नीट (NEET) धांधली के खिलाफ एक महीने से अधिक चले राष्ट्रव्यापी आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और मांगें माने जाने पर प्रदर्शन भले वापस ले लिया गया हो, लेकिन कानूनी व राजनीतिक हलचल तेज है। इस मामले में और पुलिस बर्बरता और हिंसक कार्रवाई - झड़पों की स्वतंत्र जांच (SIT गठन) के लिए सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हो रही है। वहीं, आंदोलन की अगुवाई करने वाली कॉक्रोच जनता पार्टी सरकार से पुलिस बर्बरता के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने व सभी मुकदमे वापस लेने की मांग कर रही है। इस संबंध में कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) 5 अगस्त को बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगी।
"NEET धांधली व पुलिस बर्बरता: अदालत और सियासत में संग्राम जारी!"
सुप्रिम कोर्ट में आज सुनवाई, 5 अगस्त को CJP तय करेगी आगे की रणनीति
नई दिल्ली / मुंबई, 2 अगस्त- नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ चले राष्ट्रव्यापी आंदोलन का असर अब अदालत और राजनीति दोनों जगह स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। एक तरफ जहाँ दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीने भर चले इस आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा मांगें मान लिए जाने पर आंदोलन वापस ले लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन के दौरान हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और SIT गठन के संकेत
सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) या स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की संभावना का संकेत दिया है।
मामले में अदालत की मुख्य हिदायतें और निर्देश:
आंदोलनकारियों को राहत: 28 जुलाई के अपने अंतरिम आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया था कि आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कठोर कदम न उठाया जाए। 18 वर्ष से कम उम्र के तथा बिना किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नाबालिगों को तुरंत बॉण्ड पर रिहा करने का निर्देश दिया गया था। (यह सुरक्षा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी)।
पुलिस की भूमिका और हथियारों का इस्तेमाल: सुनवाई के दौरान अदालत के ध्यान में लाया गया कि प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन, कील लगे लाठी-डंडे, रबर बुलेट और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र-छात्राएं गंभीर और जानलेवा रूप से घायल हुए।
डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने के आदेश: अदालत ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सरकार को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, आंदोलन प्रभावित राज्यों को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी-कैम रिकॉर्डिंग, वायरलेस संवाद और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है।
पहचान व डेटा सुरक्षा: शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि छात्रों की पहचान और उनका व्यक्तिगत व डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए तथा इसे सार्वजनिक न किया जाए।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को दिल्ली में 'कॉक्रोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में जब संसद भवन की ओर मार्च निकाला गया था, तब सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले , पेलेट गन से बुलेट छोड़े जाने के बाद यह आंदोलन देश के कई राज्यों में फैल गया था। अदालत अब यह भी जांच करेगी कि पुलिस पर हमला आंदोलनकारियों ने किया था या किन्ही अन्य असामाजिक तत्वों ने।

5 अगस्त को CJP की बैठक: आगे की रणनीति पर चर्चा
NEET धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर एक महीने तक चले इस सफल आंदोलन के बाद, 'कॉक्रोच जनता पार्टी' (CJP) अब अपनी आगे की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति तय करने जा रही है। CJP नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण बैठक 5 अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपक के आवास पर आयोजित होगी।
आंदोलन के बाद की स्थिति और CJP की मांगें:
आंदोलन की वापसी: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, मृतक आंदोलनकारियों के परिजनों को मुआवजे और प्रदर्शनकारियों पर नए FIR न दर्ज करने पर सरकार की सहमति के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया है।
संगठन की सलाह: दिल्ली आंदोलन के अंत के बाद स्वयंसेवकों, कार्यकर्ताओं और छात्रों को कुछ समय अपने परिवारों के साथ बिताने की सलाह दी गई थी। साथ ही मुख्य सदस्यों को छात्रों व स्वयंसेवकों से भावी योजनाओं पर सुझाव एकत्र कर 5 अगस्त की बैठक में लाने को कहा गया है।
सरकार से बिना शर्त माफी की मांग: अभिजीत दीपक (जिन्होंने रविवार को अपने आवास पर छात्रों व स्थानीय लोगों से मुलाकात की और 'फ्रेंडशिप डे' भी मनाया) ने मांग की है कि संसद मार्च के दिन हुई पुलिस बर्बरता के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
"केवल इंस्टाग्राम पर माफी का संदेश देने से काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री मोदी को उन छात्रों से माफी मांगनी चाहिए जिनके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं तथा जो पेलेट गन का शिकार हुए हैं। सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तुरंत वापस लेने का निर्देश देना चाहिए।"
— अभिजीत दीपक, संस्थापक, CJP
'जनरेशन जेड' (Gen-Z) के युवाओं के बीच व्यापक प्रतिक्रिया पैदा करने वाले इस ऐतिहासिक आंदोलन के अगले कदम के रूप में अब 5 अगस्त की बैठक के बाद CJP एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी राजनीतिक दिशा और भावी राष्ट्रीय कार्यक्रमों की घोषणा करेगी।
साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति। 03 अगस्त 2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...