सरकार की नीतियों के कारण आज संकट गहरा गया है। आम लोगों के जीवन-जीविका की रक्षा के संघर्ष में सभी को शामिल होना होगा और किसान सभा के दायित्व को और अधिक मजबूती से निभाना होगा।
जन समाचार मंच
सरकार की नीतियों के कारण आज संकट गहरा गया है। आम लोगों के जीवन-जीविका की रक्षा के संघर्ष में सभी को शामिल होना होगा और किसान सभा के दायित्व को और अधिक मजबूती से निभाना होगा।

देश की कृषि और किसानों के अस्तित्व की रक्षा के संघर्ष को और आगे बढ़ाने के लिए किसान समाज को एकजुट करके व्यापक आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया गया है। अखिल भारतीय किसान सभा के संगठन की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रविवार को घाटल टाउन हॉल में आयोजित एक परिचर्चा में किसान नेताओं ने कहा कि कारपोरेट, सांप्रदायिकता और निरंकुशता के खिलाफ संगठित संघर्ष ही मौजूदा परिस्थिति में एकमात्र रास्ता है।
घाटल अनुमंडल कृषक सभा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उपस्थिति में आयोजित इस सभा का विषय था— किसान सभा के गठन का इतिहास और वर्तमान परिस्थिति में किसान आंदोलन के कार्यकर्ताओं का दायित्व'। मुख्य वक्ता के रूप में संगठन के राज्य नेता अमर मन्ना और राज्य समिति सदस्य सुकुमार भुइँया उपस्थित थे। सभा की अध्यक्षता तपस चक्रवर्ती ने की।
अमर मन्ना ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय से लेकर जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ किसान सभा के ऐतिहासिक आंदोलनों और संघर्षों के माध्यम से गरीब श्रमिकों व बटाईदारों के भूमि अधिकार की स्थापना के इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यूरोप-अमेरिका में जहाँ किसानों के हाथों से भूमि का स्वामित्व छीन लिया गया, वहीं भारत में जमींदारों और पूंजीपतियों के स्वार्थ में उस प्रक्रिया को लागू नहीं होने दिया गया। इसी कारण भूमि अधिकार के आंदोलन को नए सिरे से दिशा देनी होगी। वर्तमान परिस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कारपोरेट और सांप्रदायिक शक्तियों के हाथों कृषि संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है। इसके कारण किसानों का संकट बढ़ रहा है।
सुकुमार भुइँया ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण आज संकट गहरा गया है। आम लोगों के जीवन-जीविका की रक्षा के संघर्ष में सभी को शामिल होना होगा और कृषक सभा के दायित्व को और अधिक मजबूती से निभाना होगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कारपोरेट पूँजी का आगमन और सांप्रदायिक राजनीति के कारण देश की कृषि व्यवस्था भारी संकट में है। फसलों की बर्बादी, कृषि उपकरणों की बढ़ती कीमतें और उत्पादित फसलों का उचित मूल्य न मिलने के कारण किसानों का शोषण बढ़ा है, आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस परिस्थिति में किसान समाज के सामने केवल एक ही रास्ता है कि वे एकजुट होकर शक्तिशाली आंदोलन खड़ा करें, जिस पर उन्होंने विशेष बल दिया।
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साभार:- गणशक्ति
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 20 जुलाई 2026 • 2 मिनट पठन

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