कानून के दुरुपयोग से अपराध
बंद नहीं होता:मोहम्मद सलीम
बारुईपुर में एनकाउंटर के नाम पर जो हुआ है, उसमें न्याय नहीं हुआ। बुधवार को यह टिप्पणी करते हुए माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा सरकार गुंडा दमन कानून के नाम पर कड़ा कानून बना रही है। कानून का सही प्रयोग जरूरी है, कानून के दुरुपयोग से अपराध बंद नहीं होता। यह सरकार खुद ही गैरकानूनी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस एनकाउंटर की धमकी दिलीप घोष ने चुनाव से पहले ही दे दी थी—'पश्चिम बंगाल योगीराज बनेगा'। हमारा सवाल है, क्या उत्तर प्रदेश में अपराध कम हुआ है? याद रखना होगा कि बगटुई कांड में सीबीआई की हिरासत में मुख्य गवाह की हत्या हुई थी। बारुईपुर में एनकाउंटर हुआ। पक्षपाती पुलिस की पेशेवर भूमिका कहाँ है?
इस दिन मध्य कोलकाता के कोलिन स्ट्रीट पर माकपा भवानीपुर एरिया कमेटी-1 द्वारा आयोजित एक जनसभा में मोहम्मद सलीम ने भाषण दिया। इसके अलावा माकपा केंद्रीय समिति की सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी, माकपा नेता डॉ. फुआद हलीम, सौम्यजीत रजक, राजेंद्र प्रसाद आदि ने भी भाषण दिया। अध्यक्षता सिराज खान ने की।
सभा में मोहम्मद सलीम ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से राज्य के लोग तृणमूल कांग्रेस के कुशासन में थे। दरअसल, यह दल जिन लोगों से पैदा हुआ था, उन्हीं के साथ मिल रहा है। भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के सांसदों पर अपना ठप्पा लगा दिया। इस भाजपा सरकार ने आकर पूरे राज्य में डर का माहौल पैदा करने की कोशिश की है। वे गरीब लोगों पर बुलडोजर चला रहे हैं। तब वे हिंदू-मुस्लिम में कोई फर्क नहीं देख रहे हैं। हमारा कहना है कि सभी लोगों को एकजुट होकर लाल झंडे की ताकत को और बढ़ाना होगा, संविधान की रक्षा करनी होगी।

मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि सिर्फ बलात्कार या मॉब लिंचिंग ही नहीं, राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद पिछले 2 महीनों में 19 गंभीर अपराध की घटनाएं घटी हैं। पुलिस खुद यह बात बता रही है। यानी सरकार तो बदली लेकिन क्राइम या अपराध जस का तस रहा। पिछले 15 वर्षों में लोकतंत्र रसातल में पहुंच गया है। और भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है। जननेता ज्योति बसु ने ठीक ही कहा था कि सरकार चाहे तो दंगा नहीं होता।

उन्होंने कहा कि वाम मोर्चा के शासनकाल में गरीब लोगों को जमीन का पट्टा दिया गया था। और भाजपा सरकार जमीन से बेदखल कर रही है। हिंदू, मुसलमान, दलित—सभी की स्थिति एक जैसी है। एसआईआर (SIR) के नाम पर इतने वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। क्या यह संविधान का सम्मान करना हुआ? दरअसल, आए दिन नए-नए कानून लागू करके एक भयानक खेल खेला जा रहा है। आम लोगों को अपनी बात कहने नहीं दी जा रही है। एसआईआर-नागरिकता, गुंडा दमन कानून के नाम पर डराया जा रहा है। केवल लाल झंडा ही शुरू से गरीब लोगों के साथ रहा है और रहेगा। सभी को और अधिक एकजुट होना होगा।
डॉ. फुआद हलीम ने अपने भाषण में स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू और मुसलमान एक होकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े थे। कम्युनिस्ट लड़े थे। वहां आरएसएस-भाजपा की कोई भूमिका नहीं थी। उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेते नहीं देखा गया। इसके विपरीत, वे अब इतिहास को विकृत कर रहे हैं। आम लोगों के हक छीन रहे हैं, रोजी-रोटी छीन रहे हैं। इस तानाशाही के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा करने के लिए सभी को एकजुट होकर लाल झंडा और मजबूती से हाथ में थामना होगा।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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