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मौत से जूझते शिक्षाविद सोनम वांगचुक और सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन घोटाला

केशव कुमार भट्टड़•16 जुलाई 20265 मिनट पठन55 बार पढ़ा गया

पेपर लीक से लेकर डिजिटल हेराफेरी तक... जब छात्र-युवाओं के भविष्य को कॉरपोरेट मंडियों में बेचा जा रहा है, तब जंतर-मंतर पर दम तोड़ती लोकतांत्रिक आवाज़ों के प्रति मोदी सरकार का यह मौन आपराधिक है!

पूंजीपरस्त सत्ता की क्रूरता: एक तरफ मौत से जूझते शिक्षाविद सोनम वांगचुक, दूसरी तरफ डिजिटल मूल्यांकन घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार!

यह रिपोर्ट देश के शिक्षा तंत्र में व्याप्त गहरी सड़न और उसके खिलाफ उठ रही आंदोलित आवाज़ों के प्रति मोदी सरकार की संवेदनहीनता को रेखांकित करती है:

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन: राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (NEET) घोटाले, NET परीक्षा की धांधली और सीबीएसई में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ शिक्षाविद् सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है (वजन 9 किलो कम होकर 57.15 किलो बचा है), लेकिन केंद्र सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है। देश के बुद्धिजीवियों ने उनकी तुलना दिवंगत पर्यावरणविद् गुरुदास अग्रवाल से करते हुए उनकी जान को खतरा बताया है।

अदालती हस्तक्षेप: दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक की जान बचाने की याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर तुरंत जवाब मांगा है।

संसद मार्च का ऐलान: दमनकारी यूएपीए जैसी धाराओं के डर को दरकिनार कर 'कॉकरोच जनता पार्टी'और सीपीआई(एम) सहित प्रमुख वाम-जनतांत्रिक ताकतों ने आगामी सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'संसद भवन अभियान' (संसद मार्च) का बिगुल फूंक दिया है।

सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन घोटाला: इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन (OSM) में पाई गई गंभीर विसंगतियों पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था ने देश के छात्र-छात्राओं में 'भयानक हताशा और आक्रोश' पैदा कर दिया है, जो किसी एक अंक की गलती नहीं बल्कि पूरे सिस्टम का ढांचागत संकट है।

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि किस तरह मोदी सरकार एक तरफ तकनीक की आड़ में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है, तो दूसरी तरफ अपनी तानाशाही नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने वाले योद्धाओं को 'अपराधी' की तरह प्रताड़ित कर मौत के मुंह में ढकेल रही है।

मौत से जूझते शिक्षाविद सोनम वांगचुक और सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन घोटाला

पूंजीपरस्त सत्ता की क्रूरता: एक तरफ मौत से जूझते शिक्षाविद सोनम वांगचुक,

दूसरी तरफ सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार!


जंतर-मंतर पर 18 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की जान खतरे में,सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकारा

नई दिल्ली। 16 जुलाई। देश की शिक्षा व्यवस्था को कारपोरेट के हाथों बेचने और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली जनविरोधी मोदी सरकार की क्रूरता और उदासीनता एक बार फिर बेनकाब हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणालियों में सुधार की मांग को लेकर जाने-माने शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर हैं। उनकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी है, लेकिन फासीवादी सत्ता के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। दूसरी ओर, इसी भ्रष्ट शिक्षा तंत्र के एक और बड़े कारनामे—सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन या ‘ऑनस्क्रीन मार्किंग’ (OSM) पद्धति में बड़े पैमाने पर हुई धांधली—पर देश की शीर्ष अदालत ने मोदी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

'गुरुदास अग्रवाल' जैसी परिणति की आशंका: वांगचुक की गिरती सेहत पर देश चिंतित

नीट घोटाला, नेट (NET) परीक्षा में धांधली और सीबीएसई की उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सोनम वांगचुक का अनशन बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। डॉक्टरों के मुताबिक, अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन करीब 9 किलोग्राम घटकर महज 57.15 किलोग्राम रह गया है। उनका ब्लड प्रेशर 105/76, शुगर लेवल 80 यूनिट और ऑक्सीजन लेवल 97 प्रतिशत पर आ गया है। डॉक्टरों ने उन्हें 24 घंटे की सख्त निगरानी में रखा है। देश के बुद्धिजीवियों और वाम-जनतांत्रिक ताकतों ने आशंका जताई है कि अगर सरकार का यही क्रूर रवैया रहा, तो सोनम वांगचुक की परिणति भी 2018 में निर्मल गंगा के लिए प्राण त्यागने वाले पर्यावरणविद् गुरुदास अग्रवाल जैसी हो सकती है। सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। याचिकाकर्ता वकील राकेश कुमार सैनी ने अदालत में कहा कि सरकार वांगचुक के साथ ऐसा बर्ताव कर रही है जैसे वे कोई 'देशद्रोही' या कुख्यात अपराधी हों। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर तुरंत जवाब तलब किया है।

देश की संस्कृतिक और प्रगतिशील आवाजों का समर्थन

वांगचुक के आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाते हुए अभिनेत्री शबाना आजमी, सोनी राजदान, जीनत अमान और फिल्मकार अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर सरकार के 'आपराधिक मौन' की निंदा की है। अनुराग कश्यप ने लिखा, "यह बेहद चिंताजनक है कि हमारी राज्य व्यवस्था आम लोगों के प्राणों के प्रति इतनी उदासीन हो चुकी है। सरकार की यह चुप्पी उनके आपराधिक रवैये को साबित करती है।" जंतर-मंतर पर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी पहुंचकर वांगचुक का हौसला बढ़ाया।

कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च; वामपंथियों का मिला साथ

बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी तानाशाही रवैया अपनाते हुए प्रदर्शनकारियों से बात करने को भी तैयार नहीं हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने आज (गुरुवार) जंतर-मंतर पर एक दिवसीय प्रतीकात्मक अनशन का आह्वान किया है। इसके साथ ही, आगामी सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'संसद भवन मार्च' की घोषणा की गई है। इस बड़े आंदोलन को सीपीआई(एम) समेत देश के तमाम वामपंथी और विपक्षी दलों ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है। दिपके ने आशंका जताई है कि इस आंदोलन को कुचलने के लिए दमनकारी मोदी सरकार प्रदर्शनकारियों पर UAPA या NSA जैसी कड़क धाराएं लगा सकती है, लेकिन जनता का संघर्ष पीछे नहीं हटेगा।

सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- छात्रों में 'भयानक हताशा'

एक तरफ युवा और शिक्षाविद सड़कों पर हैं, तो दूसरी तरफ अदालतों में भी सरकार के पूंजीपति-परस्त फैसलों की कलई खुल रही है। सीबीएसई द्वारा लागू की गई डिजिटल उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन (OSM) प्रणाली में भारी विसंगतियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। बुधवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राकेश बिंजोला द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा:

"यह सिर्फ कुछ नंबरों की हेरफेर का मामला नहीं है, बल्कि पूरी मूल्यांकन व्यवस्था में गहरी नीतिगत और व्यवस्थागत खामियां हैं। डिजिटल मूल्यांकन की इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण छात्रों के भीतर भयानक हताशा और आक्रोश पैदा हो रहा है।"

शीर्ष अदालत ने सीबीएसई को सख्त निर्देश दिया है कि वह अगले हफ्ते तक रिपोर्ट पेश कर बताए कि उसने इस व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए हैं। हालाँकि, मोदी सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हमेशा की तरह डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए दावा किया कि 'एस. राधा चौहान' की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है और छात्रों की शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा रहा है।


सरकारी दावे बनाम कड़वी हकीकत

वामपंथी और विपक्षी खेमे ने सरकार के इन दावों को पूरी तरह 'सफेद झूठ' और 'छलावा' करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि जो सरकार राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं (NEET) में पेपर लीक, लगातार हो रही छात्रों की आत्महत्याओं और अब सोनम वांगचुक की जानलेवा स्थिति पर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठी है, उसके मुंह से 'छात्रों के हितों की चिंता' जैसी बातें ढोंग के अलावा कुछ नहीं हैं। यह साफ है कि जब तक देश की शिक्षा व्यवस्था को कारपोरेट-हितैषी नीतियों और तकनीकी घोटालों से मुक्त कराकर लोकतांत्रिक नहीं बनाया जाता, तब तक छात्रों, नौजवानों और शिक्षाविदों का यह संयुक्त संघर्ष जारी रहेगा।


साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति। 16 जुलाई 2026

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मौत से जूझते शिक्षाविद सोनम वांगचुक और सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन घोटाला

प्रकाशित: 16 जुलाई 2026 • 5 मिनट पठन

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