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शुक्रिया सियासत! -हूबनाथ

राजीव कुमार पाण्डेय•23 जुलाई 20262 मिनट पठन33 बार पढ़ा गया

गुनहगारों को वज़ीर/

तालिब ए इल्म को फ़कीर/

बनाने के लिए/

 

दिल से शुक्रिया!

 

शुक्रिया सियासत! -हूबनाथ

शुक्रिया सियासत 

लाख लाख शुक्रिया

 

जम्हूरियत को

जहालत में 

बदलने के लिए 

शुक्रिया! 

 

गुनहगारों को वज़ीर

तालिब ए इल्म को फ़कीर

बनाने के लिए 

 

दिल से शुक्रिया!

 

हत्यारे को हुक्मरान 

इबादतगाहों को

पीकदान बनाने के लिए 

 

रूह की गहराइयों से

शुक्रिया 

 

देश के युवाओं को

कील लगी लाठियों से पीटने के लिए 

संविधान की धज्जियां 

उड़ाने के लिए 

मुल्क को फांसी पर

चढ़ाने के लिए 

 

बेहद शुक्रिया

 

मुल्क के अस्सी करोड़

सम्मानित नागरिकों को

पांच किलो अनाज देकर

भिखारी और नाकारा

बनाने के लिए 

 

दिल से शुक्रिया 

 

बेहयाई के सम्मान के लिए 

गुंडई के अभिमान के लिए 

कमीनगी के परवान के लिए 

शराफ़त के बलिदान के लिए 

 

शुक्रिया सियासत 

 

झूठ और मक्कारी को

बेपनाह इज़्ज़त बख्शने 

व्यापार और अपराध को

बाइज़्ज़त साथ जोड़ने के लिए 

सचाई का सिर फोड़ने के लिए 

राष्ट्र को तबाही की तरफ़ 

मोड़ने के लिए 

 

हज़ारहा शुक्रिया!

 

शुक्रिया 

कि तुमने इन्सान और

इन्सान के बीच

गहरी खाई बनाई

 

कि मज़हब के ज़हर की

घुट्टी पिलाई

 

कि कुंद कर दिए ज़हन

बंद कर दी रिवायतें 

सोचने और समझने की

 

एक सौ चालीस करोड़ 

जीते जागते इन्सानों को

भेड़ की तरह हांकने के लिए 

 

मां जैसी ज़मीन को

टुकड़ों में बांटने के लिए 

 

हज़ारों साल की संस्कृति को

जड़ से ही काटने के लिए 

 

कितना शुक्रिया अदा करूं 

यह मेरी समझ के बाहर है

 

फिर भी

तुम्हारा लाख लाख शुक्रिया 

सियासत

 

कि तुमने 

हंसती खेलती ज़िंदगी को

जहन्नुम बना दिया 

 

शुक्रिया!

शुक्रिया!!

शुक्रिया!!!

 

 

- हूबनाथ

 

[लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]

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शुक्रिया सियासत! -हूबनाथ

प्रकाशित: 23 जुलाई 2026 • 2 मिनट पठन

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