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असाध्य बीमारी!

राजीव कुमार पाण्डेय•02 अगस्त 20262 मिनट पठन21 बार पढ़ा गया

कल

अनन्या का जन्मदिन है

उसने सुफ़्रा से कहा

तू मेरे लिए 

कोई गिफ़्ट मत लाना

दादू डांटेंगे 

चॉकलेट ले आना

हम दोनों खा लेंगे 

असाध्य बीमारी!

सुफ़्रा

आठ बरस की

बच्ची है

अंग्रेज़ी स्कूल में

पढ़ती है


अनन्या

सुफ़्रा की 

सबसे अच्छी दोस्त है

दोनों

नर्सरी से साथ-साथ हैं

एक रोज़

सुफ़्रा 

अनन्या के घर गई


वह ड्राईंगरूम में थी

कि उसने सुना


अनन्या के दादाजी 

उसे दबे शब्दों में

डांट रहे थे


दोस्ती के लिए 

तुम्हें मुसलमान ही मिला

आइंदा 

इसे घर मत बुलाना


सुफ़्रा 

अपने घर चली आई 

अपनी मां 

आमना से बताया 


आमना की हालत

वही हुई


जो मेरी हुई थी

जब बाबरी मस्जिद 

ढहाई गई थी


कल

अनन्या का जन्मदिन है


उसने सुफ़्रा से कहा


तू मेरे लिए 

कोई गिफ़्ट मत लाना

दादू डांटेंगे 

चॉकलेट ले आना

हम दोनों खा लेंगे 

सुफ़्रा 

अनन्या के जन्मदिन पर 

उसके घर

नहीं जा पा रही है


उसे इसका

इतना ही दुख है


जितना मुझे 

भारतीय सभ्यता को

 फ़ालिज मारने पर

हुआ था


मैं 

इतिहास के 

बियाबान में भटक रहा हूं 

और ढूंढ़ रहा हूं 


कि इस मुल्क में

इतने घटिया 

और  जाहिल दादा जी

किसी और काल में थे

या यह बीमारी 

अमृतकाल की है


मैं अब तक

असफल रहा


यदि आपको मिले


तो ज़रूर बताइएगा


मुझे 

सुफ़्रा को बताना है


कि जिससे उसकी पीढ़ी 

इस जानलेवा 

बीमारी से बच सके

- हूबनाथ

[लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]

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असाध्य बीमारी!

प्रकाशित: 02 अगस्त 2026 • 2 मिनट पठन

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