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विपक्षी एकजुटता का आह्वान। मतभेद छोड़ें, वरना फासीवादी एजेंडे की भेंट चढ़ेगा देश - सी पी आई (एम ) के महासचिव एम. ए. बेबी

केशव कुमार भट्टड़•15 जुलाई 20267 मिनट पठन45 बार पढ़ा गया

नई दिल्ली में संपन्न हुई सीपीआई(एम) की केंद्रीय कमेटी की बैठक में चुनावी नतीजों की गंभीर समीक्षा करते हुए सांगठनिक कमियों को सुधारने का संकल्प लिया गया। सी पी आई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने 'इंडिया' गठबंधन के दलों से अपने आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर कॉर्पोरेट-परस्त और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जनसांख्यिकी समिति के गठन को अल्पसंख्यकों के खिलाफ नाजी जर्मनी जैसा फासीवादी कदम बताते हुए इसकी तीखी निंदा की। इसके साथ ही सी पी आई (एम) ने नीट घोटाले के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन, सोनम वांगचुक के अनशन और 10 अगस्त के देशव्यापी 'जेल भरो' आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने का एलान किया है।

विपक्षी एकजुटता का आह्वान।  मतभेद छोड़ें, वरना फासीवादी एजेंडे की भेंट चढ़ेगा देश - सी पी आई (एम ) के महासचिव एम. ए. बेबी

विपक्षी एकजुटता का आह्वान
मतभेद छोड़ें, वरना फासीवादी एजेंडे की भेंट चढ़ेगा देश - एम. ए. बेबी [सी पी आई (एम)के महासचिव]

"अगर आज भी विपक्ष आंतरिक मतभेदों की उलझन में उलझा रहा, तो इतिहास देश को फासीवाद की गिरफ्त में धकेलने की इस ढील को कभी माफ नहीं करेगा।"

  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) की केंद्रीय कमेटी की बैठक संपन्न, चुनावी नतीजों और राजनीतिक-आर्थिक संकट पर गहन आत्ममंथन

  • केरल में हार और बंगाल में भाजपा के उभार को पार्टी ने माना बड़ा झटका; सांगठनिक कमियों को सुधारने का संकल्प

  • जनसंख्या निगरानी समिति को नाजी जर्मनी के 'नूरेमबर्ग कानूनों' जैसा बताया, नीट घोटाले और सोनम वांगचुक के अनशन पर मोदी सरकार को घेरा

नई दिल्ली, 14 जुलाई। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) के पोलिट ब्यूरो सदस्य और वरिष्ठ नेता एम. ए. बेबी ने तीन दिवसीय केंद्रीय कमेटी की बैठक के समापन के बाद मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। दिल्ली के हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में 11 से 13 जुलाई तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में हालिया चुनावी नतीजों की समीक्षा, देश की राजनीतिक-आर्थिक स्थिति का विश्लेषण और आगामी जन-आंदोलनों की रूपरेखा तय की गई।

चुनावी नतीजों की आत्मसमीक्षा: सांगठनिक कमियों को दूर करेगी पार्टी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सी पी आई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने बताया कि केंद्रीय कमेटी ने विभिन्न राज्यों के चुनावी नतीजों की बारीकी से समीक्षा की है। राज्य कमिटियों द्वारा सौंपी गई रिपोर्टों के आधार पर पार्टी की सफलताओं और विफलताओं दोनों का आकलन किया गया है। उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि चुनावी अभियान की रणनीतिक कमियों और उम्मीदवारों के चयन में कुछ त्रुटियां रही हैं, जिन्हें चिह्नित कर लिया गया है। सी पी आई (एम)के महासचिव एम. ए. बेबी ने कहा कि केरल में एक दशक तक वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) की सरकार रहने के बाद मिली हार और पश्चिम बंगाल में इतिहास में पहली बार भाजपा का सत्ता में आना निश्चित रूप से पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। इस संकट से उबरने और अधिक मजबूती से वापसी करने के लिए पार्टी आवश्यक राजनीतिक व सांगठनिक निर्णय लेगी। इस समीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अगस्त के आखिरी हफ्ते में पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी और सितंबर के मध्य में केरल राज्य कमेटी की विशेष बैठकें बुलाई गई हैं।

'इंडिया' गठबंधन में एकजुटता की अपील, साझा नीति न बन पाने पर चिंता

देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति का जिक्र करते हुए सी पी आई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के घटक दलों के बीच अधिक मजबूत एकता का आह्वान किया। उन्होंने आगाह किया:

"जिस तरह भाजपा देश भर में अपना राजनीतिक प्रभाव और जाल फैला रही है, उसे रोकने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों को अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होना होगा। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी दल अभी तक एक साझा राजनीतिक रुख अपनाने में विफल रहे हैं और देश के व्यापक जनहित के बजाय अपने आंतरिक मतभेदों को तरजीह दे रहे हैं।" उन्होंने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे तमाम बाधाओं और राजनीतिक जटिलताओं को पार करते हुए 'इंडिया' मंच को मजबूत करने में अपनी जिम्मेदार भूमिका निभाएं।

जब पत्रकारों ने उनसे 'इंडिया' गठबंधन के नेता के रूप में राहुल गांधी को स्वीकार करने को लेकर सवाल पूछा, तो एम. ए. बेबी ने स्पष्ट किया कि गठबंधन में आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई पद नहीं है। राहुल गांधी गठबंधन के सबसे बड़े दल के नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे को 'इंडिया' का चेयरमैन चुना गया है। उन्होंने तंज कसते हुए जोड़ा कि विपक्ष के इस गठबंधन को आगे ले जाने के लिए और अधिक राजनीतिक परिपक्वता की आवश्यकता है, जिसकी कमी अभी भी कुछ दलों और नेताओं में दिखती है।

आर्थिक मंदी, खाद्य सुरक्षा और कॉरपोरेटपरस्ती पर तीखा हमला

देश की चरमराती आर्थिक स्थिति पर केंद्रीय कमेटी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जून बुलेटिन का हवाला देते हुए सी पी आई (एम)के महासचिव एम. ए. बेबी ने बताया कि देश की जीडीपी (GDP) वृद्धि का अनुमान घटकर 6.6 प्रतिशत से नीचे चला गया है। इसके ऊपर से अनियमित मानसून और सूखे की स्थिति देश के आर्थिक संकट को और भयावह बना देगी। उन्होंने राज्य सरकारों और विपक्षी दलों से बिना किसी चर्चा के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में संशोधन करने के मोदी सरकार के फैसले की तीखी आलोचना की। बेबी ने कहा कि पूरी तरह से कॉरपोरेट घरानों के हितों को साधने के लिए लाए गए केंद्र के इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्य बुरी तरह प्रभावित होंगे।

जनसांख्यिकी समिति को बताया नाजी जर्मनी का 'नूरेमबर्ग कानून'

जनसंख्या में बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) की निगरानी के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च स्तरीय समिति के गठन के फैसले को एम. ए . बेबी ने 'बेहद खतरनाक' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समिति में कोई वास्तविक विशेषज्ञ नहीं है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इसका इस्तेमाल अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए करने की साजिश रच रहा है। इस कदम की तुलना नाजी जर्मनी के कुख्यात "नूरेमबर्ग कानूनों" से करते हुए उन्होंने इसे भाजपा की नई फासीवादी मानसिकता का प्रतीक बताया।

इसके अलावा, उन्होंने नागरिकता संशोधन (CAA) और मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग तथा गुजरात में उग्रवाद-विरोधी 'एसओपी' (SOP) की आड़ में की जा रही सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को रेखांकित करते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।

केरल में कांग्रेस की 'नर्म हिंदुत्व' नीति की आलोचना

केरल की राजनीति पर बात करते हुए सी पी आई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने वहां विपक्ष में बैठी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) की 'नर्म हिंदुत्व' की नीति की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालयों में आरएसएस समर्थित कुलपतियों (वीसी) की नियुक्ति के खिलाफ केरल की कांग्रेस कोई ठोस प्रतिरोध खड़ा नहीं कर सकी। इसके साथ ही उन्होंने विझिंजम बंदरगाह परियोजना के शेयरों के हस्तांतरण के मामले में भी राज्य सरकार (यूडीएफ की पूर्ववर्ती नीतियों) की भूमिका पर सवाल उठाए।

छात्रों और सोनम वांगचुक के आंदोलन को वामपंथ का पूर्ण समर्थन

नीट (NEET) परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों का सीपीआई(एम) ने खुलकर समर्थन किया है। आगामी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन छात्रों द्वारा बुलाए गए संसद मार्च को पार्टी ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है। सी पी आई (एम)के महासचिव एम.ए.बेबी ने बताया कि सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों के संसदीय नेता आपस में बैठक करेंगे और रणनीति बनाएंगे कि संसद के दोनों सदनों में नीट घोटाले और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को कैसे पुरजोर तरीके से उठाया जाए। इसके साथ ही, जंतर-मंतर पर 17 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर केंद्रीय कमेटी ने गहरी चिंता जताई। आंदोलनकारियों की जायज मांगों को पूरा करने में केंद्र की टालमटोल की नीति को उन्होंने मोदी सरकार के 'तानाशाही और छात्र-जनविरोधी' चरित्र का प्रमाण बताया।

आगामी संघर्ष: 'जेल भरो' आंदोलन और जन-अभियान का एलान

आने वाले दिनों में सीपीआई(एम) ने चुनावी सुधारों, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को तुरंत प्रभावी ढंग से लागू करने और अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ देशव्यापी राजनीतिक प्रचार अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा बुलाए गए देशव्यापी आंदोलन तथा आगामी 10 अगस्त के 'जेल भरो' कार्यक्रम को भी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) अपना पूरा समर्थन देगी।


साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति। 15 जुलाई 2026

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विपक्षी एकजुटता का आह्वान। मतभेद छोड़ें, वरना फासीवादी एजेंडे की भेंट चढ़ेगा देश - सी पी आई (एम ) के महासचिव एम. ए. बेबी

प्रकाशित: 15 जुलाई 2026 • 7 मिनट पठन

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