सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।
जन समाचार मंच
सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।

एस एफ आई की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव आइशी घोष के खिलाफ 2021 के एक आंदोलन के मामले में जारी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट को वृहस्पतिवार को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने रद्द कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट विजयश्री राठौर की अदालत मेंआइशी घोष की व्यक्तिगत उपस्थिति के बाद एक हजार रुपये के जुर्माने की शर्त पर वारंट रद्द कर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी।
दो दिन पहले, आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए अमित शाह की पुलिस दिल्ली के एकेजी भवन स्थित सीपीआईएम के केंद्रीय कार्यालय में दाखिल हो गई थी। इस घटना को लेकर सरकार को देशभर में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। छात्र-युवा आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक को एक पुराने मामले के जरिए डराने-धमाने की कोशिश मोदी-शाह की तरफ से की गई, लेकिन अंततः उन्हें ही पीछे हटना पड़ा। दिल्ली पुलिस का यह कदम अकारण और अनैतिक था, जो आज अदालत के आदेश से भी स्पष्ट हो गया। बुधवार को अदालत ने इस गैर-जमानती वारंट पर रोक लगा दी थी।
यह मामला 2021 में बंग भवन के सामने हुए एक विरोध प्रदर्शन को लेकर दर्ज किया गया था। बराखंभा रोड थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) में तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना), 447 (अनाधिकृत प्रवेश) और 34 (साझा मंशा) के तहत आरोप लगाए गए थे। पिछली सुनवाई में पेश न हो पाने के कारण आइशी घोष के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। उनके वकील ने अदालत को बताया कि अपरिहार्य कारणों से वे पिछले दिन उपस्थित नहीं हो सकी थीं। इस आवेदन को स्वीकार करते हुए अदालत ने बुधवार को वारंट पर रोक लगा दी थी और वृहस्पतिवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। उसी आदेश का पालन करते हुए ऐशी आज अदालत में पेश हुईं और वारंट को रद्द कर दिया गया।
मंगलवार को जब दिल्ली पुलिस आइशी घोष को गिरफ्तार करने एकेजी भवन पहुँची थी, तब पार्टी नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना किसी तर्कसंगत कारण के विपक्षी राजनीतिक दल के केंद्रीय कार्यालय में पुलिस का इस तरह घुसना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। मौके पर मौजूद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के कड़े विरोध के चलते पुलिस को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।
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साभार -बांग्ला दैनिक गणशक्ति|31 जुलाई,2026
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प्रकाशित: 31 जुलाई 2026 • 3 मिनट पठन

'सरकार डर गई है, वे डगमगा गए हैं। इसलिए वे फासीवादी तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने लोगों के आंदोलन पर फासीवादी शैली में हमला बोला है। सरकार चाहती तो चर्चा के लिए बैठ सकती थी, बात कर सकती थी। कुछ माँगों को स्वीकार भी किया जा सकता था। लेकिन सरकार उस रास्ते पर नहीं गई। असल में उन्हें अपनी कुर्सी की चिंता है, इसलिए यह आक्रामकता है। पहले से ही ट्रेनें रद्द कर दी गईं, मेट्रो बंद कर दी गई, उड़ानों (एयरपोर्ट) से लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। मैंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा, आपातकाल के समय भी नहीं देखा।'
12 अक्टूबर 2026

किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।
11 अक्टूबर 2026

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10 अक्टूबर 2026

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
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केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

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