वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराष्ट्रीय

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राष्ट्रीय

मोहम्मद सलीम की सॉलिडैरिटी: 'कॉकरोच' कार्यकर्ताओं के आंदोलन को मिला वामपंथ का खुला समर्थन। यूएपीए के तहत गिरफ्तारी की आशंका

केशव कुमार भट्टड़•14 जुलाई 20263 मिनट पठन21 बार पढ़ा गया

जंतर-मंतर पर जारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के आंदोलन को वामपंथ का मजबूत और एकजुट समर्थन मिला है। सीपीआई(एम) के पोलिट ब्यूरो सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर इस संघर्ष के प्रति अपनी गहरी एकजुटता (सॉलिडैरिटी) जताई। उनके साथ सांसद अमराराम भी मौजूद रहे। आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए वामपंथ के नेता मोहम्मद सलीम ने केंद्र की भाजपा सरकार की तानाशाही नीतियों और जनविरोधी रुख पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और देश के भविष्य को बचाने की इस लड़ाई में वामपंथ पूरी मजबूती के साथ प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है।

मोहम्मद सलीम की सॉलिडैरिटी: 'कॉकरोच' कार्यकर्ताओं के आंदोलन को मिला वामपंथ का खुला समर्थन।  यूएपीए के तहत गिरफ्तारी की आशंका

मोहम्मद सलीम की सॉलिडैरिटी: 'कॉकरोच' कार्यकर्ताओं के आंदोलन को मिला वामपंथ का खुला समर्थन।

यूएपीए के तहत गिरफ्तारी की आशंका।

नई दिल्ली, 13 जुलाई। लद्दाख के प्रमुख सुधारक और रेमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक के अनशन का सोमवार को 15वां दिन रहा। गिरते स्वास्थ्य और सरकार की बेरुखी के बीच, जंतर-मंतर पर जारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के इस आंदोलन को वामपंथ का मजबूत और एकजुट समर्थन मिला है। सीपीआई(एम) के पोलिट ब्यूरो सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर इस संघर्ष के प्रति अपनी गहरी एकजुटता (सॉलिडैरिटी) जताई। उनके साथ सांसद अमराराम भी मौजूद रहे। इसके अलावा, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (आप) का एक प्रतिनिधिमंडल भी प्रदर्शनस्थल पर पहुंचा।

मोहम्मद सलीम ने उठाई आवाज, वांगचुक की हालत बेहद नाजुक

आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए वामपंथी नेता मोहम्मद सलीम ने केंद्र की भाजपा सरकार की तानाशाही नीतियों और जनविरोधी रुख पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और देश के भविष्य को बचाने की इस लड़ाई में वामपंथ पूरी मजबूती के साथ प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है। इस बीच, पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। उनका वजन अब तक 8 किलो कम हो चुका है, ब्लड शुगर लेवल गिरकर 67 यूनिट पर पहुंच गया है और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) भी चिंताजनक रूप से अस्थिर है।

"इसे ईगो की लड़ाई न बनाए सरकार"

संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को सीजेपी ने 'संसद भवन मार्च' का आह्वान किया है। नीट (NEET) पेपर लीक घोटाले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पर यह आंदोलन केंद्रित है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर सरकार से अपील करते हुए लिखा:

"वांगचुक के आमरण अनशन का आज 16वां दिन है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इसे अपनी प्रतिष्ठा या ईगो की लड़ाई न बनाएं। अपनी गलती स्वीकार करना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता और जवाबदेही का लक्षण है। हम सिर्फ यही जवाबदेही मांग रहे हैं।"

यूएपीए और एनएसए का डर, पर झुकने को तैयार नहीं आंदोलनकारी

सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने देश के नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी कर इस चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि जो व्यक्ति एक आलीशान जिंदगी जी सकता था, वह आज हमारे बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था के भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि 20 जुलाई का मार्च वांगचुक की जान बचाने का हमारा आखिरी प्रयास होगा। वहीं, संगठन के एक अन्य प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दमनकारी सरकारी कार्रवाई की आशंका जताते हुए कहा:

"आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुमकिन है कि 20 जुलाई के मार्च को रोकने के लिए सरकार हमें 'देशद्रोही' या 'शहरी नक्सल' (अर्बन नक्सल) घोषित कर दे और हमारे खिलाफ यूएपीए (UAPA) या एनएसए (NSA) जैसे काले कानून लगाकर हमें जेल में डाल दे। लेकिन हम यह कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं। सवाल यह है कि क्या देश की जनता सोती रहेगी या उठकर सरकार से जवाब मांगेगी?"


वामपंथी ताकतों के इस आंदोलन से जुड़ने के बाद अब 20 जुलाई के संसद मार्च पर पूरे देश की निगाहें टिक गई हैं।


स्रोत: बांग्ला दैनिक गणशक्ति । 14.07.2026

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

मोहम्मद सलीम की सॉलिडैरिटी: 'कॉकरोच' कार्यकर्ताओं के आंदोलन को मिला वामपंथ का खुला समर्थन। यूएपीए के तहत गिरफ्तारी की आशंका

प्रकाशित: 14 जुलाई 2026 • 3 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
विश्लेषण

भारत के बारे में लेनिन ~ बुद्धदेव भट्टाचार्य

"गुलाम भारत की मुक्ति और एशियाई जन-एकता को दिशा देने वाला लेनिन का क्रांतिकारी दृष्टिकोण।" - लेखक बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा बांग्ला में प्रस्तुत यह मूल-आलेख एक तारीखवार ऐतिहासिक-वैचारिक अध्ययन है, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं औपनिवेशिक मुक्ति-संग्राम के प्रति लेनिन की गहरी विश्लेषणात्मक दृष्टि को रेखांकित करता है। अध्ययन 1900 से 1923 के मध्य रचित लेनिन के निबंधों, पत्रों, नोट्स और भाषणों के आधार पर यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण, दमनकारी नीतियों और बॉम्बे के मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी चेतना का गहन मूल्यांकन किया था। लेनिन ने औपनिवेशिक राष्ट्रवाद के मूल लोकतांत्रिक स्वरूप को पहचानते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक सर्वहारा क्रांति और एशियाई जन-एकता से जोड़ा। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के मंच से मानबेंद्रनाथ रॉय के संकीर्णतावादी सिद्धांतों को संशोधित कर लेनिन ने भारतीय कम्युनिस्टों को व्यापक साम्राज्यवादी-विरोधी मंचों में भागीदारी और किसान-मजदूर आंदोलनों को संगठित करने की रणनीतिक दिशा प्रदान की। अंततः, यह आलेख स्थापित करता है कि लेनिन के अनुसार रूस, भारत, चीन आदि देशों का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का मालिक होना ही संघर्ष के परिणाम को तय करेगा।

कुछ मिनट पहले

राष्ट्रीय

'ज्ञानेश' हटाओ, 'एसआईआर' रोको ~ एम ए बेबी

"वोट के अधिकार पर हमला बंद करो, लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बहाल करो!" मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालों और मतदाता सूचियों से नाम छांटने की मनमानी के बीच देश में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। 'इंडियन एक्सप्रेस' के सनसनीखेज खुलासे के बाद सीपीआई (एम) ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग को लेकर देशव्यापी जन-आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

11 अक्टूबर 2026

विश्लेषण

क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?

10 अक्टूबर की सुबह सड़कों का मंजर लोकतंत्र की नहीं, बल्कि एक सीलबंद सैन्य क्षेत्र की गवाही दे रहा था। जब एक सरकार अपने ही नागरिकों को रोकने और घेरने के लिए इतने व्यापक स्तर पर युद्ध जैसी तैयारियाँ करती है, तो स्वयं से यह सवाल पूछना ही होगा - आखिर सरकार किस चीज को दबाने और रोकने की कोशिश कर रही है?

10 अक्टूबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राष्ट्रीय

प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।

केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

राष्ट्रीय

नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।

केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

राष्ट्रीय

'पहाड़' पर 'दिल्ली' का ताला: स्वायत्तता छीनने पर गरजे मोहम्मद सलीम!

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं?! अफसरों के दम पर स्वायत्तता का नाटक बंद करो!" स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!" - दार्जिलिंग के कलामंदिर हॉल में आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार स्वायत्त निकाय जीटीए (GTA) में प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के बजाय प्रशासक बिठाकर लोकतंत्र और पहाड़ के अधिकारों का हनन कर रही है। कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक क्षेत्रीय स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश का दावा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा न तो बहुलतावाद को मानती है और न ही विविधता का सम्मान करती है। पार्टी ने घोषणा की कि वे संविधान की छठी अनुसूची, भूमि अधिकार, चाय बागान श्रमिकों की बदहाली, पर्यावरण विनाश और नागरिकता के नाम पर हो रहे भेदभाव के मुद्दों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में पहाड़ की जनता के बीच एक व्यापक जन-अभियान चलाएंगे।

केशव कुमार भट्टड़ • 14 सितंबर 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement