"अगर आम लोग और वामपंथी कार्यकर्ता सड़कों पर न उतरते, तो पुलिस टस से मस न होती। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के अपराधों को छिपाने की जो संस्कृति तृणमूल-कांग्रेस ने बनाई थी, भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है।"
जन समाचार मंच
"अगर आम लोग और वामपंथी कार्यकर्ता सड़कों पर न उतरते, तो पुलिस टस से मस न होती। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के अपराधों को छिपाने की जो संस्कृति तृणमूल-कांग्रेस ने बनाई थी, भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है।"

कोलकाता 6 जुलाई: 'डर आउट, भरोसा इन'— इसी नारे को सामने रखकर नई भाजपा सरकार सत्ता में आई थी। लेकिन बारुईपुर में एक नाबालिग से बलात्कार और हत्या की घटना को लेकर इस वादे की हकीकत पर समाज के प्रबुद्ध लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कथनी और करनी में भारी अंतर है। हकीकत में 'डर इन, भरोसा आउट' का माहौल बन गया है।
बारुईपुर के सूर्यपुर में स्कूल में पढ़ने वाली एक नाबालिग के अपहरण, सामूहिक बलात्कार, हत्या और शव को बोरे में बंद कर तालाब में फेंक देने के आरोप को लेकर इलाके में तनाव फैल गया है। आरोप की सुई कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की तरफ है। घटना के बाद रविवार को आक्रोशित स्थानीय निवासियों के विरोध-प्रदर्शन से इलाका गरमा गया।
इस घटना के चलते नागरिक समाज में महिला सुरक्षा और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षाविद प्रोफेसर पवित्र सरकार ने कहा, "बलात्कारी का कोई दल, मत या रंग नहीं होता। नई सरकार भी अगर पिछली सरकार की गलतियों को दोहराएगी, तो वह भी जनता का विश्वास तेजी से खो देगी। पार्क स्ट्रीट, कामदुनी या आर जी कर जैसी घटनाओं में जिस तरह न्याय पर सवाल उठे थे, इस बार भी लोग देखेंगे कि अपराधियों को सच में सजा मिलती है या नहीं।"
भारी जनआक्रोश के आगे झुकते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। उनमें से दो को अदालत ने 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया है। प्रोफेसर नंदिनी मुखर्जी ने कहा "अगर आम लोग और वामपंथी कार्यकर्ता सड़कों पर न उतरते, तो पुलिस टस से मस न होती। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के अपराधों को छिपाने की जो संस्कृति तृणमूल-कांग्रेस ने बनाई थी, भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है।"
हालांकि, मुख्य आरोपी शांतनु मंडल अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस का दावा है कि वह फरार है।
नाटककार चंदन सेन ने कहा, "'डर आउट, भरोसा इन' अब वास्तव में 'डर इन, भरोसा आउट' में बदल गया है। अगर शुरुआत में ही प्रशासनिक कमियों को नहीं सुधारा गया, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाएगी।"
'अभया आंदोलन' का कहना है, "सरकार अभया को न्याय दिलाने का वादा करके सत्ता में आई थी। लेकिन उस वादे को लागू नहीं किया गया, बल्कि लोग उसका नतीजा भुगत रहे हैं।" सोमवार को अभया मंच ने अपराधियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग करते हुए एक बयान भी जारी किया है।
अभिनेता देवदूत घोष ने कहा, "कामदुनी की घटना के बाद इतने साल बीत जाने पर भी बारुईपुर में इसी तरह की क्रूरता की पुनरावृत्ति देखने को मिल रही है। इस तरह की घटनाओं की निंदा करने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं।"
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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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