जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद तनाव बढ़ गया है। खबर मिलते ही माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य एम. ए. बेबी, आर. अरुण कुमार और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद माकपा नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। अस्पताल प्रशासन की अनुमति के बावजूद दिल्ली पुलिस ने माकपा (CPI-M) के शीर्ष नेताओं को वांगचुक से मिलने नहीं दिया। माकपा और छात्र संगठनों ने मोदी सरकार पर तानाशाही, संवैधानिक मूल्यों के हनन और परीक्षा घोटालों पर जवाबदेही से भागने का गंभीर आरोप लगाया है। वांगचुक के दमन के विरोध में और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एसएफआई (SFI) नेतृत्व ने जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
अस्पताल या जेल! पुलिस और एम. ए. बेबी के बीच तीखी बहस
एसएफआई (SFI) नेताओं का आमरण अनशन शुरू
नई दिल्ली,18 जुलाई। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को कथित रूप से 'अगवा' कर अस्पताल ले जाए जाने के बाद, दिल्ली पुलिस ने माकपा (CPI-M) नेताओं को उनसे मिलने नहीं दिया। शनिवार को सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर जारी उनके अनशन स्थल से जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। यह खबर मिलते ही माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य एम. ए. बेबी, आर. अरुण कुमार और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद माकपा नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। अस्पताल की डायरेक्टर कविता रानी शर्मा ने माकपा नेताओं को मिलने की अनुमति दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें सोनम वांगचुक के पास नहीं जाने दिया।
बेबी ने तीखे आक्रोश के साथ कहा कि यह सब मोदी-शाह-मोहन भागवत की मिलीभगत से हुआ है। किसी भी लोकतांत्रिक नियम-कायदे का पालन नहीं किया जा रहा है। हमारे समाज के हजारों छात्र इन परीक्षाओं में शामिल होकर भ्रष्टाचार का शिकार हो रहे हैं। सरकार की कोई जवाबदेही नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस घोटाले की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। यदि मोदी-शाह-भागवत आज धर्मेंद्र प्रधान को बचा रहे हैं, तो आगे चलकर वे खुद को भी नहीं बचा पाएंगे।
एसएफआई का आमरण अनशन
इसी बीच, शनिवार से एसएफआई (SFI) के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। संगठन की संयुक्त सचिव आईशी घोष भी रविवार सुबह से इस अनशन में शामिल होंगी। वह आज दिल्ली में नहीं थीं। एसएफआई के महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने बताया कि दिल्ली लौटते ही वह सीधे 'क्रांति कॉर्नर' (जंतर-मंतर) आकर आमरण अनशन पर बैठेंगे।
एसएफआई के महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने कहा:
"मोदी सरकार को लगता है कि प्रदर्शनकारियों को जबरन उठाकर वे आंदोलनकारियों के हौसले तोड़ देंगे। वे कभी अभिजीत दीपके जैसे साथियों पर बाहर से लोग भेजकर स्याही फिंकवा रहे हैं, तो कभी अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हम पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से, सिर उठाकर अपनी बात सीधे तौर पर कहने के लिए यहां डटे हुए हैं।"

इस घटना के तुरंत बाद माकपा नेता वृंदा करात अनशन मंच पर पहुंचीं। वहां उस समय अभिजीत दीपके आमरण अनशन शुरू कर चुके थे। वांगचुक को जिस तरह पुलिस ने घसीटकर और जबरन उठाया, उसका जिक्र करते हुए दीपके रो पड़े। वृंदा करात ने उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने भारी गुस्से में कहा-
"लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को पैरों तले रौंद दिया गया है। यह सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर किया गया है। सरकार में जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं बची है। यह देश में तानाशाही का खुला उदाहरण है।"
किले में तब्दील हुआ सफदरजंग अस्पताल
सफदरजंग अस्पताल को व्यावहारिक रूप से एक किले में बदल दिया गया है। पूरे परिसर को भारी पुलिस बल ने घेर रखा है। सीपीआई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने कहा कि अमित शाह के मंत्रालय ने अस्पताल को एक हाई-सिक्योरिटी जेल बना दिया है। पुलिस द्वारा रोके जाने पर जब सांसद जॉन ब्रिटास ने अपना पहचान पत्र दिखाकर वांगचुक से मिलने की इच्छा जताई, तो पुलिस अधिकारियों ने उनसे अस्पताल की डायरेक्टर की अनुमति लाने को कहा। इसके बाद माकपा नेता डायरेक्टर के दफ्तर पहुंचे। अस्पताल परिसर की तरह उनका दफ्तर भी पुलिस के कड़े पहरे में था। डायरेक्टर कविता रानी शर्मा से चर्चा के बाद उन्होंने माकपा नेताओं को मिलने की इजाजत दे दी। डायरेक्टर ने एम. ए. बेबी से कहा, "आप लोग सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने का अनुरोध करें।" बेबी और ब्रिटास ने कहा कि वे उनका यह संदेश वांगचुक तक पहुंचा देंगे। डायरेक्टर के कमरे से वांगचुक के वार्ड की दूरी महज 50 मीटर थी। लेकिन इस छोटे से रास्ते को तय करने के दौरान ही वहां मौजूद पुलिस अफसरों ने आलाधिकारियों से बात की। जैसे ही बेबी और अन्य नेता वार्ड में पहुंचे, पुलिस अधिकारियों ने दोटूक कह दिया, "ऊपर से निर्देश हैं, किसी को भी मिलने नहीं दिया जाएगा।" इसके बाद माकपा नेताओं ने वहां मौजूद वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो से बात की और उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी। गीतांजलि ने भी अस्पताल में वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर अब तक दी गई जानकारियों से माकपा नेताओं को अवगत कराया।
जंतर-मंतर पर उमड़ी भीड़
अस्पताल से निकलकर माकपा नेता वापस जंतर-मंतर पहुंचे, जहां मुख्य अनशन मंच के सामने भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। उपस्थित जनता के सामने जॉन ब्रिटास ने अस्पताल की घटना का ब्योरा रखा और इस आंदोलन तथा संसद मार्च के प्रति एकजुटता व्यक्त की। इसके बाद सीपीआई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी धरना स्थल के पास ही बने एसएफआई के 'क्रांति कॉर्नर' पहुंचे, जहां एसएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था। बेबी ने उनसे बात की और फिर वहां मौजूद छात्र-युवाओं और महिलाओं को अस्पताल की घटना से अवगत कराया। उन्होंने इस 'अपहरण' की कड़ी निंदा की। मोदी सरकार को 'तानाशाह' बताते हुए माकपा नेता ने तीखा हमला बोला और कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तरह दिल्ली पुलिस भी उतनी ही बेईमान हो चुकी है। उन्होंने कहा, "यह लड़ाई जारी रहेगी। यहां मौजूद छात्र-युवाओं की आंखों और चेहरों पर जो गुस्सा और दृढ़ता मैं देख रहा हूं, उससे साफ है कि आप इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं। हम और देश के तमाम लोकतांत्रिक सोच वाले लोग आपके इस आंदोलन के साथ हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की आपकी मांग का हम पूरी तरह समर्थन करते हैं।"
सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा
इससे पहले, सुबह वांगचुक को उठाए जाने के तुरंत बाद एम. ए. बेबी ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा था:
"जिस शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में खुलेआम प्रश्नपत्र लीक होने जैसे घोटाले हुए, उन्हें बर्खास्त करने और लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाली इस व्यवस्था को ध्वस्त करने के बजाय, सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बर दमन चक्र चला रही है। असहमति की आवाज को दबाना कभी भी जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता।"
शनिवार सुबह घटना के तुरंत बाद एसएफआई नेता जंतर-मंतर पहुंच गए थे। शुक्रवार पूरी रात एसएफआई कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में छात्र-युवा वहीं डटे रहे और उन्होंने जंतर-मंतर की जमीन पर सोकर रात बिताई।

'क्रांति कॉर्नर' पर एसएफआई महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने कहा,
"पुलिस के जरिए आज सुबह सोनम वांगचुक को उठा लिया गया। सरकार जबरन खिलाकर उनका अनशन तुड़वाने की कोशिश कर रही है। बाकी छात्रों पर भी किसी भी वक्त पुलिसिया दमन हो सकता है। अगर सरकार को छात्रों और सोनम वांगचुक की जान की इतनी ही परवाह है, तो सरकार आकर उनसे बात क्यों नहीं करती? धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। वह पूरी तरह से एक विफल शिक्षा मंत्री हैं। नीट (NEET), सीबीएसई (CBSE) या अन्य क्षेत्रों में लगातार जो हो रहा है, उससे साफ है कि वह शिक्षा मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं। एनटीए (NTA) से कुछ संभल नहीं रहा। शिक्षा व्यवस्था में इन्हीं सुधारों को लाने के लिए सोनम वांगचुक लड़ रहे हैं और हम सब उनके साथ इस लड़ाई में शामिल हैं।"
साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति । 19 जुलाई 2026
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