे में स्थिति साफ करें।

हमें 8 जून, 2026 को बुलाई गई मीटिंग के संदर्भ में यह मामला उठाने की ज़रूरत महसूस हुई।

हालांकि, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) मोदी सरकार की तानाशाही, सांप्रदायिक और जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट लड़ाई के लिए संसद में इंडिया ब्लॉक और दूसरी विपक्षी पार्टियों के साथ पूरा सहयोग करेगी। सभी हमलों और तोड़-मरोड़ के बावजूद भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) इस काम में कभी पीछे नहीं रहेगी।

हार्दिक शुभकामनाएं,

आपका

एम. ए. बेबी (जनरल सेक्रेटरी)

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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) महासचिव कामरेड एम ए बेबी द्वारा कांग्रेस को लिखा गया पत्र

प्रकाशित: 08 जून 2026 • 3 मिनट पठन

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केशव कुमार भट्टड़ • 16 मई 2026

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अंधाधुंध हॉकर उन्मूलन नहीं, पुनर्वास चाहिए.!.

साल 2014 का Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act देश के स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका के अधिकार को मान्यता देता है। लेकिन रेल हॉकर अभी भी इस सुरक्षा से बाहर हैं। जबकि भारतीय रेलवे के साथ उनका रिश्ता कई दशकों पुराना है। ट्रेन यात्रा की संस्कृति के साथ झालमूड़ी , चनाचूर, चाय, मूंगफली, किताबें या खिलौने बेचने वाले रचे-बसे हुए हैं। वे सिर्फ सामान नहीं बेचते; वे रेल यात्रा की एक जीवंत सामाजिक वास्तविकता हैं।

इसलिए रेल हॉकरों की मांग पूरी तरह जायज है—लाइसेंस देकर पेशे को मान्यता दी जाए, पुनर्वास के बिना कोई उन्मूलन न हो, उन्हें Street Vendors Act के दायरे में लाया जाए, सामाजिक सुरक्षा, ईएसआई (ESI) और भविष्य निधि (प्रॉविडेंट फंड) में शामिल किया जाए, विकास के नाम पर आजीविका नष्ट न की जाए।

इस लड़ाई में 'पश्चिम बंगाल रेलवे हॉक्टर्स यूनियन' (CITU) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लंबे समय से यह संगठन रेल हॉकरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। राजनीतिक आतंक, प्रशासनिक उत्पीड़न, जबरन यूनियन पर कब्जा—इन सबके खिलाफ उन्होंने रेल हॉकरों को एकजुट करने का प्रयास किया है। अलग-अलग समय पर तृणमूल समर्थक यूनियनों के हमलों, धमकियों और यहां तक कि सदस्यों को जबरन दल-बदल कराने की कोशिशों के खिलाफ भी उन्होंने कड़ा प्रतिरोध खड़ा किया है।

केशव कुमार भट्टड़ • 20 मई 2026

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