आज अंतिम फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने आदेश दिया है कि सरकारी कर्मचारियों पर योग में भाग लेने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता।
जन समाचार मंच
आज अंतिम फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने आदेश दिया है कि सरकारी कर्मचारियों पर योग में भाग लेने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता।

रेड रोड पर आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी अनिवार्य नहीं है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को यह बात कही। राज्य सरकार द्वारा ऐसा निर्देश जारी किया था कि सरकारी कर्मचारियों को योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य है। राज्य समन्वय समिति ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया था। आज मुकदमा जीतने के बाद संगठन ने कहा, 'आज अंतिम फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने आदेश दिया है कि सरकारी कर्मचारियों पर योग में भाग लेने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। यदि कोई कर्मचारी भाग नहीं लेना चाहता है, तो प्रशासन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।'
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा, 'रविवार को रेड रोड पर आयोजित योग कार्यक्रम के लिए रेड रोड को सात दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी सरकारी कर्मचारियों, यहां तक कि संविदा कर्मचारियों को भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया है। सरकार ने इसके लिए निर्देश भी जारी किए थे। ऐसा आदेश संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बाद न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया। यह मुकदमा राज्य समन्वय समिति ने दायर किया था। कल सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने कहा कि वे यह नहीं कह रहे हैं कि कार्यक्रम में भाग लेना अनिवार्य है।' अदालत के आदेशानुसार सरकार ने लिखित रूप में कहा है कि उपस्थिति अनिवार्य नहीं है और यदि कोई व्यक्ति कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होता है तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
साभार:- गणशक्ति
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प्रकाशित: 19 जून 2026 • 2 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
16 सितंबर 2026

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

मोहम्मद सलीम • 25 अप्रैल 2026

नीट महाघोटाला: 'डार्लिंग' से 'डेथ' तक का मंजर
"22 लाख से अधिक छात्रों की आँखों के सपने, होनहार युवाओं की जलती चिता, और पर्चे के बदले अस्मत माँगते 'गुरु' का घिनौना चेहरा— यह है उस परीक्षा का सच, जिसे देश 'डॉक्टर' बनाने के लिए करवाता है। जब तंत्र की लापरवाही और धन की हवस हद पार कर जाए,तो शिक्षा का मंदिर श्मशान और व्यापार की मंडी बन जाता है।
आज जब देश में धर्म और संस्कृति का शोर सबसे ऊँचा है, तब उसी समाज की अंतरात्मा के भीतर बेईमानी की ऐसी भूख नाच रही है जो बच्चों की लाशों पर भी करोड़ों की गड्डियाँ गिनने से नहीं हिचकती।यह कैसी धार्मिक चेतना है जहाँ नारे तो भगवान के लगते हैं, लेकिन आचरण में केवल शैतानी हवस और भ्रष्टाचार का बोलबाला है?नीट पेपर लीक की यह आग सिर्फ परीक्षा प्रणाली की नहीं,बल्कि देश के नैतिक और सामाजिक ढांचे की भस्म उड़ा रही है।जब मेधावी छात्र फंदे पर झूल रहे हों,अस्मत के लिये छात्राएं गुरु से जूझ रही हों, और मगरमच्छ तिजोरियाँ भर रहे हों, तब चुप रहना इस महापाप में हिस्सेदार होना है!"
केशव कुमार भट्टड़ • 16 मई 2026

साल 2014 का Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act देश के स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका के अधिकार को मान्यता देता है। लेकिन रेल हॉकर अभी भी इस सुरक्षा से बाहर हैं। जबकि भारतीय रेलवे के साथ उनका रिश्ता कई दशकों पुराना है। ट्रेन यात्रा की संस्कृति के साथ झालमूड़ी , चनाचूर, चाय, मूंगफली, किताबें या खिलौने बेचने वाले रचे-बसे हुए हैं। वे सिर्फ सामान नहीं बेचते; वे रेल यात्रा की एक जीवंत सामाजिक वास्तविकता हैं।
इसलिए रेल हॉकरों की मांग पूरी तरह जायज है—लाइसेंस देकर पेशे को मान्यता दी जाए, पुनर्वास के बिना कोई उन्मूलन न हो, उन्हें Street Vendors Act के दायरे में लाया जाए, सामाजिक सुरक्षा, ईएसआई (ESI) और भविष्य निधि (प्रॉविडेंट फंड) में शामिल किया जाए, विकास के नाम पर आजीविका नष्ट न की जाए।
इस लड़ाई में 'पश्चिम बंगाल रेलवे हॉक्टर्स यूनियन' (CITU) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लंबे समय से यह संगठन रेल हॉकरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। राजनीतिक आतंक, प्रशासनिक उत्पीड़न, जबरन यूनियन पर कब्जा—इन सबके खिलाफ उन्होंने रेल हॉकरों को एकजुट करने का प्रयास किया है। अलग-अलग समय पर तृणमूल समर्थक यूनियनों के हमलों, धमकियों और यहां तक कि सदस्यों को जबरन दल-बदल कराने की कोशिशों के खिलाफ भी उन्होंने कड़ा प्रतिरोध खड़ा किया है।
केशव कुमार भट्टड़ • 20 मई 2026
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