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जनता की अदालत में जनता का इतिहास

राजीव कुमार पाण्डेय•20 जून 20264 मिनट पठन8 बार पढ़ा गया

आरएसएस धर्म, पहनावा, भोजन आदि को लेकर तनाव फैलाकर लोगों की एकता को तोड़ना चाहता है। वे पश्चिम बंगाल दिवस के नाम पर सांप्रदायिक विद्वेष फैलाना चाहते हैं।

जनता की अदालत में जनता का इतिहास

पश्चिम बंगाल दिवस के नाम पर सांप्रदायिक प्रचार रोकने के लिए सीपीआई(एम) का कार्यक्रम

पश्चिम बंगाल दिवस के नाम पर भाजपा के विकृत सांप्रदायिक इतिहास प्रचार के खिलाफ, देश के विभाजन और शरणार्थियों के हितों में वामपंथियों के संघर्ष के वास्तविक इतिहास को लोगों के सामने लाने के लिए, रविवार 21जून से लगातार चार दिनों का कार्यक्रम सीपीआई(एम) की कोलकाता जिला कमेटी ने लिया है। 'मानुषेर दरबारे मानुषेर इतिहास' (जनता की अदालत में जनता का इतिहास) शीर्षक वाले इस प्रचार कार्यक्रम के तहत 21 से 24जून तक कोलकाता की 40 जगहों पर तथ्यपूर्ण इतिहास को सामने रखने के लिए जनसभाएँ की जाएँगी। वास्तविक इतिहास के तथ्यों से समृद्ध एक प्रचार पुस्तिका भी इस उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। शुक्रवार को सीपीआई(एम) के कोलकाता जिला कार्यालय प्रमोद दासगुप्ता भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी की कोलकाता जिला कमेटी के सचिव कल्लोल मजुमदार ने यह जानकारी दी।

राज्य में भाजपा की नई सरकार पश्चिम बंगाल दिवस मनाने के नाम पर विकृत सांप्रदायिक इतिहास पेश कर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गौरवान्वित करने में जुटी है। कल्लोल मजुमदार ने इस संदर्भ में कहा कि वर्तमान सरकार ने देश विभाजन को लेकर सांप्रदायिक विद्वेष और विभाजन की राजनीति को और अधिक चालाकी से फैलाने की कुत्सित चाल चली है। इस परिस्थिति का मुकाबला करने और देश विभाजन तथा उस समय के दौरान लोगों के हित में वामपंथियों के संघर्ष के वास्तविक इतिहास को जनता के सामने लाने के लिए 'मानुषेर दरबारे मानुषेर इतिहास' शीर्षक कार्यक्रम शुरू किया गया है। चार दिनों तक पूरे कोलकाता में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा सांप्रदायिक हिंदुत्व का प्रचार करने के लिए सुनियोजित तरीके से लोगों के संघर्ष के वास्तविक इतिहास और आंदोलनों में वामपंथियों के योगदान को धुंधला करना चाहती है। हम इस कुत्सित चाल के खिलाफ बड़े पैमाने पर लोगों के सामने सही तथ्य पेश कर रहे हैं और वर्तमान सरकार के नए फासीवादी हमले व तानाशाही के खिलाफ लोगों को संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि हिंदू महासभा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कारण ही पश्चिम बंगाल हिंदुओं का होमलैंड बन सका। लेकिन वास्तविक इतिहास कुछ और ही कहता है। वह इतिहास हिंदू-मुस्लिम के भेद के बिना लाखों लोगों के जीवन की पीड़ा और संघर्ष का इतिहास है। उस जीवन संघर्ष में वामपंथियों की बड़ी भूमिका थी। देश विभाजन के कारण विस्थापित हुए लोगों के हितों में वामपंथियों की लड़ाई ने उनके अधिकारों को स्थापित करने में भूमिका निभाई, और इंसानों के बीच भाईचारा व एकता का निर्माण किया।

कल्लोल मजुमदार ने कहा, "हम पहले से ही सरकार के जनविरोधी कार्यों के खिलाफ लोगों की माँगों को लेकर लड़ाई के मैदान में हैं। आगामी 21 जून राज्य में वाम मोर्चा सरकार का स्थापना दिवस है, जिस वाम मोर्चा सरकार ने पश्चिम बंगाल में साढ़े तीन दशकों तक लोकतंत्र का विकास कर लोगों के अधिकारों का सम्मान किया और सद्भाव का माहौल बनाया। उस सद्भाव को नष्ट करने की सांप्रदायिक साजिश का मुकाबला करने के लिए हम 21 जून से ही वास्तविक इतिहास के प्रचार के लिए सड़कों पर उतरेंगे। क्योंकि आरएसएस धर्म, पहनावा, भोजन आदि को लेकर तनाव फैलाकर लोगों की एकता को तोड़ना चाहता है। वे पश्चिम बंगाल दिवस के नाम पर सांप्रदायिक विद्वेष फैलाना चाहते हैं।"

सांप्रदायिक राजनीति के साथ-साथ भाजपा की कॉर्पोरेट-परस्ती की राजनीति का विरोध करते हुए कल्लोल मजुमदार ने कहा कि चुनाव से पहले 'अन्नपूर्णा भंडार' की कहानियों का प्रचार किया गया था। अब उनकी जगह राज्य में हर तरफ गरीब लोगों पर हमले हो रहे हैं। रोजी-रोटी के साधन छीने जा रहे हैं। इसके खिलाफ भी वामपंथियों की लड़ाई जारी है। अदालत भी गरीबों पर अत्याचार रोकने के निर्देश दे रही है, फिर भी कई मामलों में इसका पालन नहीं किया जा रहा है। योग दिवस से लेकर विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए सरकारी निर्देशों के रूप में 'फतवा' जारी किया जा रहा है। वर्तमान सरकार पहले दिन से ही चरम तानाशाही और नए फासीवादी तरीके से काम कर रही है। इसके खिलाफ जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।

इस संवाददाता सम्मेलन में उनके अलावा पार्टी की राज्य कमेटी के सदस्य तरुण बनर्जी, सुदीप सेनगुप्ता सहित अन्य प्रमुख नेता उपस्थित थे।

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जनता की अदालत में जनता का इतिहास

प्रकाशित: 20 जून 2026 • 4 मिनट पठन

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