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दायरा बढ़ाकर ही ज्योति बसु के बंगाल की रक्षा करनी होगी

अपराजिता•09 जुलाई 20263 मिनट पठन16 बार पढ़ा गया

ज्योति बसु ने ब्रिटिश शासन के समय से लेकर देश के विभाजन, दंगों और कई ऐतिहासिक व जटिल परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया। एक प्रशासक के रूप में कड़े फैसले लेते समय भी उन्हें कभी डराने-धमकाने या चिल्लाने की जरूरत नहीं पड़ी। सिख विरोधी दंगों या बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भड़के दंगों को दबाने और कानून का शासन स्थापित करने में उन्होंने हमेशा अटूट निरंतरता दिखाई। उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राजनीतिक बंदियों को रिहा किया और बेहद कम समय में पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का काम किया। शरणार्थियों के पुनर्वास और सत्ता के विकेंद्रीकरण के जरिए स्थानीय स्वशासन व्यवस्था (पंचायती राज) कायम कर उन्होंने देश के सामने लोकतंत्र का एक अनूठा उदाहरण पेश किया था।

मोहम्मद सलीम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज इन सभी उपलब्धियों पर हमले हो रहे हैं। 'डबल इंजन सरकार' की बात कहकर ज्योति बसु के त्रिस्तरीय शासन के बुनियादी ढांचे पर ही प्रहार किया जा रहा है। वक्ताओं ने वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज बुल्डोजर चलाकर हाकरों को उजाड़ा जा रहा है, समाज में सांप्रदायिक नफरत फैलाई जा रही है और 'उचित पहचान' के नाम पर लोगों के संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव

दायरा बढ़ाकर ही ज्योति बसु के बंगाल की रक्षा करनी होगी

दायरा बढ़ाकर ही ज्योति बसु के बंगाल की रक्षा करनी होगी

ज्योति बसु के जन्मदिवस पर नेताओं का आह्वान

लोकतंत्र के विस्तार में जननेता ज्योति बसु के योगदान से सीख लेकर आज के दौर में नए फासीवादियों के हाथों से लोकतंत्र की रक्षा करने का संकल्प बुधवार 8 जुलाई को न्यूटाउन में 'ज्योति बसु समाज चर्चा और अनुसंधान केंद्र' के एक कार्यक्रम में लिया गया। इस दिन ज्योति बसु के 113 वें जन्मदिन के अवसर पर ज्योति बसु नगर (न्यू टाउन) स्थित इस केंद्र के भवन में पहले चरण में नवनिर्मित आर्काइव (अभिलेखागार), गैलरी और म्यूजियम (संग्रहालय) का उद्घाटन प्रख्यात विचारक शमीक बंद्योपाध्याय ने किया।

इस अवसर पर "कामरेड ज्योति और आज की परिस्थिति में कर्तव्य" विषय पर आयोजित आयोजित सेमिनार में शमीक बंद्योपाध्याय, मोहम्मद सलीम, सूर्यकांत मिश्रा, और प्रोफेसर संचिता सान्याल ने भाषण दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिमान बसु ने की।

"कॉमरेड ज्योति बसु और वर्तमान परिस्थिति में हमारा कर्तव्य" विषय पर चर्चा करते हुए माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि ज्योति बसु ने ब्रिटिश शासन के समय से लेकर देश के विभाजन, दंगों और कई ऐतिहासिक व जटिल परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया। एक प्रशासक के रूप में कड़े फैसले लेते समय भी उन्हें कभी डराने-धमकाने या चिल्लाने की जरूरत नहीं पड़ी। सिख विरोधी दंगों या बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भड़के दंगों को दबाने और कानून का शासन स्थापित करने में उन्होंने हमेशा अटूट निरंतरता दिखाई। उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राजनीतिक बंदियों को रिहा किया और बेहद कम समय में पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का काम किया। शरणार्थियों के पुनर्वास और सत्ता के विकेंद्रीकरण के जरिए स्थानीय स्वशासन व्यवस्था (पंचायती राज) कायम कर उन्होंने देश के सामने लोकतंत्र का एक अनूठा उदाहरण पेश किया था।

मोहम्मद सलीम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज इन सभी उपलब्धियों पर हमले हो रहे हैं। 'डबल इंजन सरकार' की बात कहकर ज्योति बसु के त्रिस्तरीय शासन के बुनियादी ढांचे पर ही प्रहार किया जा रहा है। वक्ताओं ने वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज बुल्डोजर चलाकर हाकरों को उजाड़ा जा रहा है, समाज में सांप्रदायिक नफरत फैलाई जा रही है और 'उचित पहचान' के नाम पर लोगों के संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं।

सूर्यकांत मिश्रा ने कहा कि ज्योति बसु हमेशा याद दिलाते थे कि 'जनता ही इतिहास रचती है'। इस फासीवादी माहौल का मुकाबला करने के लिए हमें वामपंथ के दायरे को बढ़ाकर उन लोगों तक भी पहुँचना होगा जो फिलहाल तृणमूल या भाजपा के समर्थक हैं।

बिमान बसु ने याद दिलाया कि ज्योति बसु अक्सर कहते थे कि तृणमूल कांग्रेस का सबसे बड़ा अपराध यह है कि वे इस राज्य में भाजपा को लेकर आए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ज्योति बसु ने भारतीय संघीय ढांचे में राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा राष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद की थी।

केंद्र के भवन में स्थापित आर्काइव और म्यूजियम के महत्व पर बात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह केंद्र इतिहास के साथ होने वाली छेड़छाड़ को रोकने और समाज में सही व प्रामाणिक तथ्यों को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रहेगा। यहाँ ज्योति बसु के पत्र, लेख और दुर्लभ दस्तावेज संरक्षित किए गए हैं।

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साभार :बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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दायरा बढ़ाकर ही ज्योति बसु के बंगाल की रक्षा करनी होगी

प्रकाशित: 09 जुलाई 2026 • 3 मिनट पठन

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