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जाति के नाम पर भेदभाव की कोशिश: अंडाल और सालानपुर में प्रतिरोध

राजीव कुमार पाण्डेय•22 जुलाई 20264 मिनट पठन12 बार पढ़ा गया

पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर अनुमंडल (सब-डिवीजन) के अंडाल थाना क्षेत्र के दक्षिणखंड गांव में रथयात्रा के बाद आने वाले शनिवार को विपत्तारिणी पूजा का अनुष्ठान चल रहा था। गोपालमाठ इलाके की विवाहित बेटी प्रियंका बाउरी जब उस अनुष्ठान में शामिल होने गईं, तो स्थानीय कविराज के परिवार के लोगों ने उन्हें रोक दिया। रोकने का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि पूजा में 'नीची जाति' के बाउरी समुदाय का कोई अधिकार नहीं है।

राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद जातिगत भेदभाव की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। 'नीची जाति' का हवाला देकर गांवों की सामूहिक पूजा में भाग लेने या मंदिरों में प्रवेश पर पाबंदी लगाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। पिछले शनिवार को पश्चिम बर्धमान जिले में जातिगत भेदभाव की दो घटनाओं में यही तस्वीर उभरकर सामने आई है। पश्चिम बर्धमान जिले के अंडाल और सालानपुर ब्लॉक की इन दोनों ही घटनाओं में बाउरी समुदाय के लोगों को 'छोटी जाति' कहकर मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया।

पश्चिम बंगाल सामाजिक न्याय मंच ने पहले ही इस तरह की घटनाओं का विरोध करते हुए कई मंदिरों में सभी का प्रवेश अधिकार सुनिश्चित कराया है। मंच के राज्य संपादक अलकेश दास ने इन दोनों घटनाओं की तीखी निंदा करते हुए कहा है कि संविधान विरोधी इन सभी हरकतों के खिलाफ जनमत तैयार करना होगा।

पहली घटना:
पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर अनुमंडल (सब-डिवीजन) के अंडाल थाना क्षेत्र के दक्षिणखंड गांव में रथयात्रा के बाद आने वाले शनिवार को विपत्तारिणी पूजा का अनुष्ठान चल रहा था। गोपालमाठ इलाके की विवाहित बेटी प्रियंका बाउरी जब उस अनुष्ठान में शामिल होने गईं, तो स्थानीय कविराज के परिवार के लोगों ने उन्हें रोक दिया। रोकने का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि पूजा में 'नीची जाति' के बाउरी समुदाय का कोई अधिकार नहीं है। बाउरी समुदाय के लोगों और इलाके के अन्य निवासियों को साथ लेकर उस महिला ने इस जातिगत भेदभाव के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। इलाके के लोगों के भारी दबाव के कारण आखिरकार आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार की और दुख व्यक्त किया।

दूसरी घटना:
दूसरी घटना सालानपुर ब्लॉक की आथोरा ग्राम पंचायत के कर्मकार पाड़ा (मोहल्ले) की है। 15 साल बाद उस इलाके के दुर्गा मंदिर का जीर्णोद्धार (सुधार) कार्य पूरा होने पर स्थापना अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा था। रथ उत्सव से संबंधित कलश यात्रा कार्यक्रम के दौरान ही विवाद खड़ा हो गया। इलाके के बाउरी समुदाय के लोगों को 'नीची जाति' बताकर कलश यात्रा में भाग लेने से रोक दिया गया। इस घटना में पड़ोसी गांवों के कुल तीन गांवों के लोग शामिल थे।

इस घटना के विरोध में बाउरी समुदाय के लोगों के बीच भारी गुस्सा और आक्रोश फैल गया। सामान्य और सही सोच रखने वाले लोग उनके समर्थन में आगे आए। इसी बीच, नाराज लोगों ने मंदिर में ताला लगा दिया। आरोप है कि प्रशासन ने इस मामले में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई, जिसके कारण इलाके में अभी भी काफी तनाव बना हुआ है।

इस मामले को लेकर मंगलवार को मंच की पश्चिम बर्धमान जिला कमेटी की ओर से अंडाल के स्थानीय बीडीओ (BDO) को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान जिला संपादक नारायण बाउरी, जिला नेता भक्तदास वाद्यकर, पंचानन बाउरी, माणिक रुईदास, अनिल आंकुर आदि उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने बीडीओ से कहा कि एक तरफ जहां आपसी बातचीत जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे। प्रशासन को जनता के सामने यह बात स्पष्ट करनी चाहिए कि ऐसी घटनाएं पूरी तरह से असंवैधानिक और दंडनीय (सजा के योग्य) हैं। बुधवार को सालानपुर में बीडीओ को ज्ञापन सौंपने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सामाजिक न्याय मंच की पश्चिम बर्धमान जिला कमेटी द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा।

अलकेश दास ने इस दिन एक बयान में कहा कि राज्य में नई भाजपा सरकार आने के बाद से जातिगत भेदभाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। संघ परिवार द्वारा संचालित और मनुवादी नीतियों पर चलने वाली भाजपा सरकार से यही उम्मीद की जा सकती है। यदि हिंदुत्ववादी ताकतें मजबूत होंगी, तो मनुवाद के बंधन और कड़े हो जाएंगे। जाति के आधार पर भेदभाव और ज्यादा बढ़ेगा। ये दोनों घटनाएं इसी का उदाहरण हैं। इन सबके खिलाफ हमें एकजुट होकर कड़ा जनमत तैयार करना होगा।

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साभार:- गणशक्ति

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जाति के नाम पर भेदभाव की कोशिश: अंडाल और सालानपुर में प्रतिरोध

प्रकाशित: 22 जुलाई 2026 • 4 मिनट पठन

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