जिन लोगों ने भाजपा को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस को वोट देने की बात कही थी , वे ही चुनाव जीतकर पिछले दरवाजे से एनसीपीआई (NCPI) नाम से पार्टी बनाकर भाजपा में शामिल हो गए हैं।
जन समाचार मंच
जिन लोगों ने भाजपा को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस को वोट देने की बात कही थी , वे ही चुनाव जीतकर पिछले दरवाजे से एनसीपीआई (NCPI) नाम से पार्टी बनाकर भाजपा में शामिल हो गए हैं।

शासन में सलीम की विशाल जनसभा
तृणमूल कांग्रेस ने जिस तरह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया था, भाजपा भी उसी रास्ते पर चलकर लोकतांत्रिक अधिकारों को रोकना चाहती है। शनिवार को बारसात ब्लॉक २ के शासन थाना अंतर्गत कृष्णमाटी गाँव में आयोजित एक विशाल जनसभा में माकपा (सीपीआईएम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। इस अवसर पर मोहम्मद सलीम ने कहा कि सिर्फ गोलाबाड़ी या कृष्णमाटी गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में लाल झंडे की रैलियां और सभाएं हो रही हैं। इस इलाके में भयंकर आतंक था, उसी के बीच २०२३ के पंचायत चुनाव से पहले इलाके में रैली निकाली गई थी। रैली के अंत में सभा करने की अनुमति नहीं दी गई थी। आज भी जनसभा से पहले जब एक विशाल रैली कई गांवों से होकर गुजर रही थी, तो उसे विभिन्न स्थानों पर रोकने का प्रयास किया गया। इस घटना की तीखी आलोचना करते हुए सलीम ने कहा कि उस समय तृणमूल ने सिविक पुलिस के जरिए सभा स्थल को घेर लिया था। तब तृणमूल के दीवार लेखनपर लिखा था 'भयंकर खेला होबे'। तत्कालीन सत्तारूढ़ दल ने पुलिस का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लिया था। अब भाजपा भी इस इलाके में उसी तरह का अन्याय करना चाहती है। उन्होंने भी जनसभा में आ रही रैली को रोकने की कोशिश की। अतीत में तृणमूल कांग्रेस की चोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने पर वामपंथियों पर हमले किए गए थे।
आज मोहम्मद सलीम ने कहा, जिन लोगों ने भाजपा को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस को वोट देने की बात कही थी , वे ही चुनाव जीतकर पिछले दरवाजे से एनसीपीआई (NCPI) नाम से पार्टी बनाकर भाजपा में शामिल हो गए हैं। और राज्य में 'नव तृणमूल' (नई तृणमूल) बनकर, एक प्रायोजित विपक्षी दल का तमगा लेकर विधानसभा में बैठ रहे हैं। राज्य के लोगों ने तृणमूल कांग्रेस से त्रस्त होकर ही भाजपा को वोट दिया था। और चुनाव जीतते ही राज्य की भाजपा सरकार ने अन्नपूर्णा योजना से महिलाओं की बड़े पैमाने पर छंटनी कर दी है। उन्होंने ही पेंशन और आयुष्मान भारत में पंजीकरण को लेकर समस्याएं खड़ी की हैं। यहाँ तक कि स्मार्ट मीटर लगाने की कुचेष्टा भी चल रही है। चुनाव खत्म होते ही मोदी सरकार ने पेट्रोल और गैस के दाम बढ़ा दिए हैं। इससे गरीब और कामकाजी लोग अपने जीवन के अनुभव से भाजपा का असली चरित्र समझ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा में खड़े होकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नदी का कटाव, हाकरों को हटाना और बस्तियों को उजाड़ने जैसे मुद्दों को सीपीआई(एम) के विधायक मुस्ताफ़िज़ुर रहमान उठा रहे हैं। गरीब और कामकाजी लोगों की तमाम समस्याओं को विधानसभा में उठाने के लिए लाल झंडे के प्रतिनिधि प्रतिबद्ध हैं।
आज शासन थाने के कृष्णमाटी गांव में सीपीआई(एम) बारसात दक्षिण १ और २ एरिया कमेटी द्वारा बुलाई गई यह जनसभा भारी भीड़ से खचाखच भरी थी। लंबे समय से आतंक से प्रभावित ७ ग्राम पंचायतों से कई जुलूस इस जनसभा में शामिल हुए। वाम मोर्चा के शासनकाल के लोकतंत्र को वापस लाने की मांग को लेकर आज शासन क्षेत्र के थोकरा, दादपुर, बादासानबेरिया, खड़ीबाड़ी, कलूपाड़ा और खामार नौबत से लोग लाल झंडा लेकर जुलूस में पहुंचे। हालांकि, आज खामारपाड़ा में जनसभा में आ रही रैली को भाजपा कार्यकर्ताओं ने रोकने की कोशिश की। आज बीडीओ कार्यालय के सामने से शुरू हुई रैली में सीपीआई(एम) के उत्तर २४ परगना जिला सचिव पलाश दास शामिल थे। आज की सभा में मोहम्मद सलीम के अलावा पलाश दास, अधिवक्ता फिरदौस शमीम, अहमद अली खान, महिला नेत्री सोमा दास, इम्तियाज हुसैन और सलाउद्दीन ने भी अपने विचार रखे। जनसभा की अध्यक्षता कुतुबुद्दीन अहमद ने की।
सलीम ने कहा, क्या ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की लूट, चोरी और डकैती के बारे में कुछ नहीं जानती थीं? उस पार्टी की कोई विचारधारा नहीं थी। कुछ अपराधियों, माफियाओं और गुंडों को मिलाकर एक सरकार बनाई गई थी। लूट और चोरी की आड़ में बम, गोलियां और बम बनाने की फैक्ट्रियां चल रही थीं।
आज पलाश दास ने कहा कि शासन में सीपीआई(एम) को खत्म करने के लिए कार्यकर्ताओं पर अमानवीय अत्याचार किए गए। जमीनें और मछलियों के तालाब (भेड़ी) लूटे गए। झूठे मुकदमों में जेल भेजा गया। गांव में रहने के बदले जबरन जुर्माना वसूला गया। २०१३ में जनवादी महिला समिति की नेत्रियां शासन आई थी।
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 28 जून 2026 • 4 मिनट पठन

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गाली से भी बदतर हैं/
उन्हें शिकायत है/
कि लड़कियां/
गाली दे रही हैं।
दरअसल/
लड़कियां/
वह सब कुछ/
सूद समेत लौटा रही हैं।
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