सोमवार को जादवपुर में एसएफआई कोलकाता जिला कमेटी की ओर से अनशन और धरना दिया गया। धरना मंच पर शिक्षाविद पवित्र सरकार उपस्थित हुए। नाटककार चंदन सेन सहित अन्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के ऊपर पुलिसिया हमले के खिलाफ विरोध मार्च निकालने के बाद प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने काफी देर तक रास्ता जाम (पथ अवरोध) किया। सुबह से ही पोर्टिको में भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर प्रेसीडेंसी के छात्रों ने 12 घंटे का सांकेतिक अनशन शुरू किया। 'शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ बांकुड़ा शहर के चर्च मोड़ पर आंदोलनकारी अनशन पर बैठे।
दिल्ली का जंतर-मंतर कविगुरु के शांतिनिकेतन और पूरे राज्य के साथ एकजुट हो गया। प्रशासक के अहंकार का जवाब गीतों, कविताओं और ध्वजारोहण के माध्यम से दिया गया। 1500 किलोमीटर दूर से भी कविगुरु के विद्यालय से मनमानी के खिलाफ विरोध की आवाज गूंजी। विरोध प्रदर्शन लगभग छह किलोमीटर तक चला। विश्वभारती के छात्र, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार दोपहर से ही सड़कों पर उतर आए। न केवल शांतिनिकेतन में, बल्कि राज्य भर के जिलों में सोमवार को छात्रों, युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों के लोगों ने दिल्ली में तानाशाही के हमले के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल प्रांतीय कृषक सभा ने दिल्ली में छात्रों और युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस द्वारा किए गए भारी लाठीचार्ज, आंसू गैस और क्रूर दमन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया।
विश्वभारती के रतनपल्ली से शुरू हुए प्रोटेस्ट मार्च में विश्वभारती के चांसलर, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर आवाज उठाई गई। दोपहर में विश्वभारती समेत कई स्टूडेंट्स, कल्चरल एक्टिविस्ट, एजुकेशन के प्रति उत्साही और वर्कर सड़कों पर उतर आए। उस प्रोटेस्ट में शामिल उत्सव बिस्वास और त्रिशिता ने साफ कहा कि जिस तरह से ए बी वी पी के लड़कों ने पुलिस के सामने विश्वभारती पर हमला किया, वह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। अभी तक किसी को अरेस्ट नहीं किया गया। और जिस तरह से पुलिस ने दिल्ली में सोनम वांगचुक को पकड़कर स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज किया, उसका कड़ा विरोध होना स्वाभाविक है। एजुकेशन मिनिस्टर को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। सरकार द्वारा ऐसा अन्याय जारी नहीं रह सकता।
स्टूडेंट्स और युवा सांकेतिक भूख हड़ताल पर। इसके अलावा, एसएफआई-डीवाईएफआई की पहल पर सिउडी, रामपुरहाट, दुबराजपुर, नलहटी, राजनगर समेत कई जगहों पर प्रतिवाद किए गए। दूसरी ओर, पार्लियामेंट हाउस ड्राइव में पर दिनभर पुलिसिया अत्याचार हुआ, दूसरी ओर नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी छात्र आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाते हुए इस राज्य में भी एसएफआई का अनशन और धरना प्रदर्शन जारी रहा। एसएफआई के इस धरने में आम छात्र-युवाओं के साथ-साथ शिक्षक, शिक्षाविद और अभिभावक भी शामिल हुए।
सोमवार को जादवपुर में एसएफआई कोलकाता जिला कमेटी की ओर से अनशन और धरना दिया गया। धरना मंच पर शिक्षाविद पवित्र सरकार उपस्थित हुए। नाटककार चंदन सेन सहित अन्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के ऊपर पुलिसिया हमले के खिलाफ विरोध मार्च निकालने के बाद प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने काफी देर तक रास्ता जाम (पथ अवरोध) किया। सुबह से ही पोर्टिको में भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर प्रेसीडेंसी के छात्रों ने 12 घंटे का सांकेतिक अनशन शुरू किया। 'शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ बांकुड़ा शहर के चर्च मोड़ पर आंदोलनकारी अनशन पर बैठे।
सोमवार को रानीगंज की सड़कों पर सीपीआई(एम) रानीगंज एरिया कमेटी ने लाल झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस सभा से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठी। पूर्व मेदिनीपुर जिले के विभिन्न इलाकों में भी सोमवार को रैलियां और सभाएं आयोजित की गईं। इस दिन नेताजीनगर बाजार और हल्दिया में विरोध मार्च निकाला गया।
एसएफआई पश्चिम मेदिनीपुर जिला कमेटी की पहल पर सोमवार को मेदिनीपुर शहर में गांधी मूर्ति के सामने 12 घंटे का सांकेतिक अनशन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। उस आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए सारा भारत किसान सभा और भारत की लोकतांत्रिक युवा फेडरेशन भी इसमें शामिल हुई। मेदिनीपुर शहर में सांकेतिक अनशन और विरोध सभा के साथ-साथ जिले के गोआलतोड़, चंद्रकोणा, पिंगला, सबंग, खड़गपुर, चाईपाट और विद्यासागर विश्वविद्यालय परिसर में SFI ने विरोध मार्च निकाला और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका।
एसएफआई द्वारा आहूत इन कार्यक्रमों में विभिन्न वामपंथी जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सुबह से शुरू होकर रात तक धरना और अनशन कार्यक्रम चलता रहा। जिले के बाली दावबानगाछी, लिलुआ भट्टनगर, सालकिया, पिलखाना, हावड़ा मैदान, शिबपुर काजीपाड़ा मोड़, संतरागाछी मोड़, बाली जगाछा निश्चिंदा तरुण समिति के सामने आयोजित धरना और अनशन कार्यक्रमों में छात्र, युवा, महिलाओं सहित वामपंथी जनसंगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
लिलुआ के भट्टनगर इलाके में एसएफआई कार्यकर्ताओं ने धरना-अनशन का कार्यक्रम शुरू किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना मंच के पास हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ा और इलाके के कई आम लोग धरना मंच के सामने इकट्ठा हुए, तभी स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने अचानक एसएफआई कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंच की कुर्सियां, मेज और एसएफआई के झंडे फाड़कर सड़क पर फेंक दिए। लोगों ने तुरंत इसका कड़ा विरोध किया। यहां तक कि भाजपा के पुरुष कार्यकर्ताओं ने छात्राओं की पिटाई भी की। सोमवार शाम को स्थानीय वामपंथी जनसंगठन के नेताओं ने स्थानीय लिलुआ पुलिस स्टेशन में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा और घटना की निंदा करते हुए इसमें शामिल अपराधियों को सजा देने की मांग की। इसके अलावा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया और हुगली में हर जगह विरोध प्रदर्शन हुए।
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साभार:- गणशक्ति
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