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मताधिकार की रक्षा के संघर्ष में एकजुट आंदोलन का आह्वान

राजीव कुमार पाण्डेय•20 जुलाई 20263 मिनट पठन9 बार पढ़ा गया

राज्य में लगभग 27 लाख और पूर्व बर्दवान जिले में 1 लाख 9 हजार 865 वास्तविक मतदाताओं को विचाराधीन (अंडर स्क्रूटनी) रखा गया है। विचाराधीन रखने के बहाने असंख्य वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें आदिवासी, अल्पसंख्यक लोगों के नाम सबसे ज्यादा हैं। नवगठित सरकार ने घोषणा की है कि जिनके नाम वोटर सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं (सरकारी सुविधाओं) का लाभ पाने का अधिकार नहीं रहेगा।

मताधिकार की रक्षा के संघर्ष में एकजुट आंदोलन का आह्वान

मताधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, और उस अधिकार की रक्षा के संघर्ष में सभी को एकजुट होकर पूरी ताकत से मैदान में उतरना होगा। मताधिकार छीनने के खिलाफ प्राणपण से प्रतिरोध खड़ा करने के संघर्ष में शामिल होने का यह आह्वान रविवार को बर्दवान में आयोजित एक कन्वेंशन से किया गया।

इस दिन 'आवाज', आदिवासी अधिकार रक्षा मंच, सामाजिक न्याय मंच, ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन, सम्मिलित केंद्रीय वास्तुहारा परिषद, पूर्व बर्दवान जिला कमेटी की ओर से बर्दवान रवींद्र भवन में 'मताधिकार बचाओ' और 'एसआरईआर (SRER) में बाहर किए गए वोटरों के नाम दर्ज करने' की मांग को लेकर एक कन्वेंशन आयोजित किया गया। कन्वेंशन के मुख्य वक्ता प्रख्यात अधिवक्ता सव्यसाची चटर्जी थे। आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए कन्वेंशन से 53 सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया गया। कमेटी के संयोजक शाहजहां चौधरी चुने गए।

इस दिन रवींद्र भवन लोगों की भीड़ से खचाखच भर गया, और बाहर भी सैकड़ों लोग खड़े होकर नेताओं का भाषण सुन रहे थे। इस कन्वेंशन में तमाल माझी, सुकल्याण मांडी, नंदलाल गुह, शाहजहां चौधरी ने भी अपनी बात रखी। इस कन्वेंशन में लगभग 15 जन नागरिकों ने वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद चरम उत्पीड़न का शिकार होने के अपने अनुभवों को साझा किया, जिसके बाद भी उनका नाम वोटर सूची में नहीं आया।

एसआरईआर (SRER) में बाहर किए गए सभी वास्तविक (वैध) मतदाताओं के नाम दर्ज करने की मांग को लेकर कन्वेंशन से आवाज उठाई गई कि मताधिकार नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और इसे इस तरह छीना नहीं जा सकता। एसआरईआर में बाहर किए गए सभी वैध मतदाताओं के नाम दर्ज कराने के लिए जिले भर के 5 संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया।

राज्य में लगभग 27 लाख और पूर्व बर्दवान जिले में 1 लाख 9 हजार 865 वास्तविक मतदाताओं को विचाराधीन (अंडर स्क्रूटनी) रखा गया है। विचाराधीन रखने के बहाने असंख्य वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें आदिवासी, अल्पसंख्यक लोगों के नाम सबसे ज्यादा हैं। नवगठित सरकार ने घोषणा की है कि जिनके नाम वोटर सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं (सरकारी सुविधाओं) का लाभ पाने का अधिकार नहीं रहेगा।

इस कन्वेंशन से मांग की गई कि 2002 में जिनकी मैपिंग की गई है, उनके नाम वैध घोषित किए जाएं। बाकी जिनके नाम विचाराधीन रखे गए हैं, उनका कारण स्पष्ट करना होगा और उन्हें वास्तविक मतदाता के रूप में सूची में शामिल करना होगा।

इस दिन इस बात पर चर्चा की गई कि मताधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, और इस अधिकार की रक्षा के संघर्ष में सभी को पूरी ताकत से एकजुट होना होगा। इस दिन नूरुल हक, चंद्र बाग, कल्यान हेम्ब्रम, कृष्ण मणिक और प्रदीप ता ने अध्यक्ष मंडली के रूप में कार्यक्रम का संचालन किया।

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साभार:- गणशक्ति

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मताधिकार की रक्षा के संघर्ष में एकजुट आंदोलन का आह्वान

प्रकाशित: 20 जुलाई 2026 • 3 मिनट पठन

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