"गांव में काम लगभग न के बराबर ही है। तृणमूल सरकार के समय से ही 100 दिनों का काम बंद पड़ा हुआ था, सरकार बदलने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।" उनका आरोप है, "125 दिनों के काम या अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने 3 हजार रुपये भत्ता देने का वादा—आज लोगों के लिए केवल एक दिखावा और धोखा साबित हो रहा है।"
गांव में काम न होना और लंबे समय से 100 दिनों की कार्य योजना (मनरेगा) बंद पड़े रहने के कारण, एक खेतमजदूर ने परिवार की तंगी और कर्ज का बोझ न सह पाने के चलते खेत में ही अपनी जान दे दी। मृतक की पहचान मेमारी थाना क्षेत्र के देउलिया गांव निवासी नेपाल क्षेत्रपाल (55) के रूप में हुई है। सोमवार दोपहर खेत में काम करने के दौरान यह दुखद घटना घटी। स्थानीय लोगों ने उन्हें अचेत अवस्था में उद्धार किया और पहले मेमारी अस्पताल, फिर बर्धमान मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए, जहां रात में ही उनकी मृत्यु हो गई।
परिवार का दावा है कि लंबे समय से काम न मिलना, कर्ज का दबाव और आर्थिक तंगी से उत्पन्न मानसिक अवसाद के कारण ही नेपाल क्षेत्रपाल ने यह आत्मघाती कदम उठाया।
पड़ोसी पांडव क्षेत्रपाल ने बताया, "गांव में काम लगभग न के बराबर ही है। तृणमूल सरकार के समय से ही 100 दिनों का काम बंद पड़ा हुआ था, सरकार बदलने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।" उनका आरोप है, "125 दिनों के काम या अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने 3 हजार रुपये भत्ता देने का वादा—आज लोगों के लिए केवल एक दिखावा और धोखा साबित हो रहा है।"
जानकारी के अनुसार, मृतक की पत्नी पूर्णिमा क्षेत्रपाल को अन्नपूर्णा योजना का कोई भत्ता नहीं मिलता है। इसके अलावा परिवार पर माइक्रोफाइनेंस (लघु वित्त संस्थाओं) के कर्ज का भी भारी बोझ था। समय पर किस्त न चुका पाने के कारण ब्याज समेत कर्ज की रकम लगातार बढ़ती जा रही थी, ऐसा पड़ोसियों का कहना है।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इलाके के अधिकांश खेतमजदूर माइक्रोफाइनेंस के कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। उस कर्ज को चुकाने के लिए उन्हें साल का अधिकांश समय अन्य राज्यों में जाकर प्रवासी श्रमिक के रूप में काम करना पड़ता है। मॉनसून के दौरान खेती के कुछ दिनों को छोड़ दिया जाए, तो गांव में व्यावहारिक रूप से उनके लिए कोई काम उपलब्ध नहीं रहता है।
नेपाल क्षेत्रपाल के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं। उनकी मृत्यु की इस दुखद घटना से देउलिया गांव के खेतमजदूर परिवारों में गहरा शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है।
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साभार:- गणशक्ति
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