जंतर-मंतर पर जारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के आंदोलन को वामपंथ का मजबूत और एकजुट समर्थन मिला है। सीपीआई(एम) के पोलिट ब्यूरो सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर इस संघर्ष के प्रति अपनी गहरी एकजुटता (सॉलिडैरिटी) जताई। उनके साथ सांसद अमराराम भी मौजूद रहे। आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए वामपंथ के नेता मोहम्मद सलीम ने केंद्र की भाजपा सरकार की तानाशाही नीतियों और जनविरोधी रुख पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और देश के भविष्य को बचाने की इस लड़ाई में वामपंथ पूरी मजबूती के साथ प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है।
मोहम्मद सलीम की सॉलिडैरिटी: 'कॉकरोच' कार्यकर्ताओं के आंदोलन को मिला वामपंथ का खुला समर्थन।
यूएपीए के तहत गिरफ्तारी की आशंका।
नई दिल्ली, 13 जुलाई। लद्दाख के प्रमुख सुधारक और रेमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक के अनशन का सोमवार को 15वां दिन रहा। गिरते स्वास्थ्य और सरकार की बेरुखी के बीच, जंतर-मंतर पर जारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के इस आंदोलन को वामपंथ का मजबूत और एकजुट समर्थन मिला है। सीपीआई(एम) के पोलिट ब्यूरो सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर इस संघर्ष के प्रति अपनी गहरी एकजुटता (सॉलिडैरिटी) जताई। उनके साथ सांसद अमराराम भी मौजूद रहे। इसके अलावा, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (आप) का एक प्रतिनिधिमंडल भी प्रदर्शनस्थल पर पहुंचा।
मोहम्मद सलीम ने उठाई आवाज, वांगचुक की हालत बेहद नाजुक
आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए वामपंथी नेता मोहम्मद सलीम ने केंद्र की भाजपा सरकार की तानाशाही नीतियों और जनविरोधी रुख पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और देश के भविष्य को बचाने की इस लड़ाई में वामपंथ पूरी मजबूती के साथ प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है। इस बीच, पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। उनका वजन अब तक 8 किलो कम हो चुका है, ब्लड शुगर लेवल गिरकर 67 यूनिट पर पहुंच गया है और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) भी चिंताजनक रूप से अस्थिर है।
"इसे ईगो की लड़ाई न बनाए सरकार"
संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को सीजेपी ने 'संसद भवन मार्च' का आह्वान किया है। नीट (NEET) पेपर लीक घोटाले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पर यह आंदोलन केंद्रित है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर सरकार से अपील करते हुए लिखा:
"वांगचुक के आमरण अनशन का आज 16वां दिन है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इसे अपनी प्रतिष्ठा या ईगो की लड़ाई न बनाएं। अपनी गलती स्वीकार करना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता और जवाबदेही का लक्षण है। हम सिर्फ यही जवाबदेही मांग रहे हैं।"
यूएपीए और एनएसए का डर, पर झुकने को तैयार नहीं आंदोलनकारी
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने देश के नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी कर इस चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि जो व्यक्ति एक आलीशान जिंदगी जी सकता था, वह आज हमारे बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था के भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि 20 जुलाई का मार्च वांगचुक की जान बचाने का हमारा आखिरी प्रयास होगा। वहीं, संगठन के एक अन्य प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दमनकारी सरकारी कार्रवाई की आशंका जताते हुए कहा:
"आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुमकिन है कि 20 जुलाई के मार्च को रोकने के लिए सरकार हमें 'देशद्रोही' या 'शहरी नक्सल' (अर्बन नक्सल) घोषित कर दे और हमारे खिलाफ यूएपीए (UAPA) या एनएसए (NSA) जैसे काले कानून लगाकर हमें जेल में डाल दे। लेकिन हम यह कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं। सवाल यह है कि क्या देश की जनता सोती रहेगी या उठकर सरकार से जवाब मांगेगी?"
वामपंथी ताकतों के इस आंदोलन से जुड़ने के बाद अब 20 जुलाई के संसद मार्च पर पूरे देश की निगाहें टिक गई हैं।
स्रोत: बांग्ला दैनिक गणशक्ति । 14.07.2026
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