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आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द

अपराजिता•31 जुलाई 20263 मिनट पठन7 बार पढ़ा गया

सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।

आइशी घोष की

गिरफ्तारी वारंट रद्द

एस एफ आई की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव आइशी घोष के खिलाफ 2021 के एक आंदोलन के मामले में जारी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट को वृहस्पतिवार को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने रद्द कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट विजयश्री राठौर की अदालत मेंआइशी घोष की व्यक्तिगत उपस्थिति के बाद एक हजार रुपये के जुर्माने की शर्त पर वारंट रद्द कर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी।

दो दिन पहले, आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए अमित शाह की पुलिस दिल्ली के एकेजी भवन स्थित सीपीआईएम के केंद्रीय कार्यालय में दाखिल हो गई थी। इस घटना को लेकर सरकार को देशभर में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। छात्र-युवा आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक को एक पुराने मामले के जरिए डराने-धमाने की कोशिश मोदी-शाह की तरफ से की गई, लेकिन अंततः उन्हें ही पीछे हटना पड़ा। दिल्ली पुलिस का यह कदम अकारण और अनैतिक था, जो आज अदालत के आदेश से भी स्पष्ट हो गया। बुधवार को अदालत ने इस गैर-जमानती वारंट पर रोक लगा दी थी।

यह मामला 2021 में बंग भवन के सामने हुए एक विरोध प्रदर्शन को लेकर दर्ज किया गया था। बराखंभा रोड थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) में तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना), 447 (अनाधिकृत प्रवेश) और 34 (साझा मंशा) के तहत आरोप लगाए गए थे। पिछली सुनवाई में पेश न हो पाने के कारण आइशी घोष के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। उनके वकील ने अदालत को बताया कि अपरिहार्य कारणों से वे पिछले दिन उपस्थित नहीं हो सकी थीं। इस आवेदन को स्वीकार करते हुए अदालत ने बुधवार को वारंट पर रोक लगा दी थी और वृहस्पतिवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। उसी आदेश का पालन करते हुए ऐशी आज अदालत में पेश हुईं और वारंट को रद्द कर दिया गया।

मंगलवार को जब दिल्ली पुलिस आइशी घोष को गिरफ्तार करने एकेजी भवन पहुँची थी, तब पार्टी नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना किसी तर्कसंगत कारण के विपक्षी राजनीतिक दल के केंद्रीय कार्यालय में पुलिस का इस तरह घुसना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। मौके पर मौजूद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के कड़े विरोध के चलते पुलिस को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।

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साभार -बांग्ला दैनिक गणशक्ति|31 जुलाई,2026

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आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द

प्रकाशित: 31 जुलाई 2026 • 3 मिनट पठन

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