वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | Wednesday, 14 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

बंगाल में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए।

राजीव कुमार पाण्डेय•21 जुलाई 20265 मिनट पठन19 बार पढ़ा गया

सोमवार को जादवपुर में एसएफआई कोलकाता जिला कमेटी की ओर से अनशन और धरना दिया गया। धरना मंच पर शिक्षाविद पवित्र सरकार उपस्थित हुए। नाटककार चंदन सेन सहित अन्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के ऊपर पुलिसिया हमले के खिलाफ विरोध मार्च निकालने के बाद प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने काफी देर तक रास्ता जाम (पथ अवरोध) किया। सुबह से ही पोर्टिको में भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर प्रेसीडेंसी के छात्रों ने 12 घंटे का सांकेतिक अनशन शुरू किया। 'शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ बांकुड़ा शहर के चर्च मोड़ पर आंदोलनकारी अनशन पर बैठे।

बंगाल में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए।

 

दिल्ली का जंतर-मंतर कविगुरु के शांतिनिकेतन और पूरे राज्य के साथ एकजुट हो गया। प्रशासक के अहंकार का जवाब गीतों, कविताओं और ध्वजारोहण के माध्यम से दिया गया। 1500 किलोमीटर दूर से भी कविगुरु के विद्यालय से मनमानी के खिलाफ विरोध की आवाज गूंजी। विरोध प्रदर्शन लगभग छह किलोमीटर तक चला। विश्वभारती के छात्र, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार दोपहर से ही सड़कों पर उतर आए। न केवल शांतिनिकेतन में, बल्कि राज्य भर के जिलों में सोमवार को छात्रों, युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों के लोगों ने दिल्ली में तानाशाही के हमले के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल प्रांतीय कृषक सभा ने दिल्ली में छात्रों और युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस द्वारा किए गए भारी लाठीचार्ज, आंसू गैस और क्रूर दमन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया।

विश्वभारती के रतनपल्ली से शुरू हुए प्रोटेस्ट मार्च में विश्वभारती के चांसलर, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर आवाज उठाई गई। दोपहर में विश्वभारती समेत कई स्टूडेंट्स, कल्चरल एक्टिविस्ट, एजुकेशन के प्रति उत्साही और वर्कर सड़कों पर उतर आए। उस प्रोटेस्ट में शामिल उत्सव बिस्वास और त्रिशिता ने साफ कहा कि जिस तरह से ए बी वी पी के लड़कों ने पुलिस के सामने विश्वभारती पर हमला किया, वह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। अभी तक किसी को अरेस्ट नहीं किया गया। और जिस तरह से पुलिस ने दिल्ली में सोनम वांगचुक को पकड़कर स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज किया, उसका कड़ा विरोध होना स्वाभाविक है। एजुकेशन मिनिस्टर को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। सरकार द्वारा ऐसा अन्याय जारी नहीं रह सकता।

स्टूडेंट्स और युवा सांकेतिक भूख हड़ताल पर। इसके अलावा, एसएफआई-डीवाईएफआई की पहल पर सिउडी, रामपुरहाट, दुबराजपुर, नलहटी, राजनगर समेत कई जगहों पर प्रतिवाद किए गए। दूसरी ओर, पार्लियामेंट हाउस ड्राइव में पर दिनभर पुलिसिया अत्याचार हुआ, दूसरी ओर नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी छात्र आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाते हुए इस राज्य में भी एसएफआई का अनशन और धरना प्रदर्शन जारी रहा। एसएफआई के इस धरने में आम छात्र-युवाओं के साथ-साथ शिक्षक, शिक्षाविद और अभिभावक भी शामिल हुए।

सोमवार को जादवपुर में एसएफआई कोलकाता जिला कमेटी की ओर से अनशन और धरना दिया गया। धरना मंच पर शिक्षाविद पवित्र सरकार उपस्थित हुए। नाटककार चंदन सेन सहित अन्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के ऊपर पुलिसिया हमले के खिलाफ विरोध मार्च निकालने के बाद प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने काफी देर तक रास्ता जाम (पथ अवरोध) किया। सुबह से ही पोर्टिको में भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर प्रेसीडेंसी के छात्रों ने 12 घंटे का सांकेतिक अनशन शुरू किया। 'शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ बांकुड़ा शहर के चर्च मोड़ पर आंदोलनकारी अनशन पर बैठे।

सोमवार को रानीगंज की सड़कों पर सीपीआई(एम) रानीगंज एरिया कमेटी ने लाल झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस सभा से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठी। पूर्व मेदिनीपुर जिले के विभिन्न इलाकों में भी सोमवार को रैलियां और सभाएं आयोजित की गईं। इस दिन नेताजीनगर बाजार और हल्दिया में विरोध मार्च निकाला गया।

एसएफआई पश्चिम मेदिनीपुर जिला कमेटी की पहल पर सोमवार को मेदिनीपुर शहर में गांधी मूर्ति के सामने 12 घंटे का सांकेतिक अनशन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। उस आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए सारा भारत किसान सभा और भारत की लोकतांत्रिक युवा फेडरेशन भी इसमें शामिल हुई। मेदिनीपुर शहर में सांकेतिक अनशन और विरोध सभा के साथ-साथ जिले के गोआलतोड़, चंद्रकोणा, पिंगला, सबंग, खड़गपुर, चाईपाट और विद्यासागर विश्वविद्यालय परिसर में SFI ने विरोध मार्च निकाला और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका।

एसएफआई द्वारा आहूत इन कार्यक्रमों में विभिन्न वामपंथी जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सुबह से शुरू होकर रात तक धरना और अनशन कार्यक्रम चलता रहा। जिले के बाली दावबानगाछी, लिलुआ भट्टनगर, सालकिया, पिलखाना, हावड़ा मैदान, शिबपुर काजीपाड़ा मोड़, संतरागाछी मोड़, बाली जगाछा निश्चिंदा तरुण समिति के सामने आयोजित धरना और अनशन कार्यक्रमों में छात्र, युवा, महिलाओं सहित वामपंथी जनसंगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

लिलुआ के भट्टनगर इलाके में एसएफआई कार्यकर्ताओं ने धरना-अनशन का कार्यक्रम शुरू किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना मंच के पास हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ा और इलाके के कई आम लोग धरना मंच के सामने इकट्ठा हुए, तभी स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने अचानक एसएफआई कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंच की कुर्सियां, मेज और एसएफआई के झंडे फाड़कर सड़क पर फेंक दिए। लोगों ने तुरंत इसका कड़ा विरोध किया। यहां तक कि भाजपा के पुरुष कार्यकर्ताओं ने छात्राओं की पिटाई भी की। सोमवार शाम को स्थानीय वामपंथी जनसंगठन के नेताओं ने स्थानीय लिलुआ पुलिस स्टेशन में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा और घटना की निंदा करते हुए इसमें शामिल अपराधियों को सजा देने की मांग की। इसके अलावा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया और हुगली में हर जगह विरोध प्रदर्शन हुए।

.

.

साभार:- गणशक्ति

  

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

बंगाल में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए।

प्रकाशित: 21 जुलाई 2026 • 5 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

362 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
साहित्य-संस्कृति

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

16 सितंबर 2026

राज्य

गड़वेता-शालबनी के 7 पार्टी दफ्तरों में बीजेपी का उपद्रव, लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।

16 सितंबर 2026

साहित्य-संस्कृति

माफीनामा: हूबनाथ

हम तो /

नारी शक्ति के समक्ष /

नतमस्तक हैं ।

हम सभी /

एक स्त्री से ही तो /

जनमे हैं ।

उसी के संरक्षण में /

हमारा स्वर्णिम /

बालपन बीता है ।

12 सितंबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement